NGO से कितना अलग होता है ट्रस्ट का कामकाज, 'राम मंदिर चंदा चोरी' विवाद के लिए जान लीजिए जवाब?
Ayodhya Ram Mandir Controversy: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की दान चोरी मामले में बैठक चल रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि ट्रस्ट और एनजीओ में क्या फर्क होता है.

- अयोध्या मंदिर दान विवाद के बाद ट्रस्ट, एनजीओ में अंतर।
- ट्रस्ट डीड से नियंत्रित, एनजीओ सदस्य लोकतांत्रिक ढंग से चुने जाते।
- ट्रस्ट कम जवाबदेह, एनजीओ वित्तीय फैसले अधिक पारदर्शी होते।
Ayodhya Ram Mandir Controversy: अयोध्या राम मंदिर दान की कथित चोरी के बाद विवाद बढ़ चुका है. आज श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस मामले पर चर्चा करने के लिए एक बैठक बुलाई है. चल रही बहस के बीच कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ट्रस्ट और एक एनजीओ में क्या फर्क होता है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
कानूनी संरचना और प्रबंधन
एक ट्रस्ट की स्थापना निजी ट्रस्ट के लिए भारतीय ट्रस्ट अधिनियम 1882 के तहत या फिर सार्वजनिक ट्रस्टों के लिए राज्य के सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम के तहत की जाती है. यह ट्रस्ट डीड के प्रावधानों के मुताबिक काम करता है. साथ ही सभी अधिकार ट्रस्टियों के पास होते हैं. इसके रोजमर्रा के कामकाज में लोकतांत्रिक चुनाव या फिर बाहरी सदस्यों के हस्तक्षेप की कोई भी व्यवस्था नहीं है.
दूसरी तरफ एक एनजीओ आमतौर पर सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 या फिर कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के तहत पंजीकृत होता है. इसका प्रबंधन एक गर्वनिंग बॉडी या फिर प्रबंधन समिति द्वारा किया जाता है. इसके सदस्यों को आमतौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए से चुना जाता है.
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पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही
एक ट्रस्ट की जवाबदेही रूपरेखा एक एनजीओ से अलग होती है. एक सार्वजनिक धार्मिक या फिर धर्मार्थ ट्रस्ट मुख्य रूप से अपने ट्रस्ट डीड और लागू आयकर नियम के प्रति जवाबदेह है. आम जनता सीधे अपने आंतरिक खातों का निरीक्षण नहीं कर सकती जब तक कि किसी अदालत या फिर दूसरे कानूनी प्राधिकरण द्वारा जांच का आदेश न दिया जाए. लेकिन एनजीओ आमतौर पर ज्यादा पारदर्शी आंतरिक संरचना का पालन करते हैं. सदस्यों को वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करने, बैठक के दौरान सवाल उठाने और वार्षिक रिपोर्ट तक पहुंच का पूरा अधिकार है.
वित्तीय फैसले कैसे लिए जाते हैं?
एक ट्रस्ट में ट्रस्टियों के पास यह तय करने का खास अधिकार होता है कि दान और दूसरे पैसे का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा, जब तक की व्यय ट्रस्ट डीड में उद्देश्यों के साथ मिले. राम मंदिर ट्रस्ट के मामले में मंदिर निर्माण, भूमि अधिग्रहण या दान के इस्तेमाल से संबंधित फैसले बाहरी व्यक्तियों की मंजूरी के बिना न्यासी बोर्ड द्वारा लिए जाते हैं. गैर सरकारी संगठनों के लिए प्रमुख वित्तीय फैसलों के लिए आमतौर पर पैसे का इस्तेमाल करने से पहले एक औपचारिक प्रस्ताव के जरिए से शासी निकाय या फिर सामान्य निकाय की मंजूरी की जरूरत होती है.
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