NATO Countries: नाटो में कितने देश, इसमें अमेरिका के अलावा कौन-कौन ताकतवर?
NATO Countries: मिडिल ईस्ट में तनाव रुकने का नाम नहीं ले रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि नाटो में कितने देश हैं और अमेरिका के अलावा कौन-कौन से देश ताकतवर हैं.

- नाटो में 32 सदस्य देश, फिनलैंड और स्वीडन नए शामिल हुए।
- अमेरिका के अलावा यूके, फ्रांस, तुर्की प्रमुख सैन्य शक्तियां।
- जर्मनी, इटली, पोलैंड रक्षा खर्च बढ़ाकर मजबूत हो रहे हैं।
- अनुच्छेद 5 सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है, 9/11 के बाद लागू।
NATO Countries: जैसे-जैसे दुनिया भर में तनाव बढ़ रहा है ईरान और इजरायल से जुड़े संघर्षों को लेकर होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम रास्तों में रुकावट तक कई बड़े मुद्दे पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन चुके हैं. इसी दौरान लोगों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर नाटो कितना मजबूत है और अमेरिका के अलावा कौन से देश इसमें ताकतवर भूमिका में हैं? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
नाटो की सदस्यता
नाटो में 32 सदस्य देश शामिल हैं. 2023 में फिनलैंड 31वें सदस्य देश के तौर पर शामिल हुआ और उसके बाद मार्च 2024 में स्वीडन 32वें देश के तौर पर शामिल हुआ. इन नए सदस्यों का जुड़ना एक ऐतिहासिक बदलाव था क्योंकि दोनों नॉर्डिक देश ने यूरोप में बढ़ती सुरक्षा चिंता के जवाब में अपनी लंबे समय से चली आ रही तटस्थता को छोड़ दिया था.
नाटो के सबसे शक्तिशाली देश
हालांकि अमेरिका नाटो की सबसे मजबूत सैन्य शक्ति बना हुआ है, लेकिन इसके बावजूद भी कई दूसरे सदस्य भी इस गठबंधन की ताकत और रणनीति को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. यूनाइटेड किंगडम को आमतौर पर नाटो का दूसरा सबसे शक्तिशाली सदस्य माना जाता है. इसके पास अपना स्वतंत्र परमाणु जखीरा है और यह दुनिया की सबसे एडवांस्ड नौसेना में से एक है.
फ्रांस एक और प्रमुख सैन्य शक्ति है. इसके पास अपनी खुद की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता है. यह दुनिया भर में अपनी मजबूत सैन्य उपस्थिति को बनाए रखता है और साथ ही स्वतंत्र रूप से काम करता है. इसी के साथ तुर्की अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से एक अनोखी स्थिति में है. यह यूरोप और एशिया को जोड़ता है. अमेरिका के बाद नाटो में इसकी सक्रिय सैन्य शक्ति दूसरी सबसे बड़ी है और यह अपनी एडवांस्ड ड्रोन क्षमताओं के लिए जाना जाता है.
वहीं जर्मनी ने बीते कुछ सालों में रक्षा खर्च में काफी बढ़ोतरी की है. कभी सैन्य विस्तार को लेकर सतर्क रहने वाले जर्मनी ने अब अपनी सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण किया है. यह नाटो के अंदर अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है. सैन्य उपकरण और रक्षा निवेश के मामले में इटली नाटो के कुछ बड़े सदस्यों में से एक है. यह नाटो के अहम ठिकानों की मेजबानी भी करता है और भूमध्य सागर की सुरक्षा में भी एक बड़ी भूमिका निभाता है.
इतना ही नहीं बल्कि पोलैंड भी तेजी से यूरोप में एक प्रमुख रक्षा शक्ति के तौर पर उभर रहा है. इसने टैंक, हथियार प्रणाली और सैनिकों की संख्या बढ़ाने में भारी निवेश किया है.
नाटो का मूल सिद्धांत
नाटो के केंद्र में अनुच्छेद 5 है. इसमें कहा गया है कि किसी एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा. यह सिद्धांत सभी 32 देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा को सुनिश्चित करता है. दिलचस्प बात यह है कि अनुच्छेद 5 का इस्तेमाल अब तक सिर्फ एक बार किया गया है. ऐसा 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 के हमलों के बाद किया गया था.
यह भी पढ़ें: शिवालिक-नंदादेवी शिप से आई LPG कितने वक्त में पहुंचेगी आपके घर? जान लें पूरा प्रोसेस




















