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Bihar Assembly Elections: फलोदी सट्टा बाजार में कैसे तय होते हैं रेट, जानें नीतीश, तेजस्वी से लेकर BJP-RJD तक के भाव?

Bihar Assembly Elections: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर मशहूर फलोदी सट्टा बाजार ने एक बार फिर भविष्यवाणी कर दी है. आइए जानते हैं कि सट्टा बाजार के अनुसार कौन चल रहा है आगे.

Bihar Assembly Elections: बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजस्थान का फलोदी सट्टा बाजार एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन चुका है. अपनी सटीक भविष्यवाणी के लिए मशहूर फलोदी सट्टा बाजार ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर फिर से भविष्यवाणी की है. आइए जानते हैं क्या है इस बाजार की भविष्यवाणी.

फलोदी सट्टा बाजार की भविष्यवाणी 

फलोदी सट्टा बाजार के मुताबिक एनडीए बिहार में अगली सरकार बनाने की दौड़ में सबसे आगे चल रहा है. बाजार के मुताबिक एनडीए की तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में नीतीश कुमार का पूरा समर्थन हो रहा है. सट्टेबाज एनडीए की जीत पर हर 1000 के दांव पर 2000 का रिटर्न दे रहे हैं. फलोदी सट्टा बाजार के मुताबिक एनडीए को 128 से 132 सीटें मिलने का अनुमान है, इसी के साथ महागठबंधन को 97 से 100 सीटें मिल सकती हैं. 

सट्टा बाजार में नीतीश कुमार का व्यक्तिगत भाव 40 से 45 पैसे के बीच है. इसी बीच कांग्रेस समर्थित महागठबंधन के भावों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. सट्टेबाजों का अनुमान है कि यह 93 से 96 सीट के बीच रहेगा. इसी बीच आपको बता दें कि जैसे-जैसे चुनाव प्रचार तेज होगा आने वाले दिनों में सीटों के हिसाब से भाव खुलने लगेंगे. 

फलोदी बाजार में भाव कैसे तय होते हैं 

फलोदी सट्टा बाजार में भाव निर्धारण की प्रक्रिया कई चीजों पर निर्धारित होती है. इसमें सबसे पहला और प्रभावशाली कारक होता है जनता की भावना. फलोदी बाजार मतदाताओं के मूड पर फलता फूलता है. यह सब सोशल मीडिया पर बातचीत, स्थानीय रैलियां और राजनीतिक बहसों पर निर्भर होता है. जिस भी पार्टी या फिर उम्मीदवार को जनता का जितना ज्यादा समर्थन मिलता है उसके भाव उतने ही ज्यादा मजबूत होते रहते हैं.

इसी के साथ फलोदी के दांव राजनैतिक घटनाक्रमों के प्रति भी काफी ज्यादा संवेदनशील होते हैं. घोषणापत्र जारी होने से लेकर गठबंधन की घोषणा और भाषणों और रैलियों तक कोई भी बड़ी घोषणा या विवाद रातों रात दांव में उतार चढ़ाव ला सकता है. इसी के साथ फलोदी सट्टा बाजार पिछले चुनावी आंकड़ों और मतदाता व्यवहार का भी अध्ययन करता है. सट्टेबाज शुरुआती दांव लगाने से पहले पुराने नतीजों, वोट शेयर, मतदान के पैटर्न और जनसांख्यिकीय रुझानों को समझते हैं.

इसी के साथ दांव पर लगाई जाने वाली धनराशि की मात्रा भी बड़ी भूमिका निभाती है. अगर काफी ज्यादा संख्या में लोग किसी एक पार्टी पर दांव लगाना शुरू कर देते हैं तो सट्टेबाज जोखिम को संतुलित करने के लिए दरों को समायोजित कर सकते हैं. वैसे तो यह सट्टा बाजार अपनी सटीकता के लिए ध्यान आकर्षित करता है लेकिन भारतीय कानून के तहत यह अवैध है.

ये भी पढ़ें: बनारस और पंजाब में कुत्ता पालने को लेकर क्या है नियम, जानें किन नस्लों पर लगा है प्रतिबंध

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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