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दुनिया का दूसरा ताकतवर देश होकर भी नेवी रैंकिंग में चीन से क्यों पिछड़ा रूस? जानें जवाब

Global Naval Powers Ranking: हाल ही में आई एक नौसैनिक रैंकिंग ने कई बड़े देशों की नेवल पावर पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आइए जानें कि इस लिस्ट में रूस-चीन से पीछे कैसे रह गया.

दुनिया की प्रमुख नौसेनाओं को लेकर वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न वॉरशिप्स एंड सबमरीन यानी WDMMW ने नई रैंकिंग जारी की है. यह रैंकिंग सिर्फ जहाजों की गिनती पर नहीं, बल्कि ‘ट्रू वैल्यू रेटिंग’ पर आधारित है. इसका मतलब यह है कि किसी देश के पास कितने जहाज हैं, इससे ज्यादा अहम यह देखा गया कि वे जहाज कितने आधुनिक हैं, युद्ध में कितने असरदार हैं और लंबी अवधि में कितना खतरा पैदा कर सकते हैं. दूसरा सबसे ताकतवर देश माने जाने वाला रूस नेवी की लिस्ट में चीन से पीछे क्यों रह गया? और भारत टॉप-5 से बाहर कैसे हो गया? आइए जान लेते हैं.

अमेरिका अब भी नंबर वन क्यों?

इस रैंकिंग में अमेरिका की नौसेना पहले स्थान पर बनी हुई है. इसकी सबसे बड़ी वजह है उसकी वैश्विक मौजूदगी और 11 एयरक्राफ्ट कैरियर. अमेरिका के पास ऐसे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप हैं, जो दुनिया के किसी भी समुद्री इलाके में तेजी से तैनात हो सकते हैं. इसके साथ ही एडवांस्ड सबमरीन, मिसाइल डिफेंस सिस्टम और अनुभवी नौसैनिक ढांचा उसे अब भी बाकी देशों से आगे रखता है. 

चीन दूसरे नंबर पर कैसे पहुंचा?

चीन की नौसेना यानी पीपल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) को इस रैंकिंग में दूसरा स्थान मिला है. चीन पिछले कुछ सालों से बेहद तेजी से अपने नौसैनिक बेड़े को बढ़ा रहा है. अमेरिका के रक्षा विभाग की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पास 370 से ज्यादा जहाज और पनडुब्बियां हैं. संख्या के लिहाज से यह दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बन चुकी है. चीन के पास फिलहाल तीन एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, चौथे पर काम चल रहा है और लक्ष्य 2035 तक नौ कैरियर तैयार करने का है. यही तेजी और आधुनिकरण चीन को रूस से आगे ले गई.

रूस तीसरे नंबर पर क्यों फिसला?

रूस को इस रैंकिंग में तीसरा स्थान मिला है. रूस की नौसेना को कमजोर नहीं कहा जा सकता, लेकिन उसकी ताकत का स्वरूप अलग है. रूस के पास परमाणु हथियार ले जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां और आधुनिक न्यूक्लियर अटैक सबमरीन हैं. इसके जहाज जिरकॉन जैसी हाइपरसोनिक और कैलिबर क्रूज मिसाइलों से लैस हैं, जो दूर से ही लक्ष्य को निशाना बना सकती हैं.

फिर भी रूस चीन से पीछे इसलिए रह गया, क्योंकि उसका सतही जहाज बेड़ा सीमित है और नए युद्धपोतों की संख्या चीन जैसी तेजी से नहीं बढ़ रही है. WDMMW के मुताबिक रूस की ताकत ज्यादा जटिल और सबमरीन आधारित है, जबकि चीन की ताकत संतुलित और बड़े पैमाने पर फैली हुई है.

भारत टॉप-5 से बाहर क्यों?

इस रैंकिंग में भारत का टॉप-5 से बाहर होना कई लोगों के लिए चौंकाने वाला है. भारत की नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में बेहद अहम भूमिका निभाती है, लेकिन ट्रू वैल्यू रेटिंग में कुछ एशियाई देशों जैसे जापान, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया को भारत से ऊपर रखा गया है. इसका कारण उनके बेड़े का तेजी से आधुनिकीकरण, अत्याधुनिक डिस्ट्रॉयर और पनडुब्बियों की मौजूदगी बताई गई है.

यह भी पढ़ें: क्या है होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जिस पर निशाना साधकर दुनिया को घुटनों पर ला सकता है ईरान?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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