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भारत में SPG, अमेरिका में सीक्रेट सर्विस तो कौन करता है रूस के राष्ट्रपति पुतिन की सुरक्षा, ये कितने खतरनाक?

Vladimir Putin Security: पुतिन की सुरक्षा केवल बॉडीगार्ड्स तक सीमित नहीं, बल्कि हाइपर-टेक्नोलॉजी और गुप्त कमांडो नेटवर्क का जाल है. आइए इसके बारे में जान लेते हैं.

जब पुतिन किसी देश में कदम रखते हैं तो सिर्फ उनकी उपस्थिति ही नहीं बल्कि उनके चारों ओर बनने वाला अदृश्य सुरक्षा का जाल भी सबकी नजरों से छिपा रहता है. 30 घंटे के भारत दौरे में हर कदम, हर पल, हर इशारे पर उनकी सुरक्षा टीमें नजर रखती हैं. यह कोई सामान्य बॉडीगार्ड्स की लाइन नहीं, बल्कि हाइपर-एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, स्पेशल कमांडो यूनिट्स और साइबर सुरक्षा का ऐसा नेटवर्क है, जिसे दुनिया शायद ही देख सके. आइए पुतिन की सुरक्षा को थोड़ा समझ लेते हैं. 

पुतिन की सुरक्षा में कौन कौन शामिल

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दुनिया के सबसे सुरक्षित नेताओं में गिने जाते हैं, चाहे भारत का 30 घंटे का दौरा हो या अंतरराष्ट्रीय मिशन, उनके चारों ओर एक अदृश्य सुरक्षा कवच बना रहता है. यह सुरक्षा सिर्फ बॉडीगार्ड्स तक सीमित नहीं है. इसमें विशेष कमांडो यूनिट्स, मल्टी-लेयर प्रोटेक्शन, हाई-टेक वाहन, साइबर कंट्रोल और ऐसी टीमें शामिल होती हैं, जिन्हें आम दुनिया शायद देख भी न पाए.

रशियन फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस

पुतिन की व्यक्तिगत सुरक्षा की जिम्मेदारी रशियन फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस (FSO) के हाथ में होती है. FSO, जिसकी जड़ें सोवियत KGB तक जाती हैं, पुतिन की सुरक्षा का केंद्र बिंदु है. इसके अंतर्गत क्लोज-प्रोटेक्शन टीम का चुनाव बेहद कड़ा होता है. उम्मीदवारों की उम्र, हाइट, फिजिकल फिटनेस, निशानेबाजी कौशल, साइकोलॉजिकल मजबूती, भाषा ज्ञान और वफादारी की जांच की जाती है. जो भी इस टीम का हिस्सा बनता है, उसे कई सालों की ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है.

पुतिन के आस-पास दिखने वाले लोग सूट पहने गार्ड, कान में इयरपीस पहने असल में एक विशाल सुरक्षा नेटवर्क का सिरा होते हैं. इसके पीछे स्नाइपर्स, इलेक्ट्रॉनिक-वॉरफेयर टीम, रूट एनालिस्ट, मेडिक और कम्युनिकेशन सेल जैसे घटक महीनों पहले ही तैनात होते हैं, ताकि हर जोखिम को पहले से नियंत्रित किया जा सके.

पुतिन की सुरक्षा के तीन स्तंभ

पुतिन की सुरक्षा तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है. पहला, Federal Protective Service (FSO), जो सीधे पुतिन को रिपोर्ट करता है और रूस में CIA, Secret Service और NSA का मिश्रित रूप माना जाता है. इस एजेंसी में 50,000 से अधिक कर्मी हैं, जो हाई-टेक कम्युनिकेशन, ड्रोन-जैमिंग और 24x7 निगरानी का काम संभालते हैं.

Zaslon यूनिट

दूसरा, Zaslon Unit, रूस की सबसे गुप्त एलीट कमांडो टीम, जो FSB के तहत काम करती है. ये कमांडो अदृश्य सुरक्षा घेरा बनाते हैं. विदेशी मिशनों, आतंकवाद नियंत्रण और हाई-प्रोफाइल VVIP प्रोटेक्शन में इनके पास विशेष प्रशिक्षण है. स्नाइपर्स, तेज-प्रतिक्रिया दल और काउंटर-असॉल्ट टीम्स इसी यूनिट का हिस्सा हैं.

प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी सर्विस

तीसरा, Presidential Security Service (SBP), पुतिन के सबसे नजदीकी बॉडीगार्ड्स की टीम है. इसके तहत 5-7 मीटर के दायरे में हमेशा 8-12 एजेंट मौजूद रहते हैं. इनके पास गोलियों को मोड़ने वाली ब्रीफकेस शील्ड, कस्टम-बुलेटप्रूफ जैकेट, हाई-फ्रीक्वेंसी कम्युनिकेशन डिवाइस और चलती मोबाइल कमांड रूम जैसी सुविधाएं हैं.

हाई-टेक वाहन और एस्कॉर्ट सिस्टम

पुतिन की सुरक्षा में हाई-टेक वाहन और एस्कॉर्ट सिस्टम भी शामिल हैं. Aurus Senat, पुतिन की कार, 6 किलो TNT के विस्फोट झेल सकती है. इसमें एंटी-मिसाइल सिस्टम, बुलेटप्रूफ और आग-रोधी शील्ड, रन-फ्लैट टायर जैसी तकनीकें हैं. इसके अलावा अदृश्य सुरक्षा की तकनीकें भी काम में आती हैं. एंटी-ड्रोन डोम, एन्क्रिप्टेड मोबाइल नेटवर्क, साइबर मॉनिटरिंग और जैमिंग शील्ड पुतिन को हर प्रकार की खतरे से बचाती हैं. यह सुरक्षा कवच इतना जटिल है कि इसे पार करना किसी भी विरोधी के लिए लगभग असंभव है. 

यह भी पढ़ें: कब खाएंगे... कब पिएंगे और कब सोएंगे... 30 घंटे के भारत दौरे में कब-क्या करेंगे पुतिन?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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