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प्लास्टिक करेंसी के बाद कागज के नोटों का क्या करेगा RBI, कैसे होंगे नष्ट?

RBI Paper Notes: भारत में पॉलीमर नोट लाने पर चर्चा चल रही है. शुरुआत में 10 और 20 के नोट लाए जाएंगे. इसी बीच आइए जानते हैं कि पुराने नोटों को कैसे नष्ट किया जाएगा.

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  • आरबीआई इन रीसायकल ब्रिकेट्स को औद्योगिक खरीदारों को बेचता है।

RBI Paper Notes: जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पॉलीमर नोटों का ट्रायल करने की तैयारी कर रहा है तो कई लोग इस बात को सोच रहे हैं कि मौजूदा कागजी नोटों का क्या होगा. दरअसल पुराने नोटों को बस जलाया या फिर फेंका नहीं जाता. आरबीआई की क्लीन नोट पॉलिसी के तहत खराब हो चुके नोटों को पूरी तरह से ऑटोमेटेड, काफी सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से नष्ट और रीसायकल किया जाता है. इससे यह पक्का किया जा सकता है कि उन्हें दोबारा गलत इस्तेमाल में ना लाया जा सके.

कैसे होती है नष्ट करने वाले नोटों की पहचान? 

यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब कमर्शियल बैंक ग्राहकों द्वारा जमा किए गए फटे, गंदे या फिर खराब नोट इकट्ठा करते हैं. इन नोटों को आरबीआई के करेंसी चेस्ट में भेजा जाता है. यहां कई तरह से उनकी जांच पड़ताल की जाती है. 

नोटों को करेंसी वेरिफिकेशन एंड प्रोसेसिंग सिस्टम से गुजारा जाता है. यह एक ऑटोमेटेड मशीन है और हर सेकंड लगभग 50 से 60 नोटों की जांच कर सकती है. यह सिस्टम नकली नोटों की पहचान करने के लिए कागज की क्वालिटी, सिक्योरिटी थ्रेड, वॉटरमार्क और दूसरे सिक्योरिटी फीचर्स की जांच करता है. अगर कोई भी नकली नोट पाया जाता है तो उसे अलग से जब्त कर लिया जाता है. असली नोट जो चलन के लायक नहीं रह जाते उन्हें तुरंत नष्ट करने के लिए मार्क कर दिया जाता है.


प्लास्टिक करेंसी के बाद कागज के नोटों का क्या करेगा RBI, कैसे होंगे नष्ट?

आरबीआई पुराने करेंसी नोटों को क्यों नहीं जलाता?

पहले पुराने नोटों को जलाना उन्हें खत्म करने का एक तरीका था. लेकिन प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन को कम करने के लिए आरबीआई ने यह तरीका बंद कर दिया है. इसके बजाय खराब नोट को मशीन से तेजी से काटकर नष्ट किया जाता है. इससे यह प्रक्रिया पर्यावरण के लिए ज्यादा सुरक्षित और ज्यादा भरोसेमंद हो जाती है. 

पुराने नोटों को कैसे काटा जाता है? 

जब नोटों के इस्तेमाल का समय खत्म हो जाता है तब उन्हें CVPS से जुड़ी इंडस्ट्रियल श्रेडर मशीन में ऑटोमेटिक तरीके से डाला जाता है. ये मशीन माइक्रो श्रेडिंग करती हैं. यानी हर नोट को काफी बारीक और टेढ़े-मेढ़े टुकड़ों में काटती हैं. क्योंकि टुकड़े काफी ज्यादा छोटे और अलग-अलग आकार के होते हैं इस वजह से नोट को दोबारा जोड़ना लगभग नामुमकिन हो जाता है. इससे गलत इस्तेमाल का खतरा खत्म हो जाता है.

नोटों के कट जाने के बाद क्या होता है? 

कटे हुए कागज को हवा के दबाव का इस्तेमाल करके न्यूमैटिक ट्यूब के जरिए ब्रेकेटिंग यूनिट तक पहुंचाया जाता है. यहां शक्तिशाली हाइड्रोलिक प्रेस कागज के ढीले टुकड़ों को दबाकर छोटी ईंट या फिर सिलेंडर जैसे ठोस ब्लॉक में बदल देते हैं. इस प्रक्रिया में किसी भी जहरीले कैमिकल या फिर गोंद का इस्तेमाल नहीं किया जाता. आरबीआई की सुरक्षित जगह से इन दबे हुए ब्लॉक के निकलने से पहले हर बैच का ध्यान से वजन किया जाता है और उसका रिकॉर्ड रखा जाता है. ऐसा इसलिए ताकि पूरी तरह से सिक्योरिटी ट्रेल बनी रहे. 

यह भी पढ़ेंः वक्त से पहले प्रोजेक्ट पूरा हुआ तो कितना बचता है पैसा?, जानें पूरा हिसाब-किताब

नष्ट किए गए नोटों का रीसायकल कैसे किया जाता है? 

आरबीआई कटे हुए नोटों के मलबे को कचरा मानने के बजाय यह पक्का करता है कि इसे इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए रीसायकल किया जाए. दबाकर बनाए गए ब्लॉक को सेल्यूलोज पंप में बदल दिया जाता है. इसे नए फाइबर के साथ मिलाकर ऑफिस फाइल फोल्डर, क्लिपबोर्ड, कैलेंडर, डायरी और स्टेशनरी का सामान बनाया जाता है. 

कुछ ब्रिकेट्स सर्टिफाइड इंडस्ट्रियल यूनिट्स को सप्लाई किए जाते हैं. यहां इनका इस्तेमाल कम प्रदूषण वाले और पर्यावरण के अनुकूल बॉयलर फ्यूल के तौर पर होता है. रीसायकल किए गए फाइबर से मोल्डेड फाइबरबोर्ड, इंसुलेशन बोर्ड और भारी भरकम पैकेजिंग पदार्थ भी बनाए जाते हैं.


प्लास्टिक करेंसी के बाद कागज के नोटों का क्या करेगा RBI, कैसे होंगे नष्ट?

क्या आरबीआई नष्ट किए गए नोटों से पैसे कमाता है?

आरबीआई रीसायकल किए गए नोटों के पदार्थ से भी वैल्यू वसूलता है. कटे हुए नोटों से बने ब्रिकेट को एक औपचारिक टेंडर प्रक्रिया के जरिए योग्य इंडस्ट्रियल खरीदारों को बेचा जाता है. इससे पारदर्शिता बनी रहती है और रीसायकल किए गए पदार्थ का इस्तेमाल प्रोडक्टिव इंडस्ट्रियल कामों के लिए दोबारा किया जा सकता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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