इन देशों में खुलेआम नहीं मना सकते हैं ईद, विरोध जताने पर मिलती है इतनी कड़ी सजा
ईद सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह सामाजिक मेलजोल और भाईचारे का प्रतीक भी है. लोग मिठाइयां बांटते हैं, गरीबों को दान देते हैं और अपने रिश्तों को मजबूत करते हैं.

ईद उल फितर इस्लाम धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है. यह रमजान के महीने के खत्म होने पर मनाया जाता है. रमजान में मुसलमान पूरे महीने रोजा रखते हैं, अल्लाह की इबादत करते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं. ईद के दिन लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ खुशियां मनाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, दुआ करते हैं और ईद की नमाज अदा करते हैं. भारत सहित कई देशों में यह त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है.
ईद सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह सामाजिक मेलजोल और भाईचारे का प्रतीक भी है. लोग मिठाइयां बांटते हैं, गरीबों को दान देते हैं और अपने रिश्तों को मजबूत करते हैं. हालांकि, दुनिया के कुछ हिस्सों में मुसलमानों के लिए ईद मनाना इतना आसान नहीं है. वहां धार्मिक आजादी सीमित है और खुलेआम त्योहार मनाने पर कार्रवाई हो सकती है. तो आइए जानते हैं कि किन देशों में ईद खुलेआम नहीं मना सकते हैं और विरोध जताने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है.
किन देशों में ईद खुलेआम नहीं मना सकते हैं?
1. चीन - चीन में उइगर मुस्लिमों पर कड़े नियम लागू हैं, खासकर शिनजियांग क्षेत्र में, यहां सार्वजनिक नमाज पढ़ने, रोजा रखने और धार्मिक आयोजनों पर सरकार की निगरानी रहती है. ईद के बड़े समारोह अक्सर सीमित कर दिए जाते हैं. सीधे ईद मनाने पर सजा नहीं होती, लेकिन अगर नियमों का उल्लंघन किया जाए तो कार्रवाई हो सकती है. उइगर समुदाय के लिए यह त्योहार अब सिर्फ निजी घरों तक सीमित रह गया है. बड़ी संख्या में लोग अब सार्वजनिक जगहों पर ईद समारोह नहीं कर पाते, इस वजह से धार्मिक उत्सव का आनंद उठाना मुश्किल हो जाता है.
2. नॉर्थ कोरिया - नॉर्थ कोरिया दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां लगभग सभी धर्मों पर कड़ा नियंत्रण है. यहां इस्लाम खुलकर मान्यता नहीं रखता और मुसलमान सार्वजनिक रूप से ईद नहीं मना सकते हैं. कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने की कोशिश करता है, तो उसे कड़ी सजा मिल सकती है. इस देश में धार्मिक आजादी लगभग शून्य के बराबर है. यही वजह है कि मुसलमान अपने त्योहारों को भी निजी और गुप्त रूप में ही मनाते हैं.
3. म्यांमार - म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति भी चिंताजनक है. कई इलाकों में उन्हें धार्मिक समारोह मनाने की अनुमति नहीं है. ईद के अवसर पर बड़े इकट्ठे होना अक्सर मुश्किल हो जाता है. सरकारी नियमों और स्थानीय विरोध के कारण रोहिंग्या अपने त्योहार केवल छोटे और निजी स्तर पर ही मना पाते हैं. इसका असर उनकी सामाजिक और धार्मिक जिंदगी पर बहुत बड़ा पड़ता है.
4. इरिट्रिया - इरिट्रिया में सरकार सिर्फ कुछ मान्यता प्राप्त धर्मों को ही आधिकारिक तौर पर अनुमति देती है. मुस्लिम समुदाय पर धार्मिक गतिविधियों की कड़ी निगरानी रहती है. ईद मनाने की स्वतंत्रता सीमित है और सार्वजनिक उत्सव पर रोक लगी हुई है. अगर नियमों का उल्लंघन किया जाए, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
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विरोध जताने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है?
चीन में अगर कोई व्यक्ति नियम तोड़कर सार्वजनिक रूप से धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेने की कोशिश करता है, तो कार्रवाई की संभावना रहती है. इसमें गुप्त नजरबंदी, आर्थिक जुर्माना या सरकारी हिरासत हो सकती है. नॉर्थ कोरिया में विरोध या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सजा बहुत गंभीर हो सकती है. इसमें जेल या अन्य कड़ी कार्रवाई शामिल हो सकती है. यहां सरकार पूरी तरह से धार्मिक गतिविधियों को नियंत्रित करती है, म्यांमार में भी विरोध जताने या नियमों का उल्लंघन करने पर पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारी और स्थानीय हिंसा का खतरा रहता है. इरिट्रिया में नियम तोड़ने पर गुप्त नजरबंदी, गिरफ्तारी और जेल जैसी सजा हो सकती है.
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