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America Iran Ceasefire Extended: दुनिया में पहली बार कब हुआ था सीजफायर, कौन-कौन से देशों ने रोकी थी जंग?

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच सीजफायर को बढ़ाया गया है. युद्धविराम का अर्थ आपसी समझौते से हिंसा रोकना है. इतिहास में 'क्रिसमस ट्रूस' सबसे चर्चित सीजफायर है, आइए जानें कि इस दौरान आखिर हुआ क्या था.

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  • ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ट्रम्प ने सीजफायर बढ़ाया.
  • पाकिस्तान के अनुरोध पर शांति वार्ता हेतु यह निर्णय.
  • प्रथम विश्व युद्ध में 1914 का 'क्रिसमस ट्रूस' प्रसिद्ध.
  • युद्धविराम हमेशा शांति संधि की गारंटी नहीं होता.

America Iran Ceasefire Extended: इतिहास के पन्नों में दर्ज युद्ध और संघर्ष की घटनाओं के बीच सीजफायर या युद्धविराम एक ऐसी कड़ी है, जो हिंसा की आग को कुछ पल के लिए शांत करने का प्रयास करती है. हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के दौरान ट्रंप द्वारा सीजफायर की अवधि को बढ़ाए जाने की खबर ने वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह निर्णय पाकिस्तान के विशेष अनुरोध पर लिया गया, ताकि शांति वार्ता के लिए गुंजाइश बनी रहे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि युद्ध को रोकने की यह परंपरा कब और कैसे शुरू हुई थी? यानि पहला सीजफायर कब हुआ था, चलिए जानें.

सीजफायर का कूटनीतिक अर्थ

युद्धविराम या जंगबंदी का सरल शब्दों में अर्थ है- युद्धरत पक्षों द्वारा आपसी रजामंदी से लड़ाई को रोक देना. यह प्रक्रिया अक्सर किसी बड़ी शांति संधि का शुरुआती हिस्सा होती है, लेकिन कई बार यह अनौपचारिक भी हो सकती है. जब कोई देश संघर्ष विराम का ऐलान करता है, तो उसका सीधा सा मतलब यह होता है कि उस अवधि में न तो कोई हवाई हमला किया जाएगा और न ही जमीनी स्तर पर कोई आक्रामक कार्रवाई होगी. यह समय आमतौर पर बातचीत का रास्ता खोलने या मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए उपयोग किया जाता है. सीजफायर स्थायी भी हो सकता है और अस्थायी भी, जो कि युद्ध की स्थिति और संबंधित देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है.

पहली बार कब हुआ सीजफायर?

दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और शुरुआती युद्धविरामों में से एक 'क्रिसमस ट्रूस' (Christmas Truce) है, जो दिसंबर 1914 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हुआ था. यह घटना इतिहास में दर्ज है क्योंकि यह दुनिया में पहली बार सीजफायर था. यह किसी सरकारी आदेश के बजाय सैनिकों की मानवीय संवेदनाओं से पैदा हुआ था. वेस्टर्न फ्रंट पर आमने-सामने की खाइयों में डटे जर्मन और ब्रिटिश सैनिकों ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर अघोषित रूप से युद्ध रोक दिया था. सैनिकों ने अपनी खाइयों में क्रिसमस ट्री सजाए और कैरल गाना शुरू किया. ब्रिटिश सैनिकों ने भी इसका जवाब सकारात्मक रूप से दिया और देखते ही देखते दुश्मन फौजों के बीच से गोलियों की आवाजें गायब हो गईं.

यह भी पढ़ें: Russia Iran Arms Supply: ईरान को किस रास्ते से हथियार भेजता है रूस? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ज्यादा सेना यहां हर पल रहती है तैनात

जब दुश्मन बन गए थे दोस्त

क्रिसमस ट्रूस के दौरान का नजारा किसी कल्पना से कम नहीं था. जहां कुछ घंटे पहले एक-दूसरे पर गोलियां चलाई जा रही थीं, वहीं अब सैनिक खाइयों से बाहर निकलकर एक-दूसरे से हाथ मिला रहे थे. उन्होंने न केवल एक-दूसरे को उपहार बांटे, बल्कि साथ मिलकर फुटबॉल भी खेला. यह घटना दर्शाती है कि युद्ध के मैदान में भी इंसानियत बची रह सकती है. यह युद्धविराम मुख्य रूप से जर्मनी और ब्रिटेन के बीच था, लेकिन इसके प्रभाव से फ्रांस के मोर्चे पर भी तनाव में कमी देखी गई थी. यह एक हफ्ते तक चला जश्न था, जहां इन देशों ने अपनी सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह ठप रखा था.

सीजफायर खत्म होने के बाद क्या हुआ?

क्रिसमस ट्रूस हालांकि मानवीय एकता का प्रतीक बना, लेकिन इसका सैन्य असर बहुत कम समय के लिए रहा. एक हफ्ते के शांतिपूर्ण माहौल के बाद युद्ध की विभीषिका फिर से शुरू हो गई. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हुई यह संधि बताती है कि सीजफायर हमेशा युद्ध के अंत की गारंटी नहीं होता है. यह केवल संघर्ष को रोकने का एक छोटा सा पड़ाव होता है. ईरान-अमेरिका के वर्तमान मामले में भी, सीजफायर का मकसद हिंसा को थामकर बातचीत के लिए एक सुरक्षित मंच तैयार करना है, ताकि स्थायी शांति का कोई रास्ता निकल सके.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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