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CEC Removal Rules: क्या चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है, इसके लिए क्या हैं नियम?

Chief Election Commissioner Removal Rules: ममता बनर्जी ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं. आइए जानते हैं कि क्या भारत में किसी चीफ इलेक्शन कमिश्नर को पद से हटाया जा सकता है.

Chief Election Commissioner Removal Rules: ममता बनर्जी के चीफ इलेक्शन कमिश्नर पर तीखा हमला करने और उनके बर्ताव और निष्पक्षता पर सवाल उठाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो चुका है. उनके बयानों ने एक बार फिर से एक जरूरी संवैधानिक सवाल को खड़ा कर दिया है कि क्या भारत में किसी चीफ इलेक्शन कमिश्नर को पद से हटाया जा सकता है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच तनाव 

दरअसल बीते कुछ समय में विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच तनाव काफी ज्यादा बढ़ चुका है. यह सब स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर शुरू हुआ है. कुछ समय पहले ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बाकी विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाया था. उनका दावा था कि मतदाता सूची से लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और फर्जी नामों को जोड़ा जा रहा है. इसी के साथ विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने भी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार किया था. 

वहीं हाल ही में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ बैठक के बीच से वर्कआउट कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया और वह भाजपा की भाषा बोल रहे हैं. 

इलेक्शन कमिश्नर संवैधानिक रूप से सुरक्षित क्यों हैं

भारत की चुनाव मशीनरी की देखरेख इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया करता है. यह एक ऐसा निकाय है जिसे मौजूदा सरकार से आजाद होकर काम करने के लिए बनाया गया है. इस आजादी की रक्षा के लिए संविधान इसके सदस्यों खासकर चीफ इलेक्शन कमिश्नर को काफी मजबूत सुरक्षा देता है. ऐसा इसलिए ताकि उन्हें राजनीतिक वजहों या फिर अस्थायी विवादों के लिए हटाए ना जा सके.

चीफ इलेक्शन कमिश्नर को कैसे हटाया जा सकता है 

चीफ इलेक्शन कमिश्नर को हटाना काफी मुश्किल है. संविधान के अनुच्छेद 324 (5) के तहत, चीफ इलेक्शन कमिश्नर को सुप्रीम कोर्ट के जज जैसी ही सुरक्षा मिलती है. चीफ इलेक्शन कमिश्नर को सिर्फ दो आधारों पर ही हटाया जा सकता है. पहला साबित दुर्व्यवहार और दूसरा अक्षमता.

हटाने की प्रक्रिया महाभियोग जैसी ही है और इसमें सांसद कई चरणों में शामिल होती है. लोकसभा और राज्यसभा दोनों में एक प्रस्ताव पेश किया जाता है और इसे विशेष बहुमत से पास किया जाता है. सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और कम से कम दो तिहाई सदस्य मौजूद होने चाहिए और वोट करने चाहिए. दोनों सदनों द्वारा प्रस्ताव पास करने के बाद ही राष्ट्रपति चीफ इलेक्शन कमिश्नर को पद से हटा सकते हैं.

इलेक्शन कमिश्नर को हटाने के नियम 

बाकी इलेक्शन कमिश्नर के लिए नियम थोड़े अलग हैं. इलेक्शन कमिश्नर को सीधे महाभियोग जैसी सुरक्षा नहीं मिलती. इलेक्शन कमिश्नर को राष्ट्रपति तभी हटा सकते हैं जब चीफ इलेक्शन कमिश्नर उनके हटने की सिफारिश करें.

ये भी पढ़ें:  एशिया से लेकर यूरोप तक, जानें कैसे बने थे कॉन्टिनेंट्स?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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