इंटरनेशनल बॉर्डर, LOC और LAC, क्या है तीनों में अंतर
अंतरराष्ट्रीय सीमा, LoC और LAC के बीच भौगोलिक और कानूनी तौर पर होता है बड़ा फर्क, जानिए भारत की सुरक्षा के लिहाज से क्यों अलग-अलग नियम होते हैं इन सीमाओं पर लागू.

देश की सीमाओं की सुरक्षा को लेकर आजकल लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है. ऐसे में एक आम नागरिक के रूप में यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर इंटरनेशनल बॉर्डर, लाइन ऑफ कंट्रोल LoC और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल LAC में रक्षात्मक और कानूनी रूप से क्या अंतर है.
इंटरनेशनल बॉर्डर
इंटरनेशनल बॉर्डर वह सीमा होती है, जिसे दोनों देश आधिकारिक और कानूनी रूप से स्वीकार करते हैं. यह सीमा पूरी तरह से नक्शे पर तय होती है और जमीन पर भी इसे बाड़ या खंभों के जरिए साफ तौर पर चिह्नित किया जाता है. भारत की पाकिस्तान के साथ लगती गुजरात, राजस्थान और पंजाब की सीमा इंटरनेशनल बॉर्डर के दायरे में आती है.
इसके अलावा भारत की बांग्लादेश, नेपाल और भूटान के साथ जो सीमाएं हैं, वे भी अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हैं. इस सीमा पर किसी का कोई विवाद नहीं होता है और भारत की तरफ से इसकी सुरक्षा मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा बल BSF जैसी अर्धसैनिक बल की टुकड़ियां करती हैं.
लाइन ऑफ कंट्रोल LoC
लाइन ऑफ कंट्रोल LoC यानी नियंत्रण रेखा कोई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत सीमा नहीं है, बल्कि यह एक सैन्य रूप से तय की गई रेखा है. यह रेखा मुख्य रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर में स्थित है. साल 1947 में दोनों देशों के बीच हुए युद्ध के बाद जहां दोनों देशों की सेनाएं मौजूद थीं, उसे सीजफायर लाइन माना गया. बाद में साल 1972 के ऐतिहासिक शिमला समझौते के बाद इसी सीजफायर लाइन को लाइन ऑफ कंट्रोल LoC का नाम दिया गया.
LoC के पार का हिस्सा पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है, जिसे PoK कहा जाता है. चूंकि यह एक अत्यधिक संवेदनशील और विवादित क्षेत्र है, इसलिए इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय थल सेना के हाथों में होती है और यहां दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने तैनात रहती हैं.
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लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल LAC
लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल LAC यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा भारत और चीन के बीच की सीमा को कहा जाता है. हालिया विवाद इसी रेखा को लेकर है. यह सीमा भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत नहीं है और न ही इस पर दोनों देशों के बीच कोई लिखित या आपसी सहमति का नक्शा है. साल 1962 में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध के बाद दोनों देशों की सेनाएं जहां आकर रुकीं, उसे ही LAC मान लिया गया.
LAC की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यह कोई स्पष्ट या चिह्नित रेखा नहीं है. यह दुर्गम पहाड़ों, नदियों और झीलों से होकर गुजरती है, जिसके कारण दोनों देश इसके सटीक स्थान को लेकर अलग-अलग दावा करते हैं और इसी वजह से चीनी गश्ती दल द्वारा स्थापित पैटर्न से हटने पर ITBP चीफ द्वारा बताए गए फेस-ऑफ जैसी स्थितियां पैदा होती हैं. इस बेहद कठिन और बर्फीले इलाके में भारत की तरफ से भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ITBP के जवान संयुक्त रूप से मुस्तैदी से सुरक्षा करते हैं.
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