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Ganga Expressway: क्या सच में महंगा है गंगा एक्सप्रेस-वे? फ्लाइट टिकट से तुलना करने वाले ये सच जान हैरान रह जाएंगे

Ganga Expressway: उत्तर प्रदेश के गंगा एक्सप्रेसवे के टोल की कीमत की तुलना हवाई जहाज के टिकट से की जा रही है. आइए जानते हैं कि दोनों के रेट में कितना फर्क है.

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  • समय की बचत, यात्रा 12-13 घंटे से घटकर 6-7 घंटे होगी.

Ganga Expressway: हाल ही में शुरू हुआ गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में से एक बन गया है. जिस बात पर बहस छिड़ रही है वह है टोल की कीमत. मेरठ से प्रयागराज तक पूरे 594 किलोमीटर के रास्ते पर गाड़ी चलाने वाले यात्रियों को अब एक प्राइवेट कार में एक तरफ की यात्रा के लिए ₹1800 का टोल देना होगा. जैसे ही ये रेट सार्वजनिक हुए सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी तुलना हवाई जहाज के टिकटों से करनी शुरू कर दी. लोग इसे हवाई यात्रा से भी ज्यादा महंगा बता रहे हैं. आइए जानते हैं कि कितनी सही है यह तुलना.

अलग-अलग तरह के वाहनों के लिए टोल रेट 

नए टोल स्ट्रक्चर के तहत गाड़ी, जीप, वैन और दूसरे हल्के मोटर वाहनों को पूरे रास्ते के लिए ₹1800 देने होंगे. हल्के कमर्शियल और माल ढोने वाले वाहनों को ₹2840 का टोल देना होगा. इसी के साथ बस और ट्रक से ₹5720 लिए जाएंगे. 

सबसे ज्यादा टोल भारी कंस्ट्रक्शन मशीनें, जमीन खोदने वाले उपकरण और बड़े मल्टी-एक्सेल वाहन पर लगता है. इन वाहनों पर ₹8760 से ₹11,265 के बीच टोल लगेगा.

टोल इतना महंगा क्यों लगता है? 

पहली नजर में एक सड़क यात्रा के लिए ₹1800 काफी ज्यादा लगते हैं. हालांकि इसकी सबसे बड़ी वजह एक्सप्रेसवे की काफी ज्यादा लंबाई है. लगभग 600 किलोमीटर लंबा होने की वजह से यह भारत के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक है. 

अगर गणितीय रूप से इसका हिसाब लगाया जाए तो गाड़ियों के लिए टोल रेट लगभग ₹2.55 प्रति किलोमीटर बैठता है. यह असल में यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसे दूसरे बड़े एक्सप्रेसवे पर लगने वाले रेट के काफी करीब है. 

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हवाई यात्रा से तुलना 

हवाई यात्रा से तुलना इस वजह शुरू हुई क्योंकि दिल्ली और प्रयागराज के बीच हवाई जहाज के टिकट कभी-कभी प्रति व्यक्ति लगभग ₹3000 से ₹5000 में मिल जाते हैं. इस वजह से ₹1800 का टोल काफी ज्यादा लगता है.

लेकिन अगर एक से ज्यादा यात्रियों को ध्यान में रखकर असली हिसाब लगाया जाए तो सारा मामला साफ हो जाता है. मेरठ से प्रयागराज तक की रोड ट्रिप में आमतौर पर टोल और ईंधन दोनों का खर्च शामिल होता है. वाहन और ईंधन की कीमत के आधार पर यह कुल खर्च ₹5300 से ₹7000 के बीच हो सकता है. अगर चार या फिर पांच लोग एक साथ एक गाड़ी में यात्रा कर रहे हैं तो प्रति व्यक्ति खर्च घटकर लगभग ₹1000 से ₹1400 रह जाता है.  वहीं पांच लोगों का एक परिवार अगर हवाई जहाज से प्रयागराज जाता है तो उन्हें सिर्फ टिकटों पर ही लगभग ₹25000 खर्च करने पड़ सकते हैं. 

समय की बचत 

एक्सप्रेसवे के पक्ष में सबसे मजबूत तर्कों में से एक है समय की बचत. पहले मेरठ और प्रयागराज के बीच सड़क यात्रा में लगभग 12 से 13 घंटे लगते थे. गंगा एक्सप्रेसवे के चालू हो जाने से यात्रा का समय घटकर मात्र 6 से 7 घंटे रह जाने की उम्मीद है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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