भारत का वो 'मौत का द्वीप' जहां भारतीयों की भी नो एंट्री, जानें सरकार ने क्यों लगा रखा है बैन?
अंडमान का नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड भारत की वह प्रतिबंधित जगह है, जहां भारतीयों का जाना मना है. यहां रहने वाली सेंटिनली जनजाति बाहरी दुनिया से नफरत करती है और संपर्क करने वालों पर जानलेवा हमला कर देती है.

भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक ऐसा हिस्सा है जो कागजों पर तो भारत का है, लेकिन वहां का कानून और दुनिया बिल्कुल अलग है. हम बात कर रहे हैं 'नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड' की, जिसे दुनिया के सबसे खतरनाक और रहस्यमयी द्वीपों में गिना जाता है. इस द्वीप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां रहने वाली जनजाति ने हजारों सालों से बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं रखा है. भारत सरकार ने यहां आम नागरिकों के जाने पर सख्त पाबंदी लगा रखी है, क्योंकि यहां कदम रखने का मतलब सीधे मौत को दावत देना है.
सदियों से कटी हुई एक अलग दुनिया
नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड पर रहने वाले लोग जिन्हें 'सेंटिनली' कहा जाता है, संभवतः दुनिया की आखिरी ऐसी जनजाति है जो पाषाण युग (Stone Age) की तरह जीवन जी रही है. ये लोग आज भी तन ढंकने के लिए कपड़ों का इस्तेमाल नहीं करते और पूरी तरह से शिकार और समुद्र से मिलने वाली मछलियों पर निर्भर हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि ये लोग करीब 60,000 सालों से इस टापू पर रह रहे हैं. इन्होंने खेती करना तक नहीं सीखा है और आग जलाने के रहस्यों के बारे में भी इनकी जानकारी सीमित मानी जाती है.
बाहरी दुनिया के प्रति बेहद आक्रामक व्यवहार
इस द्वीप पर बैन लगाने की सबसे बड़ी वजह यहां के निवासियों का हिंसक व्यवहार है. सेंटिनली लोग किसी भी बाहरी व्यक्ति को अपने करीब नहीं आने देते हैं. जब भी कोई नाव या हेलिकॉप्टर इस द्वीप के पास पहुंचता है, तो वहां के लोग तीरों और पत्थरों से हमला कर देते हैं. साल 2006 में दो भारतीय मछुआरे गलती से इस द्वीप के पास चले गए थे, जिन्हें इन आदिवासियों ने मार डाला था. यहां तक कि उनके शवों को वापस लाने गई पुलिस और सेना को भी भारी विरोध का सामना करना पड़ा था.
सरकार ने क्यों लगाई है कानूनी पाबंदी?
भारत सरकार ने 'अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (आदिम जनजातियों का संरक्षण) विनियमन, 1956' के तहत इस द्वीप के 5 समुद्री मील के दायरे में जाने पर पूरी तरह रोक लगा रखी है. इस पाबंदी के पीछे दो मुख्य कारण हैं. पहला, वहां के लोगों का हिंसक होना जिससे जान का खतरा है. दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि सेंटिनली लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बाहरी दुनिया के मुकाबले बहुत कम है. हमारे लिए एक मामूली जुकाम या फ्लू भी उस पूरी जनजाति का सफाया कर सकता है.
आपदाओं के बीच जीवित रहने का अनसुलझा रहस्य
नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि ये लोग बिना किसी आधुनिक तकनीक के भीषण प्राकृतिक आपदाओं का सामना कैसे करते हैं. साल 2004 में जब भीषण सुनामी आई थी, तब भारत सरकार ने मदद के लिए हेलिकॉप्टर भेजे थे. तब यह देखकर हैरानी हुई कि ये लोग न सिर्फ सुरक्षित थे, बल्कि उन्होंने मदद लेने के बजाय हेलिकॉप्टर पर तीर चलाकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. घने जंगलों के बीच रहने वाले ये लोग आज भी विज्ञान और समाज के लिए एक अनसुलझी पहेली बने हुए हैं.
सुरक्षा घेरा और भारतीय नौसेना की निगरानी
इस द्वीप की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल लगातार इस इलाके की गश्त करते हैं. किसी भी पर्यटक या शोधकर्ता को वहां जाने की अनुमति नहीं दी जाती है. सरकार की नीति हस्तक्षेप न करने की है. इसका मतलब है कि हम उन पर नजर तो रखेंगे, लेकिन उनके जीवन और संस्कृति में कोई दखल नहीं देंगे. यह भारत की इकलौती ऐसी जगह है जहां संप्रभुता भारत की है, लेकिन शासन वहां के आदिवासियों का चलता है.
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Source: IOCL




























