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US Israel Relations: जब नाटो में नहीं है इजरायल तो अमेरिका क्यों करता है इसकी इतनी मदद, जान लें जवाब?

US Israel Relations: इजरायल नाटो का सदस्य नहीं है लेकिन इसके बावजूद भी अमेरिका उसे पूरा समर्थन देता है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

US Israel Relations: पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अक्सर एक सवाल उठता है कि अमेरिका इजरायल को इतना ज्यादा समर्थन क्यों दे रहा है, जबकि वह तो नाटो का सदस्य भी नहीं है? इसका जवाब रणनीतिक हित, सैन्य सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और ऐतिहासिक संबंधों के मेल में छिपा है.

मध्य पूर्व में एक रणनीतिक साझेदार के तौर पर इजरायल 

अमेरिका इजरायल को मध्य पूर्व में अपना सबसे भरोसेमंद साझेदार मानता है. यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां अक्सर अस्थिरता और संघर्ष की स्थिति बनी रहती है. शक्ति संतुलन बनाए रखने में और खास तौर से ईरान जैसे विरोधियों का मुकाबला करने में इजरायल एक बड़ी भूमिका निभाता है. कई अमेरिकी नीति निर्माता इजरायल को कभी ना डूबने वाला विमान वाहक पोत कहते हैं. यह एक ऐसा रणनीतिक ठिकाना है जिसकी मदद से अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी बड़ी संख्या में सेना तैनात किए बिना ही अपना प्रभाव जमा पाता है.

सैन्य सहायता जिससे दोनों पक्षों को फायदा होता है 

इजरायल को मिलने वाली अमेरिकी सहायता का एक बड़ा हिस्सा सैन्य सहायता के रूप में आता है. लेकिन इस सहायता की रूपरेखा कुछ इस तरह से तैयार की गई है कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचता है. इजरायल के लिए यह जरूरी होता है कि वह इस सहायता का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी रक्षा कंपनियों से साजो सामान खरीदने पर ही खर्च करे. इसका मतलब यह है कि यह पैसा अक्सर घूम फिर कर वापस अमेरिका में ही पहुंच जाता है. इससे वहां रोजगार, रक्षा उद्योग और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलता है.

 एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का परीक्षण 

इजरायल का सुरक्षा वातावरण उसे एडवांस्ड सैन्य प्रणालियों के लिए परीक्षण के लिए एक अनोखी जगह बनाता है. मिसाइल रक्षा प्रणाली जैसी तकनीकों को अक्सर संयुक्त रूप से विकसित किया जाता है और फिर असली युद्ध की स्थितियों में उन्हें टेस्ट किया जाता है. इससे दोनों देशों को सही आंकड़ा मिलता है और उन रक्षा प्रणालियों को बेहतर बनाने में मदद मिलती है जिनका इस्तेमाल बाद में किसी दूसरे स्थान पर भी किया जा सकता है. 

मजबूत खुफिया और सुरक्षा सहयोग 

अमेरिका इजरायल संबंधों का सबसे अहम पहलू खुफिया जानकारी को साझा करना है. इजरायल की मोसाद जैसी खुफिया एजेंसी आतंकवाद और क्षेत्रीय संघर्षों से जुड़े खतरों पर नजर रखने के लिए अमेरिकी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती है. इस सहयोग की मदद से अमेरिका उन खतरों से निपट पाता है जिनकी जड़ उसके अपने देश की सीमा से कहीं दूर तक फैली हो सकती है.

ऐतिहासिक और राजनीतिक संबंध 

दोनों देशों के बीच के संबंधों को ऐतिहासिक और राजनीतिक वजहें भी आकर देती हैं. दोनों ही देश खुद को लोकतांत्रिक मूल्य और रणनीतिक दृष्टिकोण के मामले में एक दूसरे के साथ जुड़ा हुआ पाते हैं. अमेरिका के अंदर इजरायल को दोनों प्रमुख राजनीतिक दल का मजबूत समर्थन प्राप्त है. असरदार राजनीतिक समूह और समुदायों ने लगातार दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों का समर्थन किया है. 

इजरायल एक करीबी सहयोगी 

हालांकि इजरायल नाटो का सदस्य नहीं है और नाटो की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में नहीं आता. लेकिन इसके बावजूद भी प्रमुख गैर नाटो सहयोगी के तौर पर इसकी पहचान इस बात को पक्का करती है कि इसे करीबी सैन्य साझेदारी के कई फायदे मिलते हैं. इसमें आधुनिक हथियार प्रणालियों तक पहुंच, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर सहयोग शामिल है.

यह भी पढ़ें: नाटो में कितने देश, इसमें अमेरिका के अलावा कौन-कौन ताकतवर?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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