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किसी भी हमले का बदला लेने में कौन सा देश सबसे क्रूर, जानें कैसे-कैसे मिशन दिए अंजाम?

जिस तरह पीएम नरेंद्र मोदी सऊदी अरब का दौरा बीच में छोड़कर भारत वापस लौटे हैं, माना जा रहा कि आतंक के खिलाफ कड़ा एक्शन हो सकता है. इस बार पूरा भारत उरी और बालाकोट से भी खतरनाक एक्शन की मांग कर रहा है.

पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद देश के भीतर आतंकियों को मुहतोड़ जवाब देने की मांग उठ रही है. सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोग हमले की साजिश रचने में शामिल पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने की मांग कर रहे हैं. हालांकि, भारत में रक्षा अधिकारियों की मौजूदगी में बैठकों का दौर जारी है. जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब का दौरा बीच में छोड़कर भारत वापस लौटे हैं, माना जा रहा कि आतंक के खिलाफ कड़ा एक्शन हो सकता है. भारत ने इससे पहले भी उरी सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर दुश्मन को अपनी ताकत का अहसास कराया था. माना जा रहा है कि भारत इस बार इससे भी खतरनाक प्रतिक्रिया देगा.

भारत में हुए इस आतंकी हमले की पूरी दुनिया ने निंदा की है. यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी आतंक के खिलाफ भारत का साथ देने का ऐलान किया है. इस बीच हम आपको दुनिया के उस देश से रूबरू कराएंगे जो किसी भी हमले का बदला लेने में सबसे क्रूर माना जाता है. इस देश ने दुश्मन के देश में घुसकर न केवल अपने नागरिकों को बचाया है, बल्कि पूरी दुनिया में ढूंढ-ढूंढकर आतंकियों का सफाया भी किया है. आइए जानते हैं उस देश का नाम और उसके सबसे खतरनाक ऑपरेशन. 

यह देश है बदला लेने में सबसे क्रूर

जब भी किसी देश पर हमला होता है तो वहां की सरकार आतंकियों के खिलाफ जंग का ऐलान जरूर करती है. हालांकि, कई बार लंबी जांच प्रक्रियाओं के चलते आतंकी हाथ से निकल जाते हैं. हालांकि, कुछ देश ऐसे हैं जो अपने नागरिकों पर हुए हमले का सालों बाद भी न सिर्फ जवाब देते हैं, बल्कि भयानक तरीके से बदला भी लेते हैं. इसका मजमून अमेरिका है, जिसने 2001 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के बाद लंबा इंतजार किया और एक दशक बाद अलकायदा चीफ ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में मौत के घाट उतार दिया था. हालांकि, हमले का बदला लेने में इससे भी खतरनाक देश इजराइल को माना जाता है, जिसकी खुफिया एजेंसी 'मोसाद' दुश्मन के घर में घुसकर भी बदला लेने में माहिर है. 

दुश्मन के घर में घुसकर बदला लेता है इजराइल

इजराइल को उन चुनिंदा देशों में सबसे खतरनाक माना जाता है जो किसी भी हमले का बदला बहुत ही क्रूर तरीके से लेते हैं. हाल में हमास द्वारा इजराइल पर हमले और बड़ी संख्या में इजराइली लोगों के अपहरण का बदला लेने के लिए इजराइल ने पूरी गाजा पट्टी को तबाह कर दिया, इतना ही नहीं हमास जैसे आतंकी संगठन की भी कमर तोड़कर रख दी थी. इजराइल की सबसे बड़ी ताकत उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद को माना जाता है. इसका मजमून दुनिया ने तब देखा था, जब मोसाद ने पेजर ब्लास्ट कर हमास को घुटनों पर ला दिया था. 

ये हैं इजराइल और मोसाद के सबसे खतरनाक ऑपरेशन 

  • जर्मनी के म्यूनिख में 1972 में आयोजित ओलंपिक खेलों में इजराइल के 11 खिलाड़ियों की हत्या कर दी गई थी. इस हमले का बदला लेने के लिए मोसाद ने 'रैथ ऑफ गॉड' ऑपरेशन चलाया, जिसके बाद मोसाद के एजेंटों ने खिलाड़ियों की हत्या करने वाले आतंकियों को दुनिया के कई देशों में ढूंढ-ढूंढकर मौत के घाट उतारा. सबसे आखिरी में इस हमले के मास्टरमाइंड अली हसन सलामेह को मोसाद एजेंटों ने लेबनान की राजधानी बेरूत में मार गिराया था. 
  • 1960 में नाजी ऑफिसर एडॉल्ड आइशमन का मोसाद के एजेंटों ने अर्जेंटीना से अपहरण कर लिया था. यह मिशन इतना खतरनाक था कि 14 एजेंटों की टीम सफलतापूर्वक उन्हें इजराइल लाने में कामयाब भी रही थी. आइशमन पर द्वितीय विश्व युद्ध पर यहूदियों के उत्पीड़न और हत्या के आरोप थे. इजराइल लाने पर उस पर मुकदमा चलाया गया और मौत की सजा दे दी गई. 
  • युंगाडा में 1976 में चलाए गए एंतेबे ऑपरेशन को भी इजराइल का सबसे खतरनाक सैन्य अभियान माना जाता है. दरअसल, पॉपुलर फ्रंट फॉर लिबरेशन ऑफ पेलेस्टन के दो सदस्यों ने जर्मनी के अन्य दो लोगों के साथ मिलकर पेरिस जा रहे विमान को हाईजैक कर लिया था और अपने साथ युगांडा ले गए थे. इजराइल कमांडोज ने हवाई अड्डे पर हमला कर 100 इजराइली और यहूदी बंधकों को बचाया था. 
  • इजराइल और ईरान के बीच हमेशा से तनाव रहा है. ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकने के लिए इजराइल कई मिशनों को अंजाम दे चुका है. इसमें सबसे खतरनाक मिशन ईरान के परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह की ईरान में हत्या थी. सबसे चौंकानी वाली बात यह है मोसाद ने इस मिशन को अंजाम देने के लिए सैटेलाइट से रिमोट कंट्रोल की मदद से मशीन गन को ऑपरेट किया था. 2020 में हुई इस हत्या की उस समय मोसाद ने जिम्मेदारी नहीं ली थी, लेकिन जून 2021 में मोसाद ने इस हत्याकांड की जिम्मेदारी ली थी. 

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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