Women Entry Temples: देश के किन मंदिरों में महिलाओं को नहीं मिलता प्रवेश, देख लीजिए लिस्ट
Women Entry Temples: सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक जगहों पर महिलाओं के अधिकारों को लेकर सुनवाई चल रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत के किन मंदिरों में महिलाओं के जाने पर प्रतिबंध है.

- सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश पर सुनवाई जारी है।
- सबरीमाला, कार्तिकेय मंदिर, पटबौशी सतरा में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।
- धार्मिक मान्यताओं के कारण कुछ मंदिरों में महिलाओं को प्रवेश नहीं मिलता।
- मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने नमाज के लिए मस्जिदों में प्रवेश की बात कही।
Women Entry Temples: सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक जगहों पर महिलाओं के अधिकारों को लेकर चल रही सुनवाई के बीच पूजा स्थलों तक महिलाओं की पहुंच का सवाल एक बार फिर से चर्चा में आ गया है. दरअसल सबरीमाला केस के साथ-साथ अलग-अलग धार्मिक मामलों में महिलाओं के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान बेंच सुनवाई कर रही है. सबरीमाला मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा है कि एक हिंदू आखिरकार तो हिंदू ही है और वह किसी भी मंदिर में जा सकता है. इसी के साथ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से वरिष्ठ वकील एमआर शमशाद ने कहा कि महिलाओं को नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों में प्रवेश करने पर कोई रोक नहीं है. इसी बीच आइए जानते हैं कुछ मंदिरों के बारे में जहां महिलाओं के जाने पर प्रतिबंध है.
सबरीमाला मंदिर, केरल
सबरीमाला मंदिर बीते कुछ सालों में सबसे ज्यादा चर्चा में रहे मामलों में से एक है. यह मंदिर भगवान अय्यप्पा को समर्पित है. अय्यप्पा भगवान को ब्रह्मचारी माना जाता है और इस मंदिर में परंपरागत रूप से 10 से 50 वर्ष की आयु के बीच की महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगी है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में फैसला सुनाया था कि सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति मिलनी चाहिए. लेकिन इसके बावजूद भी यह मुद्दा संवेदनशील बना हुआ है.
पुष्कर और पेहोवा में कार्तिकेय मंदिर
भगवान कार्तिकेय को समर्पित मंदिर जैसे कि पुष्कर और पेहोवा में स्थित मंदिर आज भी महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाते हैं. यहां की मान्यता भगवान कार्तिकेय के ब्रह्मचारी स्वरूप से जुड़ी है और स्थानीय परंपराओं के मुताबिक इन मंदिरों में प्रवेश करने वाली महिलाओं को आशीर्वाद मिलने के बजाय श्राप का सामना करना पड़ सकता है.
पटबौशी सतरा, असम
पटबौशी सतरा 15वीं शताब्दी में स्थापित एक ऐतिहासिक वैष्णव मठ है. हालांकि महिलाओं को कुछ खास हिस्सों में जाने की अनुमति है लेकिन उन्हें गर्भगृह में प्रवेश करने की बिल्कुल भी इजाजत नहीं है. यह पाबंदी मंदिर के अंदर मानी जाने वाली धार्मिक पवित्रता को बनाए रखने के लिए लागू की गई है.
ऋषि ध्रूम आश्रम, उत्तर प्रदेश
हमीरपुर में स्थित यह आश्रम एक अनोखी मान्यता का पालन करता है. महिलाओं को मंदिर परिसर के अंदर जाने की अनुमति नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह माना जाता है कि उनकी उपस्थिति से वहां के देवता या फिर ऋषि क्रोधित हो सकते हैं और अकाल जैसी विपत्तियां आ सकती हैं.
माता मावली मंदिर, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के पुरुष गांव में स्थित माता मावली मंदिर एक ऐसी परंपरा का पालन करता है जिसके तहत महिलाएं मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं कर सकती. इसके बजाय वे मंदिर परिसर के बाहर से ही प्रार्थना करती हैं.
मंगल चंडी मंदिर, झारखंड
मंगल चंडी मंदिर एक और ऐसी जगह है जहां महिलाओं के प्रवेश पर रोक है. स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक अगर महिलाएं मंदिर के अंदर पूजा पाठ करती हैं तो इससे कोई अनहोनी हो सकती है. यही वजह है कि इस रोक को अभी भी जारी रखा गया है.
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