पाकिस्तान में जेल में बंद कैदी का कौन कराता है इलाज, सरकार या घरवाले?
इमरान खान के जेल में मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें जेल से बाहर अस्पताल ले जाने की व्यवस्था बनी. चलिए जानें कि पाकिस्तान में कैदियों का इलाज कौन कराता है?

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख इमरान खान की बिगड़ती सेहत और उनके अस्पताल में तबादले के अदालती आदेश ने जेल में कैदियों की देखरेख का मुद्दा चर्चा में ला दिया है. परिवार और वकीलों द्वारा इमरान खान की दाईं आंख की रोशनी घटने और गिरते स्वास्थ्य को लेकर बार-बार चिंता जताई गई थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जेल से अस्पताल ले जाने के निर्देश दिए. इस घटनाक्रम के बीच यह सवाल खड़ा होता है कि पाकिस्तान में बंद कैदियों के इलाज का खर्च सरकार उठाती है या फिर उनका परिवार?
जेल में इलाज की प्राथमिक जिम्मेदारी किसकी?
पाकिस्तान के संविधान और वहां के प्रीजन रूल्स के अनुसार, जेल में बंद किसी भी कैदी की सेहत की रक्षा करने की मुख्य जिम्मेदारी सरकार और संबंधित जेल प्रशासन की होती है. हिरासत में मौजूद व्यक्ति को उचित चिकित्सीय सहायता पाना उसका मौलिक और कानूनी अधिकार माना गया है. चाहे सामान्य अपराध का आरोपी हो या कोई हाई-प्रोफाइल कैदी, प्राथमिक स्वास्थ्य सुरक्षा का पूरा कानूनी दायित्व राज्य का ही होता है.
जेल परिसर के भीतर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाएं
पाकिस्तान की प्रत्येक जेल के अंदर एक डिस्पेंसरी या छोटा अस्पताल संचालित होता है. यहां फुल-टाइम सरकारी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती रहती है. सामान्य बीमारियों, रूटीन चेक-अप और प्राथमिक उपचार की पूरी व्यवस्था जेल परिसर के भीतर ही सरकार द्वारा की जाती है. इन डिस्पेंसरियों में आवश्यक दवाइयां और प्राथमिक चिकित्सा उपकरण सरकार के बजट से ही उपलब्ध कराए जाते हैं.
यह भी पढ़ें: क्या काम करते हैं हाजी मस्तान के बच्चे, क्या वे भी हैं क्रिमिनल?

जब गंभीर बीमारी में कैदी को बाहर भेजने की पड़े जरूरत
यदि किसी कैदी की बीमारी गंभीर रूप ले लेती है या उसका इलाज जेल अस्पताल में संभव नहीं होता, तो जेल प्रशासन उसे किसी बड़े नजदीकी सरकारी या टीचिंग अस्पताल (जैसे PIMS) में स्थानांतरित करता है. इसके लिए जेल के डॉक्टरों का एक मेडिकल बोर्ड गठित किया जाता है. यह बोर्ड ही स्थिति का आकलन कर सिफारिश करता है कि मरीज को बाहर शिफ्ट किया जाए या नहीं. इस दौरान परिवहन, सुरक्षा और इलाज का संपूर्ण खर्च जेल प्रशासन यानी सरकार उठाती है.
कैदी के इलाज में परिवार की कानूनी सीमाएं
पाकिस्तान के कानूनों के अनुसार, कैदी के परिजन अपनी मर्जी से किसी निजी अस्पताल या व्यक्तिगत डॉक्टर से जेल में बंद व्यक्ति का इलाज नहीं करा सकते
हैं. परिवार को सीधे तौर पर निजी डॉक्टर नियुक्त करने का अधिकार नहीं होता
है. हालांकि, विशेष परिस्थितियों में परिजन या वकील अदालत (हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट) में याचिका दायर कर निजी डॉक्टरों की सलाह या निजी अस्पताल में भर्ती कराने की अनुमति मांग सकते हैं.
अदालती हस्तक्षेप और मेडिकल बोर्ड का गठन
अदालत जब परिवार की मांग पर संज्ञान लेती है, तो वह निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र सरकारी मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश दे सकती है. कई बार अदालत के आदेश पर परिजनों द्वारा सुझाए गए विशेषज्ञ डॉक्टरों को इस बोर्ड में शामिल होने की इजाजत मिल जाती है. इसके बावजूद, प्रशासनिक, सुरक्षात्मक और कानूनी नियंत्रण पूरी तरह से जेल प्रशासन के हाथ में ही रहता है.

अगस्त 2023 से सलाखों के पीछे हैं इमरान खान
73 वर्षीय इमरान खान को अगस्त 2023 में पहली बार तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा सुनाए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद उन पर सिफर कांड, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह से जुड़े कई मुकदमे दर्ज किए गए. हालांकि, सिफर और इद्दत मामलों में उन्हें अदालतों से राहत मिल चुकी है और तोशाखाना की एक सजा पर भी रोक लगाई जा चुकी है, लेकिन अन्य लंबित मुकदमों के कारण वे अब भी जेल में ही बंद हैं.
यह भी पढ़ें: Hindu Cerematorium In Pakistan: लाहौर में कैसे होता है हिंदुओं का दाह संस्कार, क्या वहां इसकी नहीं है इजाजत?























