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बिहार विधान परिषद के MLC बनने के बाद पावर स्टार पवन सिंह को कितनी मिलेगी सैलरी, MLA से कम या ज्यादा?

बिहार के पावर स्टार पवन सिंह अब आधिकारिक तौर पर राजनीति में उतरने जा रहे हैं और उनको आज शपथ दिलाई जाएगी. चलिए जानें कि उनकी सैलरी एमएलसी से कम होगी या ज्यादा होगी.

भोजपुरी सिनेमा के पर्दे पर अपनी गायकी और अदाकारी से पावर स्टार कहलाने वाले पवन सिंह अब बिहार राजनीति के सबसे बड़े मंचों में से एक बिहार विधान परिषद के सदस्य बनने वाले हैं. आज शाम को उनको पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी. इस नई पारी की शुरुआत के साथ-साथ उनके फैंस और आम जनता के मन में यह उत्सुकता बढ़ गई है कि आखिर इस पद पर आने के बाद पवन सिंह को सरकार की तरफ से कितनी सैलरी मिलेगी. चलिए इसका लेखा-जोखा जानते हैं.

मूल वेतन और भत्तों का हिसाब

बिहार विधान परिषद के सदस्य के तौर पर पवन सिंह की हर महीने की कुल कमाई करीब 1.60 लाख से 1.70 लाख रुपये के बीच होगी. इस राशि में उनकी बेसिक सैलरी लगभग 40,000 से 50,000 रुपये प्रति महीने होती है. इसके अलावा उनको अपने क्षेत्र के लोगों से मिलने-जुलने और वहां पर काम संभालने के लिए 50,000 रुपये क्षेत्रीय भत्ते के रूप में मिलता है. कार्यालय का कामकाज देखने और स्टेशनरी के लिए 10,000 से 25,000 रुपये तक की रकम दी जाती है. साथ ही अपना एक निजी पीए रखने के लिए भी सरकार की तरफ से 30,000 रुपये प्रति माह का भत्ता अलग से मिलता है.

गाड़ी से लेकर हवाई सफर तक की सुविधाएं

सैलरी के अलावा एक एमएलसी को कई ऐसी सुविधाएं मिलती हैं जो किसी भी वीआईपी से कम नहीं होती हैं. उनको राजधानी पटना में रहने के लिए एक शानदार सरकारी आवास, उनके पूरे परिवार के लिए मुफ्त मेडिकल व्यवस्था होगी. साथ ही नई गाड़ी खरीदने के लिए सरकार की ओर से 10 से 15 लाख रुपये तक का बेहद आसान लोन भी मिलता है. देशभर में राजनीतिक दौरों के लिए सरकार हर साल 3 से 4 लाख तक मुफ्त रेलवे और और हवाई यात्रा के टिकट भी देती है.

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पवन सिंह को MLA से ज्यादा कम कितनी मिलेगी सैलरी?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि जनता द्वारा सीधे चुने गए विधायक और विधान परिषद के रास्ते आए विधान पार्षद यानि MLC की सैलरी में कोई फर्क होता है कि नहीं. इसका सीधा सा जवाब है- नहीं. बिहार विधानमंडल के तय नियमों के अनुसार, दोनों ही पदों को बिल्कुल एक समान दर्जा दिया गया है. पवन सिंह को मिलने वाला मूल वेतन, भत्ते और बाकी तमाम वीआईपी सुविधाएं वैसी ही होंगी जैसी बिहार विधानसभा के किसी भी अन्य विधायक को मिलती हैं. यहां सैलरी और सरकारी फायदों के मामले में पदों के बीच कोई अंतर नहीं होता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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