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स्पेस में महीनों तक रहने के बाद जमीन पर कैसे चलते हैं एस्ट्रोनॉट्स? जानें क्या होती है परेशानी

अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की मार्च में धरती पर वापसी संभव है. क्या आप जानते हैं कि स्पेस से धरती पर आने पर अंतरिक्षयात्रियों को क्यों चलने की समस्या का सामना करना पड़ता है.

भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की धरती पर जल्द ही वापसी हो सकती है. बता दें कि सुनिता विलियम्स और उनके साथी पिछले 8 महीनो से अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक अब उनको 12 मार्च को वापस धरती पर लाने का प्लान बना है. आज हम आपको बताएंगे कि स्पेस से इतने महीनों के बाद धरती पर आने पर एस्ट्रोनॉट्स को किन समस्याओं का सामना करना पड़ेगा. 

क्या है प्लान?

अब सवाल ये है कि सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की वापसी को लेकर क्या प्लान है. इसको लेकर बुच विल्मोर ने सीएनएन को एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया है. जिसमें उन्होंने अपनी वापसी को लेकर जानकारी दी है. बुच ने बताया है कि 12 मार्च को क्रू-10 मिशन धरती से लॉन्च किया जाएगा. जो सीधे इंटरनेशनल स्पेशल स्टेशन पहुंचेगा. यहां पहुंचने के बाद नया मिशन अगले 6 महीने के लिए होगा. उन्होंने कहा कि नए स्पेस स्टेशन कमांडर के पहुंचने के बाद उन्हें प्रोजेक्ट हैंडओवर कर दिया जाएगा. 

जानकारी के मुताबिक इस वक्त सुनीता विलियम्स फ्लाइंग लैब्रोटरी की कमांडर हैं. क्रू-10 मिशन के जरिए एस्ट्रोनॉट्स के पहुंचने पर वो प्रोजेक्ट हैंडओवर करेंगी. बता दें कि ये हैंडओवर का काम लगभग एक हफ्ते तक चलेगा, जिसके बाद सुनीता और बुच ड्रैंगन स्पेसक्राफ्ट के जरिए धरती पर वापस लौट आएंगे. अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक उनकी वापस 19 मार्च तक हो सकती है. 

सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर

बता दें कि बीते साल 5 जून को सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर को अंतरिक्ष स्टेशन के लिए प्रशिक्षण मिशन पर रवाना हुए थे. जहां उन दोनों को आठ दिनों तक अंतरिक्ष में रहकर वापस लौट आना था. लेकिन स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान में खराबी आने के कारण सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर दोनों अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर ही फंसे हुए हैं.

धरती पर लौटने पर एस्ट्रोनॉट्स को क्या होगी दिक्कत?

जानकारी के मुताबिक स्पेस में लंबे समय तक रहने के बाद जब एस्ट्रोनॉट्स की धरती पर वापसी होगी, तो शुरूआती कुछ दिनों में उन्हें चलने में दिक्कत होगी. क्योंकि उन्हें अपने पैरों में ताकत नहीं महसूस होगी. इसके पीछे का साइंस गुरुत्वाकर्षण बल है. दरअसल अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होने के कारण मांसपेशियां भी कमजोर हो जाती है. वहीं धरती पर लौटते ही शरीर दोबारा गुरुत्वाकर्षण बल के साथ पैरों का इस्तेमाल करना होता है. यही कारण है कि एस्ट्रोनॉट्स को धरती पर आने के बाद शुरूआती कुछ दिनों तक चलने फिरने और संतुलन बनाने में मुश्किल होती है. 

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