Japan Earthquake Technology: कितना मजबूत जापान का भूकंपरोधी सिस्टम, कैसे झेलता है बड़े से बड़े झटके?
Japan Earthquake Technology: आखिर ऐसा क्या खास है जापान के भूकंप रोधी सिस्टम में जो बड़े से बड़े भूकंप के झटके को झेल लेता है और वहां की इमारतों के कुछ नहीं होता.

Japan Earthquake Technology: दुनिया में जब भी सबसे खतरनाक भूकंपों की बात होती है, तो जापान का नाम सबसे पहले आता है. क्योंकि जापान भौगोलिक रूप से ऐसी जगह पर स्थित है जिसे पैसिफिक रिंग ऑफ फायर कहा जाता है. इस वजह से वहां हर साल हजारों छोटे-बड़े भूकंप के झटके आते रहते हैं. कई बार तो ये झटके इतने तेज होते हैं कि अगर ऐसे झटके किसी दूसरे देश में आएं, तो भारी तबाही मच जाए. लेकिन जापान में ऊंची इमारतें और घर इन झटकों के बाद भी सीधे खड़े रहते हैं. आइए जानते हैं कि आखिर जापान का भूकंप रोधी सिस्टम कितना मजबूत है?
खास और सख्त कानून
जापान की इस मजबूती के पीछे सबसे बड़ा हाथ वहां के सख्त कानूनों का है. जापान में सरकार ने इमारतों को बनाने के लिए बेहद कड़े कानून बना रखे हैं. वहां किसी भी बिल्डिंग को बनाने की इजाजत तब तक नहीं मिलती, जब तक कि वह भूकंप के कड़े टेस्ट पास न कर ले. साथ ही समय-समय पर इन कानूनों को और मजबूत किया जाता है. वहां पुरानी इमारतों को भी नई तकनीक के हिसाब से अपग्रेड करना जरूरी होता है.
इमारतें कैसे बच जाती हैं?
इसके लिए जाापान के कानून के मुताबिक इमारत की दीवारों और खंभों को इतना मजबूत और मोटा बनाया जाता है कि वे भूकंप के तेज झटकों को आसानी से सहन कर सकें. साथ ही जापान में अलग-अलग मंजिलों के बीच शॉक एब्जॉर्बर लगाए जाते हैं. ये ठीक वैसे ही काम करते हैं जैसे किसी कार या बाइक के सस्पेंशन गड्ढों के झटकों को सोख लेते हैं. जब भूकंप आता है, तो ये शॉक एब्जॉर्बर हिलती हुई बिल्डिंग की ऊर्जा को सोख लेते हैं, जिससे इमारत गिरने से बच जाती है. जापान की बड़ी और ऊंची इमारतों को अक्सर जमीन से थोड़ा अलग कर दिया जाता है. इसके लिए बिल्डिंग की नींव के नीचे कंक्रीट के बजाय रबर या फ्लूइड के बड़े-बड़े पैड लगाए जाते हैं. जब जमीन हिलती है, तो सिर्फ नीचे के पैड हिलते हैं और ऊपर की इमारत बिल्कुल सुरक्षित और स्थिर रहती है.
यह भी पढ़ें: पुलिस को कौन देता है गोली चलाने का आदेश? यहां जान लीजिए जवाब
हल्की चीजों का इस्तेमाल
जापान में पुराने समय और आज के समय में भी घरों को बनाने के लिए भारी पत्थरों या कंक्रीट की जगह हल्की लकड़ी, स्टील और मजबूत फाइबर का इस्तेमाल किया जाता है. अगर भूकंप बहुत तेज हो और घर गिर भी जाए, तो हल्का मलबा होने के कारण जान-माल का नुकसान न के बराबर होता है. साथ ही जापान का अर्ली वॉर्निंग सिस्टम इतना एडवांस है कि भूकंप की लहरें जमीन पर पहुंचने से कुछ सेकंड पहले ही पूरे देश के मोबाइल फोन, टीवी और रेडियो पर अलर्ट आ जाता है. इस सिस्टम के जरीए बुलेट ट्रेनें अपने आप रुक जाती हैं, फैक्ट्रियों की गैस लाइनें बंद हो जाती हैं और लिफ्ट नजदीकी फ्लोर पर रुककर खुल जाती हैं. यही कारण है कि जापान बड़े से बड़े भूकंप के झटकों को बहुत आराम से झेल जाता है.
यह भी पढ़ें: दुबई का वह इकलौता 7-स्टार होटल, एक रात का किराया उड़ा देगा होश























