सौरमंडल के बाहर से आया रेडियो सिग्नल, वैज्ञानिकों का सवाल- उस ग्रह पर आखिर क्या है?
वैज्ञानिकों को सौरमंडल के बाहर एक चट्टानी ग्रह से रहस्यमयी रेडियो सिग्नल मिले हैं, जिसके बाद वहां चुंबकीय क्षेत्र और जीवन के अनुकूल वातावरण होने की संभावनाओं को लेकर नई बहस छिड़ गई है.

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में हाल ही में एक ऐसी ऐतिहासिक खोज हुई है, जिसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. खगोलविदों ने पहली बार हमारे सौरमंडल के बाहर मौजूद एक रहस्यमयी ग्रह से सीधे आने वाले रेडियो सिग्नल को पकड़ने में कामयाबी हासिल की है. यह सिग्नल पृथ्वी से करीब 63 प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक ग्रह से आ रहा है.
इस खोज के बाद से ही वैज्ञानिकों के मन में यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर उस अंजान ग्रह पर ऐसा क्या है, जो वहां से लगातार रेडियो तरंगे निकल रही है. आइए जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और वैज्ञानिकों ने इसके पीछे क्या वजह बताई है.
किस ग्रह से आ रहा है यह रहस्यमयी सिग्नल?
हार्वर्ड और स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रॉफिजिक्स के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका में स्थित बेहद शक्तिशाली मीरकैट रेडियो टेलीस्कोप की मदद से इस सिग्नल को रिकॉर्ड किया है. अंतरिक्ष में जिस जगह से यह आवाज आ रही है, उस ग्रह का नाम वैज्ञानिकों ने बीटा पिक्टोरिस बी रखा है. यह एक एक्सोप्लैनेट यानी हमारे सौरमंडल से बाहर किसी दूसरे तारे के चक्कर लगाने वाला ग्रह है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह ग्रह आकार में बेहद विशाल है और इसका द्रव्यमान हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति से भी लगभग 11 गुना ज्यादा है.
क्या यह किसी एलियन का संदेश है?
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह सिग्नल उस ग्रह पर होने वाली एक अद्भुत प्राकृतिक घटना के कारण पैदा हो रहा है. इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें सामने आई हैं. पृथ्वी पर जैसे उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर आसमान में खूबसूरत हरी-लाल रोशनी चमकती है, जिसे हम ऑरोरा कहते हैं, ठीक वैसी ही घटना उस ग्रह पर भी हो रही है. अंतरिक्ष के उच्च-ऊर्जा वाले कण जब उस ग्रह के वायुमंडल से टकराते हैं, तो वहां बड़े पैमाने पर ऑरोरा बनते हैं जो रेडियो तरंगें पैदा करते हैं.
इसके अलावा, इस ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी के मुकाबले 2,500 गुना ज्यादा मजबूत है. साथ ही, यह ग्रह बेहद तेज गति से घूमता है और महज 8 से 9 घंटे में अपना एक चक्कर पूरा कर लेता है. इतनी तेज रफ्तार और मजबूत चुंबकीय क्षेत्र के कारण वहां से लगातार रेडियो तरंगों के झटके निकल रहे हैं.
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क्यों ऐतिहासिक है यह खोज?
इससे पहले भी अंतरिक्ष में कई बार रेडियो सिग्नल पकड़े गए हैं, लेकिन वैज्ञानिक कभी यह साबित नहीं कर पाते थे कि वह सिग्नल किसी ग्रह से आ रहा है या उसके पास मौजूद किसी धधकते हुए तारे से. यह इतिहास में पहली बार हुआ है जब आधुनिक तकनीक की मदद से वैज्ञानिकों ने 100% सटीक रूप से यह साबित कर दिया है कि सिग्नल सीधे तौर पर एक ग्रह से ही आ रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी ग्रह पर चुंबकीय क्षेत्र का होना वहां जीवन की संभावनाओं के लिए सबसे जरूरी शर्त है, क्योंकि यही चुंबकीय क्षेत्र ग्रह के वायुमंडल को अंतरिक्ष के खतरनाक रेडिएशन से बचाता है.
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