क्या चांद पर लग रहा है जंग, जानें क्या है इसके पीछे का सच?
Moon Rusting: हाल ही में चांद पर जंग लगने की खबर सामने आई है. आइए जानते हैं कि सूखी और हवा रहित जगह पर आखिर जंग कैसे लग सकता है. जानें इसका साइंस.

- पृथ्वी की मैग्नेटोटेल सौर हवा रोककर, चांद पर जंग में मदद करती है।
Moon Rusting: चांद को अक्सर एक सूखी और हवा रहित जगह माना जाता है जहां जंग लगना नामुमकिन होना चाहिए. लेकिन इसके बावजूद भी वैज्ञानिकों को ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि चांद की सतह के कुछ हिस्सों में जंग लगने जैसी प्रक्रिया हो रही है. भारत के पहले मून मिशन, चंद्रयान 1 से मिले डेटा पर आधारित इस खोज ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. ऐसा इसलिए क्योंकि चांद पर वह वातावरण और तरल पानी नहीं है जो आमतौर पर जंग लगने के लिए जरूरी होता है.
इस खोज ने एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा कर दिया है. चांद पर लोहा कैसे जंग खा सकता है जबकि वहां ना तो कोई खास वातावरण है और ना ही तरल पानी? वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि इस अनोखी केमिकल प्रक्रिया में पृथ्वी की भी बड़ी भूमिका है.
जंग लगना क्या है?
जंग लगना एक केमिकल प्रक्रिया है जिसमें लोहा ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करता है और आयरन ऑक्साइड बनाता है. पृथ्वी पर यह प्रक्रिया आमतौर पर ऑक्सीजन और पानी की मौजूदगी में होती है.
हालांकि चांद पर कोई खास वातावरण नहीं है और ना ही इसकी सतह पर बहता हुआ तरल पानी है. इसकी वजह से वहां जंग का मिलना काफी ज्यादा अजीब बात है. इस वजह से वैज्ञानिकों ने पृथ्वी, चांद और सौर हवाओं के बीच होने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर इसकी व्याख्या खोजने की कोशिश की है.

चंद्रयान 1 ने चांद पर पानी का पता लगाने में मदद की
इस रहस्य का एक बड़ा हिस्सा पानी से जुड़ा है. चंद्रयान 1 ने चांद के ध्रुवीय इलाके में पानी की बर्फ और पानी से जुड़े अणुओं के सबूत दिए. हालांकि पृथ्वी की तुलना में चांद का वातावरण काफी सूखा है लेकिन पानी के कणों की मौजूदगी उन चीजों में से एक है जो चांद के लोहे से जुड़ी केमिकल प्रतिक्रियाओं में हिस्सा ले सकती हैं. इस खोज ने चांद के बारे में वैज्ञानिकों की समझ बदल दी और दिखाया कि पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह पूरी तरह से पानी से रहित नहीं है.
ऑक्सीजन चांद तक कैसे पहुंचती है?
चांद पर पृथ्वी जैसा कोई वातावरण नहीं है लेकिन इसके बावजूद भी पृथ्वी के ऊपरी वातावरण से ऑक्सीजन चांद के वातावरण तक पहुंच सकती है. जब चांद पृथ्वी की चुंबकीय पूंछ से गुजरता है तो पृथ्वी के ऊपरी वातावरण से पदार्थ चांद की तरफ जा सकते हैं. ऐसा चांद की पृथ्वी के चारों ओर होने वाली मासिक यात्रा के एक खास हिस्से के दौरान होता है. यही वजह है कि पृथ्वी से निकलने वाली ऑक्सीजन चांद की सतह के संपर्क में आ सकती है.
पृथ्वी की मैग्नेटोटेल एक खास मौका देती है
आमतौर पर चंद्रमा लगातार सौर हवा के संपर्क में रहता है जो सूरज से आने वाले चार्ज्ड कणों की एक धारा है. सौर हवा में हाइड्रोजन होता है जो ऑक्सीकरण की प्रक्रिया में रुकावट डाल सकता है.
हालांकि हर महीने कुछ दिनों के लिए चंद्रमा पृथ्वी की मैगनेटोटेल से होकर गुजरता है और ज्यादातर सौर हवा से सुरक्षित हो जाता है. इस दौरान लगभग 99% सौर हवा रुक जाती है. इससे ऐसे अनोखे हालात बनते हैं जिनमें पृथ्वी की ऑक्सीजन, सौर हवा के हाइड्रोजन और सामान्य असर के बिना चंद्रमा पर मौजूद लोहे के पदार्थ के साथ प्रतिक्रिया कर सकती है.
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चांद पर मौजूद लोहे में जंग कैसे लगता है?
वैज्ञानिकों ने चांद की सतह के कुछ हिस्सों पर हेमेटाइट की पहचान की है. पानी के कणों और ऑक्सीजन की मौजूदगी साथ ही सौर हवा से कुछ समय के लिए मिलने वाली सुरक्षा इसके बनने की एक संभावित वजह बताती है.
यह प्रक्रिया पृथ्वी पर आमतौर पर लगने वाले जंग से काफी अलग है. ऐसा इसलिए क्योंकि चांद पर वैसी वायुमंडलीय और पर्यावरणीय स्थिति नहीं है. इसके बजाय पृथ्वी की ऑक्सीजन, चांद के पानी और लोहे के बीच प्रतिक्रिया अंतरिक्ष की काफी अनोखी स्थिति में होती है.
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