अदार पूनावाला पारसी तो शहजाद पूनावाला मुसलमान कैसे? दोनों का धर्म अलग क्यों?
Poonawalla Surname: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. आइए जानते हैं पूनावाला सरनेम के इतिहास के बारे में.

- पूनावाला उपनाम पुणे शहर से जुड़ा है, धर्म से नहीं।
- अदार (पारसी) और शहजाद (मुस्लिम) का एक ही उपनाम है।
- पुणे से ऐतिहासिक रूप से जुड़े परिवारों ने यह उपनाम अपनाया।
Poonawalla Surname: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल में बदलाव और दूसरे संकेतों ने काफी चर्चा छेड़ दी है. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक और बड़ा सवाल उठ रहा है. सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला पारसी हैं और शहजाद पूनावाला मुस्लिम, लेकिन इसके बावजूद भी दोनों का सरनेम एक ही कैसे हैं? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
क्या है इस सरनेम का इतिहास?
अदार पूनावाला और शहजाद पूनावाला के बीच कोई भी खून का या फिर पारिवारिक रिश्ता नहीं है. पूनावाला सरनेम किसी खास धर्म से जुड़ा नहीं है. दरअसल यह जगह के नाम पर आधारित एक सरनेम है जिसे पुणे से ऐतिहासिक रूप से जुड़े परिवारों ने अपनाया था. यही वजह है कि अलग-अलग धर्म के लोग जिनमें पारसी, मुस्लिम और कुछ हिंदू परिवार भी शामिल हैं एक ही सरनेम रख सकते हैं.
भारत में जगह के नाम पर आधारित कुछ ऐसे सरनेम हैं जैसे कि दारूवाला, मारवाड़ी और मद्रासी जो धर्म के बजाय भौगोलिक या फिर पेशावर पहचान को दर्शाते हैं.

अदार पूनावाला और शहजाद पूनावाला के धर्म अलग-अलग क्यों?
पूनावाला सरनेम पुणे शहर से निकला है और यह किसी व्यक्ति के धर्म या फिर जाति को नहीं बताता. पश्चिमी भारत में खासकर महाराष्ट्र और गुजरात में कई परिवारों ने पारंपरिक रूप से अपने गृह नगर या फिर पेशे के नाम के आगे "वाला" जोड़कर सरनेम अपनाए. वक्त के साथ अलग-अलग समुदायों के परिवार जो पुणे में बस गए उन्होंने पूनावाला को अपना सरनेम बनाना शुरू कर दिया. यही वजह है कि दो अलग-अलग परिवारों का सरनेम एक ही हो सकता है जबकि वे पूरी तरह से अलग धर्म से ही क्यों ना हों.
अदार पूनावाला की पारिवारिक पृष्ठभूमि
अदार पूनावाला सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के संस्थापक डॉक्टर साइरस पूनावाला के बेटे हैं. उनका परिवार पारसी समुदाय से है. पारसियों के पूर्वज धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए आठवीं और दसवीं सदी के बीच फारस से भारत आ गए थे. मुख्य रूप से गुजरात और बाद में महाराष्ट्र में बसने के बाद उन्होंने स्थानीय भाषाओं और रीति-रिवाज को अपनाते हुए भी अपने पारसी धर्म को बनाए रखा.
ब्रिटिश काल के दौरान अदार पूनावाला के पूर्वज पुणे में बस गए. शहर के साथ उनके जुड़ाव की वजह से उन्होंने पूनावाला सरनेम अपना लिया. 1966 में पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की स्थापना के अलावा यह परिवार पूनावा स्टड फार्म्स के जरिए हॉर्स ब्रीडिंग से लंबे समय से जुड़े होने के लिए भी जाना जाता है.
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शहजाद पूनावाला का पारिवारिक बैकग्राउंड
शहजाद पूनावाला पुणे महाराष्ट्र के एक मुस्लिम परिवार से हैं. वे पॉलीटिकल एनालिस्ट तहसीन पूनावाला के भाई भी हैं. शहजाद ने सार्वजनिक रूप से खुद को धर्म से मुस्लिम, संस्कृति से हिंदू और विचारधारा से भारतीय बताया है.
पूनावाला के मुताबिक उनके पूर्वज मूल रूप से जमादार सरनेम का इस्तेमाल करते थे. यह मुगल और मराठा काल के दौरान सैन्य अधिकारियों या फिर जागीर प्रशासकों से जुड़ा एक ऐतिहासिक पद या फिर उपाधि थी. जैसे-जैसे परिवार ने पुणे में अपना घर और कारोबार स्थापित किया उन्होंने शहर के साथ अपनी भौगोलिक पहचान और पेशेवर जुड़ाव को दिखाने के लिए बाद में पूनावाला सरनेम को अपना लिया.

क्या अलग-अलग धर्म के लोग एक ही सरनेम रख सकते हैं?
भारत में कई सरनेम धर्म के बजाय शहर, गांव, पेशे या फिर पारंपरिक उपाधि से बने हैं. यही वजह है कि अलग-अलग धर्मों के परिवारों के सरनेम एक जैसे हो सकते हैं. भले ही उनके बीच कोई भी पारिवारिक रिश्ता ना हो. पूनावाला सरनेम इसका एक उदाहरण है. इस सरनेम को पारसी, मुस्लिम और कुछ हिंदू परिवार इस्तेमाल करते हैं जिनकी जड़ें पुणे से जुड़ी हैं.
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