देश के किस राज्य में मिनिमम वेज सबसे ज्यादा और कहां सबसे कम? जानें हर एक डिटेल
भारत में राज्यों के बीच न्यूनतम वेतन की दरें काफी अलग हैं, जिससे मजदूरों में असंतोष की स्थिति पैदा हो रही है. आइए जानें कि किस राज्य में मजदूरों को सबसे ज्यादा तो वहीं किस राज्य में कम है मजदूरी.

- बिहार में अभी भी सबसे कम पारिश्रमिक, पलायन जारी.
देश के औद्योगिक पहिये को घुमाने वाले मजदूरों के पसीने की कीमत हर राज्य में अलग-अलग है. कहीं उन्हें अपनी मेहनत का वाजिब हक मिल रहा है, तो कहीं न्यूनतम जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. हाल ही में नोएडा में हुए भारी बवाल ने इस वेतन असमानता को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है. हरियाणा में हुई 35 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी ने पड़ोसी राज्यों के श्रमिकों के बीच असंतोष की आग भड़का दी है, जिसके बाद कई राज्य सरकारों को अपने वेतन ढांचे में तत्काल बदलाव करने पड़े हैं.
नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग पर भारी बवाल
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) में सोमवार को उस समय हालात बिगड़ गए जब हजारों की संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतर आए. इस हिंसक प्रदर्शन की मुख्य जड़ पड़ोसी राज्य हरियाणा द्वारा अपने श्रमिकों के वेतन में की गई 35 प्रतिशत की भारी वृद्धि थी. यूपी के मजदूरों को लगा कि एक ही तरह के काम के लिए उन्हें हरियाणा के मुकाबले बहुत कम पैसे मिल रहे हैं. इस आर्थिक असमानता ने श्रमिकों के सब्र का बांध तोड़ दिया. प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए और मजदूरों की नाराजगी कम करने के लिए तत्काल प्रभाव से अंतरिम वेतन वृद्धि का निर्णय लिया.
उत्तर प्रदेश सरकार का डैमेज कंट्रोल और नई दरें
प्रदर्शन के बाद यूपी सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने वाली नई वेतन दरों की घोषणा की है, जिसमें लगभग 21 प्रतिशत तक का इजाफा किया गया है. नोएडा और गाजियाबाद जैसे हाई-टेक शहरों में अब अकुशल मजदूरों को 13,690 रुपये प्रति माह मिलेंगे. अर्ध-कुशल श्रेणी के लिए यह राशि 15,059 रुपये और कुशल कर्मियों के लिए 16,868 रुपये तय की गई है. अन्य नगर निगमों और बाकी यूपी के जिलों के लिए यह दरें थोड़ी कम रखी गई हैं, जहां अकुशल मजदूर को 12,356 रुपये से लेकर 13,006 रुपये के बीच वेतन मिलेगा.
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हरियाणा बना मजदूरों के लिए सबसे पसंदीदा राज्य
मजदूरी के मामले में हरियाणा फिलहाल देश के अग्रणी राज्यों में खड़ा है. 10 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, हरियाणा सरकार ने वेतन में 35 प्रतिशत की ऐतिहासिक बढ़ोतरी की. यहां अब एक अकुशल मजदूर को कम से कम 15,220 रुपये प्रति माह मिल रहे हैं. वहीं, कुशल श्रमिकों के लिए यह आंकड़ा 18,000 रुपये और उच्च-कुशल कर्मियों के लिए 19,000 रुपये तक पहुंच गया है. दैनिक वेतन की बात करें तो हरियाणा में मजदूरों को 585 रुपये से लेकर 747 रुपये प्रतिदिन तक मिल रहे हैं, जो पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी अधिक है.
मध्य प्रदेश और गुजरात में भी हुआ बदलाव
मध्य प्रदेश सरकार ने भी 1 अप्रैल 2026 से नया नोटिफिकेशन लागू किया है. यहां सभी श्रेणियों के लिए वेरिएबल डियरनेस अलाउंस (VDA) को 2,850 रुपये प्रति माह तय किया गया. मध्य प्रदेश में अकुशल मजदूर को अब 12,425 रुपये प्रति माह (478 रुपये प्रतिदिन) मिल रहे हैं, जबकि उच्च-कुशल वर्ग के लिए यह राशि 16,769 रुपये है. वहीं गुजरात में दो जोनों के आधार पर वेतन तय है. गुजरात के जोन-1 में कुशल श्रमिकों का मासिक वेतन लगभग 13,897 रुपये है. गुजरात सरकार ने भी प्रतिदिन के हिसाब से महंगाई भत्ते में 60.50 रुपये की वृद्धि की है.
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश का वेतन ढांचा
तेलंगाना में वेतन का निर्धारण कौशल और जोन के आधार पर बहुत बारीकी से किया गया है. यहां मैनेजर और कंप्यूटर प्रोग्रामर जैसे उच्च पदों के लिए न्यूनतम वेतन करीब 14,965 रुपये है. अकुशल श्रमिकों जैसे वॉचमैन या हेल्पर को जोन के हिसाब से 12,778 रुपये से 13,108 रुपये के बीच भुगतान किया जाता है. आंध्र प्रदेश में भी यही व्यवस्था लागू है, जहां जोन-1 में उच्च पदों के लिए 14,504 रुपये तय हैं, जबकि अकुशल मजदूरों के लिए 12,647 रुपये निर्धारित किए गए हैं. दक्षिण के इन राज्यों में जोन प्रणाली वेतन अंतर को संतुलित करने का काम करती है.
बिहार में अब भी सबसे कम पारिश्रमिक की चुनौती
उत्तर भारत के अन्य राज्यों के मुकाबले बिहार में मजदूरी की दरें अब भी काफी कम बनी हुई हैं. आंकड़ों के अनुसार, बिहार में एक कुशल श्रमिक का वेतन 11,336 रुपये के आसपास शुरू होता है. हालांकि उच्च-कुशल श्रेणी के लिए यह 17,472 रुपये तक जाता है, लेकिन अकुशल और अर्ध-कुशल श्रेणी के मजदूरों के लिए यह राज्य हरियाणा या दिल्ली के मुकाबले काफी पीछे है. यही कारण है कि बिहार से मजदूरों का पलायन दूसरे समृद्ध राज्यों की ओर लगातार बना रहता है.
केंद्र सरकार की 'फ्लोर वेज' नीति और सुरक्षा
मजदूरी को लेकर देश में 'कोड ऑन वेजेज 2019' एक महत्वपूर्ण कानून है. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर 'नेशनल फ्लोर लेवल मिनिमम वेज' 178 रुपये प्रतिदिन तय की है, जिससे कम मजदूरी कोई भी राज्य नहीं दे सकता है. हालांकि, केंद्र सरकार के अपने उपक्रमों जैसे रेलवे और माइनिंग में मजदूरी की दरें काफी ऊंची हैं. 2026 में केंद्रीय ठेकों में अकुशल मजदूरों को लगभग 783 रुपये प्रतिदिन और उच्च-कुशल को 1035 रुपये प्रतिदिन तक मिल रहे हैं. यह मासिक रूप से 20,000 से 27,000 रुपये के बीच बैठता है, जो किसी भी राज्य सरकार की तुलना में सबसे बेहतर है.
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Source: IOCL

























