Asansol Temple: किस वजह से कई साल से बंद था आसनसोल का दुर्गा मंदिर, जो बीजेपी की जीत के बाद खुला?
Asansol Temple: पश्चिम बंगाल के आसनसोल दुर्गा मंदिर को खोल दिया गया है. आइए जानते हैं कि आखिरी यह मंदिर सालों से क्यों बंद था.

- आसनसोल दुर्गा मंदिर फिर से भक्तों के लिए खुला।
- कई वर्षों से स्थानीय कारणों से मंदिर बंद था।
- भाजपा विधायक के वादे के बाद मंदिर का द्वार खुला।
- मंदिर खुलने से धार्मिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा।
Asansol Temple: पश्चिम बंगाल के आसनसोल से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद आसनसोल दुर्गा मंदिर जो सालों से बंद रहता था आखिरकार एक बार फिर से खुल गया है. इसे देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है और पूरे इलाके में जश्न का माहौल है. श्री श्री दुर्गा माता चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित और बस्तिन बाजार में स्थित इस मंदिर को फिर से खोल दिया गया है.
मंदिर सालों तक बंद क्यों रहा?
स्थानीय तनाव और प्रशासनिक पाबंदियों के मिले-जुले कारणों की वजह से यह मंदिर साल के ज्यादातर समय बंद ही रहता था. कई रिपोर्ट्स और स्थानीय लोगों के दावों के मुताबिक यहां नियमित पूजा पाठ की अनुमति नहीं थी और यह मंदिर लंबे समय तक विवादों से घिरा रहा. यही वजह है कि भक्तों को लगातार मंदिर में प्रवेश नहीं मिल पाता था और कुछ खास मौकों को छोड़कर मंदिर के दरवाजे हमेशा बंद ही रहते थे.
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सिर्फ बड़े त्योहारों पर ही सीमित प्रवेश
अलग-अलग दावों के मुताबिक लगभग 15 से 30 सालों तक यह मंदिर सिर्फ दुर्गा पूजा और लक्ष्मी पूजा जैसे बड़े त्योहारों के दौरान ही खोला जाता था. इन मौकों के अलावा आम लोगों के लिए यह मंदिर पूरी तरह से बंद रहता था. प्रवेश की यह सीमित सुविधा स्थानीय भक्तों के बीच लंबे समय से असंतोष की वजह बनी हुई थी.
राजनीतिक वादा हकीकत बना
मंदिर का फिर से खुलना हाल ही में हुए चुनावों के नतीजों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है. आसनसोल उत्तर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले कृष्णेंदु मुखर्जी अपने चुनाव प्रचार के दौरान यह वादा किया था कि अगर वे चुनाव जीत जाते हैं तो मंदिर को जरूर खुलवाएंगे.
क्या होगा इसका प्रभाव?
अब जब मंदिर पूरे साल खुला रहेगा तो यहां धार्मिक गतिविधियों में जबरदस्ती तेजी आने की उम्मीद है. भक्तों को श्रद्धालुओं की अचानक हुई भीड़ ने इस पूरे इलाके में पहले से ही एक उत्सव जैसा माहौल बना दिया है. धर्म से परे इस कदम का आर्थिक क्षेत्र पर भी प्रभाव पड़ने की पूरी संभावना है. आने जाने वालों की संख्या बढ़ने से स्थानीय व्यवसाय, छोटे विक्रेताओं और आसपास के बाजारों को बढ़ावा मिल सकता है.
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Source: IOCL
























