क्या निजी तालाब पर भी लगेगा फ्लोटिंग सोलर पैनल, क्या है सूर्य सरोवर योजना?
PM Surya Sarovar Yojana: प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी मिल चुकी है. आइए जानते हैं कि क्या है इस योजना का फायदा.

PM Surya Sarovar Yojana: केंद्र सरकार ने भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दे दी है. इसके तहत तालाब, झील, जलाशय और नहरों पर फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाए जाएंगे. इस योजना का मकसद बिना एक्स्ट्रा जमीन लिए साफ सुथरी बिजली पैदा करना, साथ ही पानी बचाना और देश के बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है. जैसे-जैसे योजना की जानकारी सामने आ रही है कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या निजी तालाबों का इस्तेमाल भी फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट के लिए किया जा सकता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना क्या है?
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में एक बड़े रिन्यूएबल एनर्जी इनिशिएटिव के तौर पर मंजूरी दी थी. इस योजना के लिए ₹5070 करोड़ का बजट रखा गया है. साथ ही इसे 2026-27 से 2030-31 के वित्तीय वर्ष के बीच लागू किया जाएगा. इस योजना का मुख्य मकसद 5000 MW की फ्लोटिंग सोलर पावर क्षमता और 10,000 MWh की बैटरी एनर्जी स्टोरेज क्षमता को बनाना है. ऐसा इसलिए ताकि हर प्रोजेक्ट में कम से कम 2 घंटे का बैकअप पावर मिल सके. इस प्रोजेक्ट से पैदा होने वाली बिजली नेशनल ग्रिड को सप्लाई की जाएगी. इसके बाद राज्यों को साफ और सस्ती ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी.

क्या निजी तालाब बीच में शामिल होंगे?
निजी तालाबों को भी इसमें शामिल किया जाएगा. इस योजना के तहत निजी तालाबों और औद्योगिक जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाने की इजाजत है. बस शर्त यह है कि वह सरकार द्वारा तय तकनीकी और कमर्शियल मानकों को पूरा करते हों. हालांकि इसमें मुख्य रूप से बड़े पैमाने के प्रोजेक्ट पर ध्यान दिया जाएगा. औद्योगिक जलाशय, कमर्शियल जलाशय और बड़े निजी या सामुदायिक तालाबों को प्राथमिकता दी जा सकती है, क्योंकि ये प्रोजेक्ट मेगावाट के पैमाने पर बिजली पैदा करने के लिए डिजाइन किए गए हैं. इन प्रोजेक्ट को लागू करने में प्राइवेट सेक्टर के डेवलपर्स की भी बड़ी भूमिका होने की उम्मीद है.
सरकार इन प्रोजेक्ट में कैसे मदद करेगी?
निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने योजना के तहत योग्य डेवलपर्स के लिए आर्थिक मदद की घोषणा की है. प्रोजेक्ट के सफल कार्यान्वयन के बाद प्रति मेगावाट एक करोड़ तक की सेंट्रल फाइनेंशियल अस्सिटेंस दी जाएगी. इसके अलावा डेवलपर्स बाथिमेट्री और हाइड्रोग्राफी जैसे तकनीकी सर्वे करने के लिए 50 लाख तक की राशि पा सकते हैं. ये फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने से पहले काफी जरूरी होते हैं. इस स्कीम को रिन्यूएबल एनर्जी के विकास को तेज करने के लिए सरकारी एजेंसी और प्राइवेट निवेदक दोनों को ही आकर्षित करने के मकसद से ही बनाया गया है.
फ्लोटिंग सोलर पैनल बेहतर क्यों?
फ्लोटिंग सोलर टेक्नोलॉजी जमीन पर लगने वाले पारंपरिक सोलर प्रोजेक्ट की तुलना में कई बड़े फायदे देती है. क्योंकि पैनल पानी के स्रोत पर लगाए जाते हैं इस वजह से खेती या फिर दूसरी कीमती जमीन लेने की जरूरत नहीं पड़ती. यही वजह है की लागत और विवाद दोनों में कमी देखने को मिलती है.
पानी की ठंडक सोलर पैनल की क्षमता को भी बढ़ाती है. इससे वे जमीन पर लगे ऐसे ही सिस्टम की तुलना में ज्यादा बिजली पैदा कर पाते हैं. इसका एक और बड़ा फायदा पानी का संरक्षण है. पानी की सतह के एक हिस्से को ढकने से पानी का वाष्पीकरण कम होता है और सिंचाई व पीने के बक्सर से पानी बचाने में मदद मिलती है.
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इस स्कीम के मुख्य लक्ष्य क्या हैं?
सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के लिए बड़े ऑपरेशनल लक्ष्य तय किए हैं. 5000 MW की फ्लोटिंग सोलर क्षमता के अलावा हर प्रोजेक्ट में कम से कम 2 घंटे तक बिजली सप्लाई करने की ताकत वाली बैटरी स्टोरेज शामिल होनी चाहिए. इससे कुल 10,000 MWh की स्टोरेज क्षमता बनेगी. ये प्रोजेक्ट 5 साल में पूरे किए जाएंगे और मंजूर किए गए प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए इस स्कीम के तहत आर्थिक मदद 2032-33 तक जारी रहने की उम्मीद है.

प्रोजेक्ट कैसे दिए जाएंगे?
मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी के तहत काम करने वाली सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को इस स्कीम को लागू करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है. सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया देश भर में उपयुक्त जल निकाय के लिए सरकारी और प्राइवेट डेवलपर से बोलियां मंगाएगी. प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया या फिर राज्य की बिजली वितरण कंपनी इन फ्लोटिंग सोलर प्लांट से पैदा होने वाली बिजली खरीदने के लिए लंबे समय के पावर परचेज एग्रीमेंट करेंगी.
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