पाकिस्तान से लेकर बांग्लादेश तक में हो चुका तख्तापलट, इस देश में तो अमेरिका पर लगा था बगावत कराने का आरोप
Nepal Protest: पाकिस्तान से बांग्लादेश तक कई देशों ने तख्तापलट के दंश झेले हैं अब इसमें नेपाल भी शामिल हो चुका है. चलिए जानते हैं उस घटना के बारे में.

दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां जनता के आक्रोश ने सरकार को उखाड़ फेंका है. पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश समेत कई ऐसे देश हैं जो तख्तापलट का दंश झेल चुके हैं और अब इसमें नेपाल का नाम भी शामिल हो चुका है. चलिए जानते हैं उस घटना के बारे में और उसके पीछे कारणों के बारे में.
नेपाल में तख्तापलट
सबसे पहले नेपाल की बात करते हैं जहां 4 सितंबर को सोशल मीडिया पर बैन लगाया गया. सोशल मीडिया पर बैन के खिलाफ लाखों युवा सड़कों पर उतरे और जमकर प्रदर्शन किया. सोशल मीडिया पर बैन हटाने की मांग से शुरू हुआ युवाओं का प्रदर्शन ओली सरकार की कुर्सी तक जा पहुंचा. हालांकि सोशल मीडिया से बैन हटा लिया गया है, लेकिन युवाओं के भारी बवाल के बीच ओली को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और नेपाल में तख्तापलट हो गया.
पाकिस्तान में चार बार तख्तापलट
पाकिस्तान में 1947 से ही सेना का हस्तक्षेप सत्ता में रहा है. पाकिस्तान ने एक दो नहीं बल्कि चार बार तख्तापलट का दंश झेला है. पहला तख्तापलट 1953-54 में हुआ. इसके बाद 1958 में सत्ता बदली जब पाकिस्तानी राष्ट्रपति मेजर जनरल इस्कंदर अली मिर्जा ने पाकिस्तान की संविधान सभा और तत्कालीन फिरोज खान नून की सरकार को बर्खास्त किया था. फिर आया 1977 का दौर. तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगे. चुनावों में धांधली के विवाद के बीच सेना प्रमुख जिया उल हक ने तख्तापलट किया. 1999 में फिर वही कहानी दोहराई गई जब सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट कर नवाज शरीफ को सत्ता से बेदखल किया था.
यहां लगा अमेरिका पर आरोप
भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश भी 2024 में इसी तरह की आग में जल उठा था. शेख हसीना की सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और दमन के आरोप थे. जुलाई 2024 में सरकारी नौकरियों में 30% कोटा प्रणाली के खिलाफ छात्र आंदोलन शुरू हुआ. जल्दी ही यह आंदोलन व्यापक हो गया. सड़कों पर उतरे लाखों युवाओं ने शेख हसीना के खिलाफ नारे लगाए और देखते ही देखते बांग्लादेश में तख्तापलट की घटना घटी. बता दें कि बांग्लादेश में तख्तापलट की घटना से अमेरिका पर आरोप लगा था. शेख हसीना के बेटे ने तख्तापलट के लिए अमेरिका पर शक जताया था.
श्रीलंका की घटना
इसके अलावा साल 2022 में श्रीलंका में भी तख्तापलट की घटन देखी गई. श्रीलंका की अर्थव्यवस्था चरम संकट में थी. ईंधन, दवा, भोजन की भारी किल्लत थी. श्रीलंका ऋणों के बोझ तले दबा था लोगों का मानना था कि राजपक्षे परिवार की भ्रष्ट शासन ने जनता को तंग कर दिया. भारी संख्या में परेशान जनता सड़क पर उतरी. राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और संसद के बाहर डेरा डाला 'गोटा गो गोटा' यानी राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे सत्ता छोड़ो के नारे लगे. जुलाई 2022 तक आंदोलन इतना उफान मार गया कि गोटाबाया को देश छोड़कर भागना पड़ा.
अफगानिस्तान भी झेल चुका है तख्तापलट का दंश
अफगानिस्तान में भी तख्तापलट की घटना घट चुकी है. अगस्त 2021 में अमेरिका की सेना हटने के बाद अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा हो गया. तालिबान ने 2021 में अफगानिस्तान की गनी सरकार का तख्तापलट किया था, जिसके बाद से यहां तालिबानी शासन है.
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Source: IOCL























