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दोनों लाल किले बनने से पहले कहां रहते थे मुगल, कैसे गुजारते थे अपनी जिंदगी?

आगरा का लाल किला और दिल्ली का लाल किला दोनों ही मुगल काल की समृद्धि, शक्ति और स्थापत्य कला का प्रतीक है. आइये जानते हैं कि दोनों लाल किले बनने से पहले मुगल कहां रहते थे और जिंदगी कैसे गुजारते थे?

भारत में मुगलों ने करीब 300 सालों तक शासन किया. इसके बाद अंग्रेजों ने करीब 200 साल तक भारत पर अपनी हुकूमत चलाई. मुगलों के शासनकाल के दौरान भारत के कई हिस्सों में एक से एक किले बने जो आज देश की शान में चार चांद लगा देते हैं. आज हम बात करेंगे दिल्ली के लाल किले और आगरा के लाल किले के बारे में. दोनों किले बनने से पहले मुगल शासक आखिर रहते कहां थे चलिए इन्हीं सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं.

आगरा का लाल किला

सबसे पहले बात करते हैं आगरा की. उत्तर प्रदेश का आगरा मुगलों के प्रमुख शहरों में से एक था. यह 1638 तक मुगल सम्राटों का मुख्य स्थान रहा था. मुगलों द्वारा बनवाए गए प्रमुख इमारतों में से एक आगरा का लाल किला 16वीं शताब्दी में अकबर ने बनवाया था. इसका निर्माण 1565 में शुरू हुआ और इसे बनने में 8 साल लगे. हालांकि ये किला बनने से पहले अकबर ने फतेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी बनाया था यह 14 सालों तक राजधानी रही. पानी की कमी के कारण अकबर ने 1582 में इसे छोड़कर राजधानी को लाहौर स्थानांतरित कर दिया. इसके बाद अकबर आगरा लौटा और इसे राजधानी बनाई. आगरा का लाल किला उस समय मुगल सम्राटों का प्रमुख निवास था.

दिल्ली का लाल किला

दिल्ली का लाल किला देश की गौरव का प्रतीक है. ये इतिहास की अहम घटनाओं का भी गवाह है बता दें कि इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने 17वीं सदी में करवाया था. लाल पत्थरों से बना होने के कारण इसे लाल किला कहा जाने लगा लेकिन इसका पुराना नाम किला-ए-मुबारक था. लाल किले की नींव 1638 में रखी गई थी जिसे तैयार होने में करीब एक दशक लग गए थे. इस दौरान शाहजहां आगरा से शासन कर रहा था, जहां उसका मुख्य महल था. इसके बाद शाहजहां ने मुगलों की राजधानी रही आगरा को दिल्ली ले जाने का फैसला लिया. इससे पहले मुगलों की चार पीढ़ियों ने आगरा से ही पूरे देश में अपना शासन चलाया था. लाल किले के निर्माण से पहले मुगल परिवार मुख्य रूप से आगरा किले में रहता था. शाहजहां का राज्याभिषेक 1628 में आगरा में हुआ था. 

मुगलों की शान का प्रतीक थे किले

मुगल बादशाह अपनी शानो-शौकत और वैभव के लिए प्रसिद्ध थे. भव्य किलों और महलों का निर्माण उनकी समृद्धि, शक्ति और स्थापत्य कला का प्रतीक है. उनके किले न केवल निवास थे, बल्कि प्रशासनिक, सांस्कृतिक और सैन्य केंद्र भी थे. शाही हरम, बाग-बगीचे, संगीत कक्ष और कीमती रत्नों से सजे महल उनके ऐश्वर्य को दर्शाते थे. भोजन, वस्त्र और उत्सवों में भी उनकी शान झलकती थी.

इसे भी पढ़ें- भारत के किस शहर में सबसे ज्यादा रहे मुगल, आखिर क्यों रास आया यह शहर?

About the author नेहा सिंह

नेहा सिंह बीते 6 साल से डिजिटल मीडिया की दुनिया से जुड़ी हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद से ताल्लुक रखती हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद हैदराबाद स्थित ईटीवी भारत से साल 2019 में अपने करियर की शुरुआत की. यहां पर दो साल तक बतौर कंटेट एडिटर के पद पर काम किया इस दौरान उन्हें एंकरिंग का भी मौका मिला जिसमें उन्होंने बेहतरीन काम किया.

फिर देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया, यहां प्रतिष्ठित चैनलों में काम कर कलम को धार दी. पहले इंडिया अहेड के साथ जुड़ीं और कंटेंट के साथ-साथ वीडियो सेक्शन में काम किया. 

इसके बाद नेहा ने मेनस्ट्रीम चैनल जी न्यूज में मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के पद पर अपनी सेवाएं दीं. जी न्यूज में रहते हुए नेशनल और इंटरनेशनल मुद्दों पर एक्सप्लेनर वीडियो क्रिएट किए.

इसी बीच प्रयागराज महाकुंभ के दौरान कुलवृक्ष संस्थान से जुड़कर महाकुंभ भी कवर किया, साधु-संतों का इंटरव्यू किया. लोगों से बातचीत करके उनके कुंभ के अनुभव और समस्याओं को जाना.

वर्तमान में नेहा एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां पर नॉलेज सेक्शन में ऐसी खबरों को एक्सप्लेन करती हैं, जिनके बारे में आम पाठक को रुचि होती है.

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