सूडान में इतना सोना फिर भी सोने के लिए जंग क्यों, जानें क्या है वजह?
Sudan Gold: सूडान में काफी ज्यादा सोना है लेकिन इसके बावजूद भी वहां सोने के लिए काफी जंग है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

- सूडान का सोना अब गृह युद्ध का प्रमुख ईंधन है।
- सूडानी सेना और RSF सोने के खदानों पर नियंत्रण हेतु लड़ते।
- अधिकांश सोना तस्करी द्वारा युद्ध फंडिंग में उपयोग होता है।
- छोटे खनिक मुश्किल परिस्थितियों में शोषण का सामना करते हैं।
Sudan Gold: सूडान अफ्रीका के प्रमुख सोना उत्पादक देश में से एक है. इसके बावजूद भी इसके विशाल सोने के भंडार समृद्धि के बजाय संघर्ष की वजह बन चुके हैं. सोना सूडान के चल रहे गृह युद्ध से गहराई से जुड़ गया है. इसमें विरोधी सैन्य गुट खदानों, राजस्व और व्यापार रास्ते पर कंट्रोल के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. यह कीमती धातु देश की युद्ध अवस्था का एक बड़ा हिस्सा बन चुकी है.
तेल से होने वाली कमाई हुई बर्बाद
2011 में एक बड़ा आर्थिक मोड़ आया जब दक्षिण सूडान आजाद हो गया. सूडान ने अपने तेल संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा और रिपोर्ट के मुताबिक अपनी तेल से होने वाली कमाई का लगभग 75% हिस्सा खो दिया.
जब तेल से पहले जैसा आर्थिक सहारा नहीं मिल रहा था तो सूडान की अर्थव्यवस्था के लिए सोना और भी जरूरी हो गया. सरकार और शक्तिशाली सैन्य समूह ने सोने के खनन पर अपना ध्यान बढ़ाया. इससे यह कीमती धातु विदेशी मुद्रा और एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई का एक बड़ा जरिया बन गई. जैसे-जैसे देश के लिए सोने का महत्व बढ़ा, खदानों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर कंट्रोल भी प्रतिस्पर्धा सत्ता केंद्र के लिए जरूरी हो गया.

सत्ता के लिए दो सैन्य गुट लड़ रहे हैं
सूडान का संघर्ष मुख्य रूप से दो शक्तिशाली सशस्त्र समूहों के बीच लड़ाई पर केंद्रित है. जनरल अब्देल फतह अल बुरहान के नेतृत्व वाली सूडानी सशस्त्र सेना और मोहम्मद हमदान डगालो के नेतृत्व वाले रैपिड सपोर्ट फोर्सेज. यह संघर्ष सिर्फ राजनीतिक कंट्रोल के बारे में नहीं है. सोने सहित आर्थिक संसाधनों तक पहुंच भी इस संघर्ष का एक जरूरी हिस्सा है.
उत्तरी और पूर्वी सूडान में सोना उत्पादक क्षेत्र पर सूडानी सशस्त्र सेना का प्रभाव है और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज ने लाभदायक खनन क्षेत्र खास तौर से दारफुर और दक्षिण कोर्डोफान के कुछ हिस्सों पर कंट्रोल स्थापित कर लिया है.

सोना युद्ध के लिए धन जुटाने का स्रोत बन गया है
सोना सशस्त्र समूह को पैसा कमाने का तरीका प्रदान करता है. भले ही संघर्ष की वजह से अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई हो. खदान से निकाले गए सोने को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए से बचा जा सकता है. इससे ऐसी कमाई होती है जो हथियार, सैन्य उपकरण और लड़ाकों के भुगतान के लिए धन जुटाना में मदद कर सकती है. इससे एक आत्मनिर्भर युद्ध अर्थव्यवस्था बनती है. इसमें प्राकृतिक संसाधनों पर कंट्रोल सशस्त्र गुटों की लड़ाई जारी रखने में मदद करता है.
जब तक सोना और दूसरे संसाधन इनकम उत्पन्न करते रहते हैं तब तक संघर्ष को समाप्त करने का आर्थिक दबाव कमजोर हो सकता है. इस वजह से खदान पर कंट्रोल एक सैन्य उद्देश्य और वित्तीय जीवन रेखा दोनों बन जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक सूडान का ज्यादातर सोना तस्करी के जरिए बाहर भेजा जाता है.
देश का सोने का व्यापार बड़े पैमाने पर होने वाली तस्करी से भी प्रभावित है. रिपोर्ट्स के मुताबिक सूडानी सोने का एक बड़ा हिस्सा अनौपचारिक रास्ते से देश से बाहर चला जाता है. थिंक टैंक चैथम हाउस सेंचुरी रिपोर्ट्स के आंकड़ों के मुताबिक सूडान का 50% से 70% सोना सरकारी रास्तों से गुजरने के बजाय तस्करी के जरिए विदेशों में भेजा जा सकता है.
इस सोने का एक बड़ा हिस्सा दुबई पहुंचता है जहां से यह बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क में शामिल हो सकता है. इन नेटवर्क से जुड़े आरोपों में सोने से होने वाली कमाई को सैन्य साजो सामान और लॉजिस्टिकल सपोर्ट के लिए फंडिंग से भी जोड़ा गया है.
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छोटे स्तर पर खनन करने वाले सबसे ज्यादा जोखिम में
सूडान में सोने का लगभग 80% खनन छोटे स्तर पर काम करने वाले खनिकों द्वारा किया जाता है. यह मजदूर अक्सर मुश्किल हालातों में काम करते हैं. यहां नियम-कानून, सुरक्षा और सरकारी निगरानी काफी कम होती है. औपचारिक खनन क्षेत्र की कमजोरी का फायदा उठाकर ताकतवर कमांडर, व्यापारी और अपराधी नेटवर्क खनिकों पर अपना प्रभाव जमाते हैं. कुछ इलाकों में गरीब मजदूरों को डराया धमकाया जा सकता है या फिर उनके निकाले गए सोने के लिए काफी कम भुगतान मिल सकता है.
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