क्या सिख धर्म के लोगों को हेलमेट पहनने से मिलती है छूट? जान लें कानून
भारत में हेलमेट पहनना अनिवार्य है, लेकिन मोटर व्हीकल एक्ट के तहत पगड़ी पहनने वाले सिखों को धार्मिक कारणों से छूट दी गई है. कोर्ट ने साफ किया है कि यह सुविधा केवल पगड़ी पहनने वालों के लिए है.

भारत में सड़क सुरक्षा कानून के तहत दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना जरूरी है. मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 129 के अनुसार चालक के साथ-साथ पीछे बैठा व्यक्ति और 4 साल से ऊपर के बच्चे को भी हेलमेट पहनना अनिवार्य है. इस नियम का पालन न करने पर जुर्माना और लाइसेंस निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है. लेकिन क्या सिख धर्म के अनुयायियों को इससे छूट है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताएंगे कि क्या सिख धर्म के लोगों को हेलमेट पहनने पर छूट है और इसे लेकर नियम, सजा और कोर्ट का फैसला क्या कहता है.
पगड़ी पहनने वालों को छूट
सिख धर्म में पगड़ी केवल एक परिधान नहीं बल्कि धार्मिक पहचान और सम्मान का प्रतीक है. पगड़ी सिर को ढककर सुरक्षा भी देती है और इसे सिख परंपरा में बहुत पवित्र माना जाता है. चूंकी की पगड़ी के ऊपर हेलमेट पहनना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है इसलिए मोटर व्हीकल नियमों में पगड़ी पहनने वाले से पुरुषों और महिलाओं को हेलमेट डालने से छूट दी गई है. यह छूट धार्मिक स्वतंत्रता और आस्था का सम्मान करते हुए दी गई है.
हेलमेट न पहनने पर सजा
अगर कोई व्यक्ति हेलमेट पहनने के नियम का उल्लंघन करता है और वह इस छूट की श्रेणी में नहीं आता तो उसे पर 5000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. साथ ही 3 साल तक के लिए ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है . यह सजा न केवल चालक पर लागू होती है बल्कि पीछे बैठने वाले व्यक्ति पर भी लागू होती है.
कोर्ट का स्पष्ट फैसला
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि हेलमेट से छूट केवल पगड़ी पहनने वाले को ही मिलेगी. अगर कोई सिख महिला का पगड़ी नहीं पहनती है तो उसे भी अन्य लोगों की तरह हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक छूट का दुरुपयोग न हो इसके लिए यातायात पुलिस को सख्ती से निगरानी करनी चाहिए.
विशेष परिस्थितियों में छूट
कुछ मामलों में अगर किसी व्यक्ति को हेलमेट पहनने से मेडिकल दिक्कत होती है . जैसे सिर पर चोट या सर्जरी के बाद की स्थिति है तो वह डॉक्टर का प्रमाण पत्र दिखाकर अस्थाई छूट के लिए आवेदन कर सकता है. हालांकि यह छूट अस्थाई होती है और केवल चिकित्सा कर्मी तक ही सीमित रहती है.
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Source: IOCL





















