Iran Protest: ईरान पर सबसे ज्यादा किसका है कर्ज, यहां सरकार बदली तो किसे होगा सबसे ज्यादा नुकसान?
Iran Protest: ईरान में सत्ता परिवर्तन की आहट ने दुनिया को सतर्क कर दिया है. वहां पर जमकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. चलिए जान लेते हैं कि आखिर ईरान पर किस देश का कर्ज सबसे ज्यादा है.

Iran Protest: ईरान की सड़कों पर गुस्सा, नाराजगी और बदलाव की मांग अब थमने का नाम नहीं ले रही है. 18 दिन से जारी आंदोलन ने सत्ता की नींव हिला दी है. दमन, गिरफ्तारियां और फांसी की आशंका ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है. इसी बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि अगर ईरान में सरकार बदल जाती है तो आर्थिक रूप से सबसे ज्यादा झटका किसे लगेगा? और ईरान पर आखिर सबसे ज्यादा कर्ज किस देश का है? यही इस पूरी कहानी का सबसे अहम पहलू है, आइए समझें.
ईरान में आंदोलन ने लिया गंभीर रूप
ईरान में चल रहा जन आंदोलन अब केवल विरोध प्रदर्शन नहीं रह गया है, बल्कि इसे सत्ता परिवर्तन की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है. खामेनेई सरकार प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरत रही है. सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में अब तक 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत की खबरें हैं और 10,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि 26 वर्षीय युवा प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी को फांसी दिए जाने की आशंका जताई जा रही है.
अमेरिका की चेतावनी और बढ़ता दबाव
इन घटनाओं पर अमेरिका ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देना शुरू करता है, तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा. ट्रंप पहले ही ईरानी जनता को संदेश दे चुके हैं कि वे पीछे न हटें. जानकारों का मानना है कि अगर इरफान सुल्तानी को सार्वजनिक रूप से फांसी दी जाती है, तो आंदोलन और तेज हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की संभावना भी बढ़ जाएगी.
ईरान की अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत
राजनीतिक उथल-पुथल के बीच ईरान की आर्थिक स्थिति भी चर्चा में है. मार्च 2025 तक ईरान का बाहरी कर्ज घटकर 4.9 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया है. एक साल पहले यह आंकड़ा करीब 5.0 अरब डॉलर था. दिलचस्प बात यह है कि 2008 में ईरान का बाहरी कर्ज अपने चरम पर था, जब यह 28.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया था. यानी पिछले डेढ़ दशक में ईरान ने अपने कर्ज के बोझ को काफी हद तक कम किया है.
ईरान पर सबसे ज्यादा कर्ज किसका है?
ईरान पर बाहरी कर्ज अपेक्षाकृत कम है और यह किसी एक देश पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं है. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते ईरान को पश्चिमी देशों से बड़े पैमाने पर कर्ज मिलना पहले ही बंद हो चुका है. मौजूदा कर्ज मुख्य रूप से कुछ एशियाई और क्षेत्रीय साझेदारों से जुड़ा माना जाता है, इसलिए अगर सरकार बदलती भी है, तो किसी एक देश को बड़ा झटका लगने की संभावना सीमित है.
चालू खाता और निवेश के आंकड़े क्या कहते हैं?
आर्थिक मोर्चे पर ईरान की तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है. मार्च 2025 में देश के चालू खाते में 13.2 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया गया. इसके अलावा दिसंबर 2021 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 838.3 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी. उसी साल ईरान का एफडीआई 328 मिलियन डॉलर तक पहुंचा और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में भी 45.6 मिलियन डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई.
सरकार बदली तो किसे होगा सबसे ज्यादा नुकसान?
अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है, तो सबसे ज्यादा असर उन देशों और कंपनियों पर पड़ सकता है, जो ऊर्जा, तेल और गैस के सेक्टर में ईरान से जुड़े हुए हैं. राजनीतिक अस्थिरता के कारण निवेश योजनाएं अटक सकती हैं और तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. हालांकि कम बाहरी कर्ज होने के कारण ईरान पर वित्तीय दबाव सीमित रहेगा.
ईरान की जीडीपी और आगे की राह
जून 2025 में ईरान की नाममात्र जीडीपी 119.7 अरब अमेरिकी डॉलर आंकी गई है. यह दिखाता है कि तमाम प्रतिबंधों और राजनीतिक संकट के बावजूद ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप नहीं हुई है, लेकिन अगर हिंसा और अनिश्चितता लंबी चली, तो इसका सीधा असर विकास और निवेश पर पड़ेगा.
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Source: IOCL
























