क्या होती है हाइमनोप्लास्टी? क्यों वर्जनिटी के लिए ऐसा करवा रही हैं लड़कियां
अब महिलाएं हाइमनोप्लास्टी का सहारा लेकर अपनी वर्जनिटी पाने की कोशिश कर रही है. हाइमनोप्लास्टी का चलन अभी भारत में नहीं है, लेकिन विदेश में काफी महिलाएं इसे अपना रही हैं.

Hymenoplasty: वर्जनिटी को लेकर महिलाओं के बीच अलग-अलग राय होती हैं. ऐसे में इस लेकर कई तरह की सर्जरी चलन में हैं और भारत के बाहर इनका चलन बढ़ रहा है. इसमें एक सर्जरी है हाइमनोप्लास्टी. हाइमनोप्लास्टी अभी भारत में कम है, लेकिन विदेश में कई महिलाएं इसकी ओर बढ़ रही हैं. अगर आपके मन में भी इसे लेकर कोई सवाल है तो आज हम आपको बताते हैं कि आखिर हाइमनोप्लास्टी है क्या और किस तरह से इसे किया जाता है. साथ ही जानते हैं इससे जुड़े कुछ तथ्य, जिसके बाद आप हाइमनोप्लास्टी के बारे में जान सकेंगे.
डॉक्टरों का कहना है कि खोई हुई वर्जनिटी पाने के लिए जिस सर्जरी या तकनीक का प्रयोग किया जाता है, उसे हाइमनोप्लास्टी कहा जाता है. दरअसल, वजाइना में एक मेंबरेन (झिल्ली) होती है. इसे हाइमन कहा जाता है. इस झिल्ली के डैमेज होने का मतलब होता है कि महिला की वर्जिनिटी लूज है. डॉक्टर इस झिल्ली को सर्जरी के जरिए रीस्टोर कर देते हैं. इसे हाइमनोप्लास्टी कहते हैं.
इस वजह से डैमेज होती है मेंबरेन
स्पोर्ट्स में एक्टिव होना, साइकिल चलाना, घुड़सवारी करना, मासिक धर्म के दौरान टैंपून का इस्तेमाल करना भी हाइमन ब्रेक होने का कारण बनता है. कुछ लड़कियां शादी से पहले सेक्शुअली अधिक एक्टिव होती हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों के पास सर्जरी करवाने के लिए जो लड़कियां आ रही हैं. उनमें से 80 फ़ीसदी युवा होती है. इनकी उम्र 20 से 25 साल के बीच होती है. कुछ महिलाएं 25 से 35 तक की भी आती हैं. डायवोर्स वाली महिलाएं भी इसका सहारा ले रही हैं.
कितना आ जाता है खर्च
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों के पास कॉल इन्कवायरी के लिए आते हैं. उनमें सर्जरी करने वाली लड़की सहेली या फिर कोई अन्य महिला ही जानकारी लेती हैं. बड़े अस्पताल में सर्जरी का खर्च 50 से 70 हजार रुपये तक आ जाता है. छोटे अस्पताल में थोड़ा कम खर्चा आ जाता हैं. हालांकि अस्पताल में सभी की प्राइवेसी का ख्याल रखा जाता है.
आधे घंटे में हो जाती है सर्जरी
सर्जरी करवाने से पहले किसी बड़े अस्पताल में कोई लड़की जा रही है तो उसे पूरा पेपर वर्क करना होता है. डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी होने में महज आधे घंटे का समय लगता है. अगर बड़े अस्पताल में सर्जरी हो रही है तो वहां लोकल या जनरल एनस्थीसिया देकर हाइमन रीस्टोर किया जाता है. पेपर वर्क लगाकर लगाकर 5 से 6 घंटे लग जाते हैं. छोटे अस्पताल में यही काम करीब एक से डेढ़ घंटे में हो जाता है. इसके बाद लड़की घर चली जाती है. कुछ सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है जैसे साफ़-सफ़ाई बरतना, सेक्शुअली एक्टिव न होना, टू व्हीलर और साइकिल न चलाना, एक्सरसाइज नहीं करने की सलाह दी जाती है.
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