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ज्यादा परमाणु हथियार नहीं हैं युद्ध में जीत की चाबी, इन चीजों से पलटती है बाजी

What Things Can Change The War: जब भी देश युद्ध की परिस्थिति में होते हैं तो उनको लड़ने के लिए सिर्फ हथियारों की जरूरत नहीं होती है, बल्कि और भी कई चीजें होती हैं जो कि बाजी पलटने में मदद करती हैं.

इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को छह दिन का समय बीत गया है. यह लड़ाई कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है. अब इस युद्ध में अमेरिका के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है. खबर है कि चीन और रूस भी इस लड़ाई में शामिल हो सकते हैं, लेकिन अभी इस बात की कोई पुख्ता खबर नहीं है. ऐसे में यह भी बातें हो रही हैं कि क्या अगर अमेरिका इस लड़ाई में शामिल हुआ तो परमाणु युद्ध भी हो सकता है. क्योंकि अमेरिका के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं. लेकिन किसी भी युद्ध में ज्यादा परमाणु हथियार जीत की चाबी नहीं होते हैं. बल्कि कुछ और चीजें होती हैं, जिनसे कि युद्ध पलटा जा सकता है. 

रणनीति

युद्ध कभी भी किसी के लिए भी पॉजिटिव नहीं रहा है. इसलिए अगर कोई युद्ध क्षेत्र में सिर्फ यह समझकर उतर रहा है कि उसके पास भरी पूरी फौज और खूब सारे सैन्य हथियार हैं और वो युद्ध जीत लेगा तो यह सोच सरासर गलत है. बिना किसी रणनीति के सिर्फ हथियारों के दम पर युद्ध नहीं लड़ा जा सकता है. रणनीति के तहत घेराबंदी करना, घात लगाकर हमले करना, युद्ध क्षेत्र को अपने ढंग से इस्तेमाल करना और तरीके से पलटवार करना शामिल है. 

टेक्निकली मजबूत

आज के दौर में कोई भी युद्ध सिर्फ सेना और हथियार नहीं बल्कि तकनीकी रूप से मजबूत होकर भी लड़ा जाता है और उसी को जीत मिलती है जो कि सारे कौशल जानता है. युद्ध के मैदान में सारे हथियार लेटेस्ट तकनीक से लैस होने जरूरी हैं. ड्रोन, मिसाइल की क्षमता, साइबर युद्ध क्षमताएं दुश्मन देश को बहुत नुकसान पहुंचा सकती हैं.

बाहरी समर्थन

किसी पक्ष को अगर युद्ध के दौरान बाहरी तौर पर समर्थन मिलता है तो यह बाजी पलटकर रख सकता है और उसे युद्ध में बड़ा फायदा होता है. अगर इजराइल और ईरान के युद्ध को देखें तो इजराइल को अमेरिका का समर्थन मिल रहा है. अगर सच में अमेरिका इस लड़ाई में कूदा तो इजराइल को फायदा हो सकता है. 

मनोबल

किसी भी युद्ध में आप कितने भी हथियार रख लें या कितनी भी रणनीति बना लें, अगर उस देश की सेना का मनोबल मजबूत नहीं है तो वह कोई भी मुकाबला जीत नहीं सकती है. इसीलिए मनोबल सबसे जरूरी चीज है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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