मुस्लिमों के रोजा और क्रिश्चियन के लेंट में क्या फर्क, क्या-क्या चीजें एक जैसी?
लेंट की अवधि में ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों को बहुत ही अनुशासित जीवन बिताना होता है. यह समय प्रायश्चित का होता है. लेंट के दौरान उपवास रखने वाले लोगों को सिर्फ एक समय ही भोजन की अनुमति होती है.

इस्लाम के पवित्र महीने रमजान की शुरुआत 1 मार्च से हो रही है. इस्लाम को मानने वाले मुसलमान इस पाक महीने में रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं. इस्लाम में यह महीना गरीबों और जरूरतमंदों की मदद का है. कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस पाक महीने में दूसरों की मदद करता है, अल्लाह उसे कई गुना ज्यादा सबाब देता है.
जिस तरह से मुस्लिम धर्म को मानने वाले रमजान के महीने में रोजा रखते हैं, ठीक वैसे ईसाई भी 40 दिन का कठिन उपवास करते हैं, जिसे लेंट कहते हैं. यह समय प्रार्थना, उपवास और दान को समर्पित होता है. आइए हम आपको इसके बारे में बताते हैं.
40 दिनों तक चलता है उपवास
ईसाई धर्म में ईस्टर से पहले 40 दिन की अवधि को लेंट कहा जाता है. इसकी शरुआत ऐश बुधवार से होती है और लेंट का अंत पवित्र गुरुवार से होता है. इस बार लेंट बुधवार, 5 मार्च से शुरू होगा जो 17 अप्रैल गुरुवार को समाप्त होगा. 40 दिन की यह अवधि ईसाइयों के लिए चिंतन, क्षमा मांगने और खुद को आध्यात्म की ओर ले जाने के लिए होती है.
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एक समय भोजन की होती है अनुमति
लेंट की अवधि में ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों को बहुत ही अनुशासित जीवन बिताना होता है. यह समय प्रायश्चित का होता है. लेंट के दौरान उपवास रखने वाले लोगों को सिर्फ एक समय ही भोजन की अनुमति होती है. इस अवधि में धूम्रपान जैसी बुरी लतों से भी दूर रहना होता है. यह परंपरा 40 दिनों तक ईसा मसीह के जंगलों और रेगिस्तान में रहने और उनकी पीड़ा पर आधारित है.
हजारों सालों से मनाया जा रहा लेंट
जानकारी के अनुसार, लेंट की शुरुआत कैथोलिक चर्च के 64वें नेता पोप ग्रेगरी ने 601 ईस्वी में की थी. उस समय लेंट 46 दिनों का था, जिसमें 40 दिन के उपवास की अनुमति थी. उस समय इस अवधि में मांस खाने पर भी मनाही थी.
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