कौन करता है शी जिनपिंग की सुरक्षा, क्या भारत भी आएंगे ये कमांडो?
Xi Jinping India Visit: सितंबर में ब्रिक्स सम्मेलन के लिए शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना है. इस दौरान उनके अभेद्य सुरक्षा घेरे की भी चर्चा हो रही है. चलिए उनकी सुरक्षा के बारे में जानते हैं.

- भारत दौरे पर होंकी N501 कार, कमांडो साथ रहेंगे।
Xi Jinping India Visit: भारत में सितंबर 2026 में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना जताई जा रही है. अगर यह दौरा तय रहा तो कोविड-19 और गलवान घाटी झड़प के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होने जा रही है. वहीं मिडिल ईस्ट जंग भी चल रही है, ऐसे में जिनपिंग के भारत दौरे पर दुनिया की नजर रहेगी. दरअसल 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी निचले स्तर पर पहुंच गए थे.
12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति की मौजूदगी को देखते हुए उनकी बेहद मजबूत और अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था और उनके खास कमांडो के भारत आगमन को लेकर हर तरफ चर्चा शुरू हो गई है. आइए चीनी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में समझ लेते हैं.
किसके हाथों में शी जिनपिंग की सुरक्षा?
साल 2019 की एक रिपोर्ट बताती है कि चीन के सर्वोच्च नेता की सुरक्षा का जिम्मा सेंट्रल सिक्योरिटी ब्यूरो के हाथ में होता है, जिसका गठन 1949 में माओ त्से तुंग को सुरक्षा देने के लिए किया गया था. तब से यह एजेंसी कम्युनिस्ट पार्टी के टॉप नेताओं की रक्षा कर रही है. आंकड़ों की मानें तो इस ब्यूरो में करीब 8000 बेहद प्रशिक्षित जवान तैनात हैं, जिनको चीन की सेना की अलग-अलग रेजीमेंट से चुनकर तैयार किया जाता है. पूरी सुरक्षा इकाई 7 ग्रुपों और 36 रेजीमेंटों में बांटी गई है. इस दल को यूनिट 8341, यूनिट 57001 या सेंट्रल गार्ड रेजीमेंट के नाम से भी जाना जाता है.
कैसा होता है सुरक्षा घेरा?
यूनिट के जवानों के लिए सुरक्षा के नियम बेहद कठोर और गोपनीय बनाए गए हैं. इन कमांडो को किसी के भी सामने अपना असली नाम बताने की इजाजत नहीं है. अगर वे अपनों के लिए कोई चिट्ठी आदि भेजते भी हैं तो उस पर नाम-पते की जगह सिर्फ रेजीमेंट और पद के बारे में जानकारी दी जाती है. शी जिनपिंग की सुरक्षा बहुस्तरीय होती है, जिसमें 6 से 8 पर्सनल कमांडो का एक अंदरूनी सुरक्षा घेरा हमेशा उनके आसपास तैनात होता है. हालांकि चीनी राष्ट्रपति अपने अंदरूनी घेरे और इन पर्सनल गार्ड्स को समय-समय पर बदलते रहते हैं, जिससे कि सुरक्षा में कोई भी चूक न हो.
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आधुनिक हथियारों से लैस बॉडीगार्ड्स
शी जिनपिंग के अंगरक्षकों को सबसे आधुनिक औक घातक हथियारों से लैस किया जाता है. सुरक्षा में तैनात हर कमांडो के पास चीन में बनी 5 मशीनगन और ब्राजील की अत्याधुनिक पीटी 709 पिस्टल होती है. इसके अलावा आपसी तालमेल बनाए रखने के लिए सभी जवानों के पास हाई टेक्नोलॉजी वाले वायरलेस और कम्युनिकेशन मौजूद रहते हैं. विदेशी या फिर घरेलू दौरों से पहले ब्यूरो के प्रमुख खुद उस जगह पर जाकर बारीकी से सुरक्षा का जायजा लेते हैं. राष्ट्रपति का अग्रिम सुरक्षा लावलश्कर किसी भी कार्यक्रम स्थल पर मुख्य काफिले से काफी पहले पहुंच जाता है.
सड़क पर अभेद्य सुरक्षा काफिला
चीनी राष्ट्रपति के यात्रा काफिले का ढांचा बेहद सुव्यवस्थित और बहुत बड़ा होता है. काफिले के सबसे आगे पायलट की गाड़ी और उसके पीछे चार मोटरसाइकिल सवार गार्ड्स चलते हैं. इनके ठीक पीछे सुरक्षा बलों और अधिकारियों की 4 से 6 गाड़ियां तैनात रहती हैं. इसके बाद मेन सुरक्षा घेरा शुरू होता है, जिसमें 10 से 12 खास गाड़ियों का आंतरिक काफिला शामिल रहता है. इस आंतरिक काफिले में कई कमांडो बाइक्स पर सवार होकर गाड़ियों के साथ-साथ चलते हैं. इस पूरे घेरे के बाहर सड़क पर जनता और बाहरी लोगों को दूर रखने के लिए एक अलग सुरक्षा कवच तैनात रहता है.
शी जिनपिंग की कार लिमोजिन होंकी एन 501 की खासियत
काफिले के सेंटर में शी जिनपिंग की आधिकारिक बख्तरबंद कार होंकी एन 501 (Hongqi N501) होती है. यह लंबे आकार की काले रंग की एक बेहद सुरक्षित लेबोजिन गाड़ी है. इस चार दरवाजों वाली कार की खिड़कियां और दरवाजे पूरी तरह से बुलेटप्रूफ और बख्तरबंद होते हैं, जो किसी भी बड़े हमले को झेल सकते हैं. इसमें अत्याधुनिक कम्युनिकेशन के साधन और कई ऐसे हाई सिक्योरिटी इंतजाम मौजूद हैं, जिन्हें गोपनीयता बनाए रखने के लिए कभी सार्वजनिक नहीं किया जाता है. यह कार राष्ट्रपति को हर प्रकार के हवाई और जमीनी खतरों से सुरक्षित रखती है.

तो क्या भारत दौरे पर भी साथ आएंगे सुरक्षा कमांडो
शी जिनपिंग के विदेशी दौरे के समय उनके खास कमांडो और बुलेटप्रूफ गाड़ियां उनके साथ ही यात्रा करती हैं. भारत दौरे की स्थिति में भी उनकी होंकी लिमोजिन कारें विशेष कार्गो विमान के जरिए पहले ही नई दिल्ली पहुंचा दी जाएंगी. इसके अलावा सेंट्रल सिक्योरिटी ब्यूरो के विशेष अंगरक्षक उनके साथ साए की तरह तैनात रहेंगे. हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के अनुसार बाहरी सुरक्षा घेरे, सड़क मार्ग के प्रबंधन और ट्रैफिक नियंत्रण की मुख्य जिम्मेदारी मेजबान देश यानी भारतीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के कंधों पर ही रहेगी.
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