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Republic Day 2026: भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट कौन सी है, क्या है उसका इतिहास?

Republic Day 2026: भारत में आज 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट कौन सी है.

Republic Day 2026: भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. कर्तव्य पथ पर परेड ने एक बार फिर से देश की समृद्ध सैन्य विरासत के साथ साथ सांस्कृतिक और विकास यात्रा को भी उजागर किया. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारतीय सेना की सबसे पुरानी  रेजीमेंट कौन सी है. जानें क्या है उसका इतिहास.

औपनिवेशिक काल में शुरुआत 

रेजिमेंट मद्रास रेजीमेंट की जड़े 18वीं सदी के मध्य तक जाती हैं. इसके औपचारिक स्थापना 1758 में हुई. भारतीय सेना के जनक मेजर स्ट्रेंजर लॉरेंस ने मद्रास लेवीज के नाम से जानी जाने वाली स्थानीय सेनाओं को फिर से संगठित करके दो बटालियन बनाई थी. इससे भी पहले 1660 के दशक के दौरान ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी बस्तियों की रक्षा के लिए दक्षिण भारत में स्थानीय सैनिकों की भर्ती को शुरू कर दिया था. इसने बाद में रेजीमेंट बनने की नींव रखी.

औपनिवेशिक काल के दौरान रेजीमेंट ने कई बड़े संघर्षों में लड़ाई लड़ी. इसमें कर्नाटक युद्ध और टीपू सुल्तान के खिलाफ श्रीरंगपट्टनम की घेराबंदी शामिल है. 

विस्तार, गिरावट और रिवाइवल 

19वीं सदी की शुरुआत तक मद्रास रेजीमेंट का काफी ज्यादा विस्तार हो चुका था. एक समय में इसमें 50 से भी ज्यादा बटालियन थी. इससे यह उस समय के सबसे बड़े इन्फैंट्री समूहों में से एक बन गई थी. हालांकि 1922 में ब्रिटिश भारतीय सेना के एक बड़े पुनर्गठन के कारण इसमें कमी आई और इसका नाम बदलकर तीसरी मद्रास रेजीमेंट कर दिया गया. 1923 और 1928 के बीच इसकी ज्यादातर बटालियनों को भंग कर दिया गया. दूसरे विश्व युद्ध के शुरू होने से यह स्थिति बदल गई. अनुभवी इन्फैंट्री की जरूरत को पहचानते हुए 1941 में रेजीमेंट को फिर से शुरू किया गया. 

भारतीय सेना की सबसे पुरानी बटालियन

मद्रास रेजीमेंट के अंदर 9वीं बटालियन का एक खास स्थान है. मूल रूप से 1704 में पद्मनाभपुरम में त्रावणकोर के महाराजा के रक्षक के रूप में गठित इसे भारतीय सेना में सबसे पुरानी जीवित बटालियन माना जाता है. इस इकाई में 1741 में कोलाचेल की लड़ाई में डच सेनाओं को हराया था. इसे 1951 में औपचारिक रूप से भारतीय सेना में शामिल कर लिया गया था.

आजादी के बाद की भूमिका 

1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद मद्रास रेजीमेंट राष्ट्रीय सेना का एक अभिन्न अंग बन गई. तब से इसने भारत से जुड़े हर बड़े संघर्ष में हिस्सा लिया. इसमें 1947-48 तक कश्मीर युद्ध, 1962 का भारत-चीन युद्ध, पाकिस्तान के साथ 1965 और 1971 के युद्ध और 1999 का कारगिल संघर्ष शामिल है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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