उज्बेकिस्तान में कितने हो जाते हैं भारत के 1000 रुपये, यहां क्या खरीद सकते हैं?
पीएम मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती दी है. मजबूत भारतीय रुपये के कारण 1000 रुपये में उज्बेकिस्तानी सोम की अच्छी वैल्यू मिलती है और घूमना-खाना बेहद सस्ता पड़ता है.

- देश बजट-फ्रेंडली; हजारों भारतीय छात्र, पर्यटक वहां रहते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्य एशिया के प्रमुख देश उज्बेकिस्तान की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर ताशकंद पहुंचे हैं, जहां हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने स्वयं उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. यह प्रधानमंत्री मोदी का उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा है. दो देशों की इस कूटनीतिक यात्रा के पहले पड़ाव के बाद वे किर्गिज गणराज्य के लिए रवाना होंगे. इस दौरे ने दोनों देशों के बीच बने गहरे रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है. आइए समझें कि उज्बेकिस्तान में भारत के 1000 रुपये कितने हो जाते हैं और इससे वहां पर क्या-क्या खरीद सकते हैं.
उज्बेकिस्तान में भारतीय रुपये का मूल्य
अगर भारतीय मुद्रा की तुलना उज्बेक सोम से की जाए, तो भारतीय रुपया वहां काफी मजबूत स्थिति में दिखता है. भारत के 1000 रुपये उज्बेकिस्तान में लगभग 1,23,715 से 1,24,000 उज्बेकिस्तानी सोम के बराबर बैठते हैं. इतनी रकम में एक भारतीय पर्यटक वहां स्थानीय बाजारों से रोजमर्रा के खान-पान की चीजें, पारंपरिक परिधान और स्मृति चिन्ह बहुत आसानी से खरीद सकता है. कम खर्च में बेहतर अनुभव के मामले में यह देश बजट ट्रैवलर्स के लिए बेहतरीन माना जाता है.
1,000 रुपये में वहां क्या-क्या खरीद सकते हैं?
उज्बेकिस्तान की प्रसिद्ध समरकंद ब्रेड (Non) 8,000 से 12,000 सोम (लगभग 65 से 100 भारतीय रुपये) में मिल जाती है. स्थानीय बाजारों या स्ट्रीट फूड कैफे में समसा या पकौड़ों जैसा हल्का नाश्ता 20,000 से 35,000 सोम (लगभग 160 से 280 रुपये) में आसानी से उपलब्ध हो जाता है. किसी पारंपरिक चायखाने में एक पॉट ग्रीन टी और पानी की बोतल 5,000 से 10,000 सोम (40 से 80 रुपये) में मिल जाती है. इसके अतिरिक्त ताशकंद के चोर्सू या समरकंद के सियाब बाजार से सूखे मेवे और सूती पारंपरिक टोपी (Doppi) 160 से 240 रुपये के बीच खरीदी जा सकती है.
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सस्ता स्ट्रीट फूड और बजट ट्रांसपोर्ट की सुविधा
उज्बेकिस्तान में यात्रियों के लिए भोजन और यातायात व्यवस्था बेहद किफायती है. महज 200 रुपये के भीतर कोई भी व्यक्ति पेट भरकर अच्छा स्थानीय खाना खा सकता है, जिससे यात्रा का खर्च नियंत्रित रहता है. इसके अलावा ताशकंद जैसे शहरों में टैक्सी और सार्वजनिक परिवहन की दरें बहुत सस्ती हैं. लगभग 300 से 400 भारतीय रुपये खर्च करके पर्यटक पूरे शहर की सैर आसानी से कर सकते हैं, जो उज्बेकिस्तान को एक बजट-फ्रेंडली टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाता है.
उज्बेकिस्तान में भारतीय समुदाय और छात्र
उज्बेकिस्तान में भारतीयों की एक बड़ी आबादी निवास करती है. ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास के आंकड़ों के अनुसार, इस समय उज्बेकिस्तान में लगभग 20 हजार भारतीय नागरिक रह रहे हैं. इनमें से करीब 16,000 भारतीय छात्र ताशकंद, समरकंद और बुखारा जैसे ऐतिहासिक शहरों के प्रसिद्ध सरकारी मेडिकल विश्वविद्यालयों में डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी कर रहे हैं. शिक्षा के अलावा पर्यटन के लिहाज से भी यह देश भारतीयों का पसंदीदा स्थान बन रहा है, जहां साल 2024 के दौरान लगभग 72 हजार भारतीय पर्यटक घूमने पहुंचे थे.
उज्बेक करंसी सोम का इतिहास
उज्बेकिस्तान की राष्ट्रीय मुद्रा का नाम सोम है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UZS कोड से दर्शाया जाता है. देश में मुद्रा के नियमन और संचालन की पूरी जिम्मेदारी सेंट्रल बैंक ऑफ रिपब्लिक ऑफ उज्बेकिस्तान निभाता है. ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो 'सोम' शब्द की उत्पत्ति प्राचीन तुर्किक भाषाओं से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ शुद्ध होता है. पुराने समय में इस शब्द का सीधा संबंध शुद्ध सोने के सिक्कों से जोड़ा जाता था, जो आज भी वहां के आर्थिक स्वाभिमान का प्रतीक है.

रूसी रूबल से सोम तक का सफर
वर्ष 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद उज्बेकिस्तान एक स्वतंत्र राष्ट्र बना, लेकिन शुरुआती कुछ सालों तक वहां रूसी रूबल का ही इस्तेमाल होता रहा. इसके बाद वर्ष 1994 में सरकार ने आधिकारिक तौर पर अपनी नई मुद्रा सूम (सोम) को लॉन्च किया. वहां के कागजी नोटों पर समरकंद, बुखारा, खिवा, कोकंद, ताशकंद और फरगना घाटी जैसी प्राचीन सिल्क रोड की ऐतिहासिक विरासतों की तस्वीरें अंकित हैं. इसके अलावा कुछ पुराने नोटों पर मध्य एशियाई इतिहास के महान शासक अमीर तैमूर की प्रतिमा भी छापी गई है.
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