एक्सप्लोरर

Nuclear Codes: कैसे काम करते हैं अमेरिका के न्यूक्लियर कोड्स, हमले से पहले इसका क्या होता है प्रोसीजर?

Nuclear Codes: अमेरिका के परमाणु कमांड सिस्टम को लेकर एक बार फिर से चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं. आइए जानते हैं क्या होते हैं परमाणु कोड्स और कैसे काम करते हैं ये.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • ईरान के साथ तनाव के बीच परमाणु कमांड सिस्टम पर चर्चा तेज़ हो गई है।
  • राष्ट्रपति के पास है परमाणु हमले का अंतिम आदेश देने का अधिकार।
  • राष्ट्रपति के साथ 'न्यूक्लियर फुटबॉल' और 'बिस्किट' ले जाते हैं अधिकारी।
  • कोड सत्यापन के बाद ही मिसाइल लॉन्च की जाती हैं, प्रक्रिया बहुत तेज़ है।

Nuclear Codes: बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच परमाणु कमांड सिस्टम को लेकर चर्चाएं एक बार फिर से शुरू हो गई हैं.  दरअसल ईरान के साथ चल रहे टकराव के बीच सीआईए के पूर्व अधिकारी लैरी जॉनसन ने एक बड़ा दावा किया है. जॉनसन ने कहा है कि व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में एक मीटिंग के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूक्लियर  कोड्स तक पहुंचाने की कोशिश की थी. हालांकि एक जनरल ने उन्हें रोक दिया. लेकिन इस बात की पुष्टि व्हाइट हाउस ने नहीं की है. इसी बीच एक बड़ा सवाल लोगों का ध्यान खींच रहा है. आखिर अमेरिका के न्यूक्लियर कोड्स असल में कैसे काम करते हैं और हमला करने से पहले क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है? आइए जानते हैं.

किसके पास है अंतिम अधिकार? 

संयुक्त राज्य अमेरिका में न्यूक्लियर हमला करने का आदेश देने की शक्ति पूरी तरह से राष्ट्रपति के पास होती है. कोई असल बटन नहीं होता, इसके बजाय एक व्यवस्थित और काफी सुरक्षित कमांड सिस्टम का पालन किया जाता है. हालांकि सैन्य सलाहकारों से परामर्श किया जाता है लेकिन आखिरी निर्णय पूरी तरह से राष्ट्रपति का ही होता है. 

क्या है न्यूक्लियर फुटबॉल? 

राष्ट्रपति के साथ एक अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाती है. इस अधिकारी के पास हमेशा एक काला ब्रीफकेस रहता है जिसे न्यूक्लियर फुटबॉल के नाम से जाना जाता है. हालांकि इस अधिकारी के बारे में किसी को ज्यादा जानकारी नहीं दी जाती है. इसमें इमरजेंसी युद्ध योजनाएं, सुरक्षित संचार उपकरण और एक गोपनीय ब्लैक बुक होती है. इस ब्लैक बुक में अलग-अलग न्यूक्लियर हमले के ऑप्शन की रूपरेखा दी गई होती है. इससे यह पक्का होता है कि राष्ट्रपति कहीं से भी और किसी भी समय कार्रवाई कर सकें. 

गोल्ड कोड्स वाला बिस्किट

राष्ट्रपति अपने साथ एक छोटा कार्ड भी रखते हैं जिसे बिस्किट कहा जाता है. इसमें गोल्ड कोड्स होते हैं. इन कोड्स का इस्तेमाल यह पक्का करने के लिए किया जाता है कि कोई भी न्यूक्लियर आदेश वास्तव में राष्ट्रपति की तरफ से ही आया है. इससे किसी भी तरह के दुरुपयोग या फिर नकली आदेश को रोका जा सकता है.

फैसले से पहले परामर्श 

आदेश जारी करने से पहले राष्ट्रपति आमतौर पर शीर्ष सैन्य अधिकारियों और सलाहकारों के साथ एक तत्काल परामर्श करते हैं. यह चर्चा अक्सर सिचुएशन रूम में की जाती है. यहां रणनीतिक और वैश्विक परिणामों का मूल्यांकन किया जाता है.

आदेश का प्रमाणीकरण 

एक बार जब फैसला ले लिया जाता है तो राष्ट्रपति को बिस्किट से सही कोड देकर पेंटागन के सामने अपनी पहचान की पुष्टि करनी होती है. इससे यह पक्का होता है कि यह आदेश राष्ट्रपति की तरफ से ही आ रहा है. 

मिसाइल लॉन्च इकाइयों तक पहुंचाया जाता है आदेश 

जैसे ही ऑथेंटिकेशन पूरा हो जाता है चुनी गई हमले की योजना को सैन्य कमांड चैनलों के जरिए यूनाइटेड स्टेट स्ट्रैटेजिक कमांड और फिर अलग-अलग स्थान पर तैनात मिसाइल लॉन्च इकाइयों तक पहुंचाया जाता है.

अंतिम वेरिफिकेशन और लॉन्च 

लॉन्च स्थल पर अधिकारी प्राप्त कोड्स का अपने खुद के सुरक्षित सिस्टम के साथ सत्यापन करते हैं. अगर सब कुछ मेल खाता है तो दो अधिकारियों को मिसाइल लॉन्च करने के लिए एक ही समय पर चाबियां घुमानी होती हैं. इससे यह पक्का होता है कि कोई एक व्यक्ति अकेले इस आदेश को पूरा न कर पाए. 

कितनी तेजी से किया जा सकता है न्यूक्लियर हमला?

यह पूरी प्रक्रिया काफी ज्यादा तेज होती है. जमीन से छोड़ी जाने वाली मिसाइलों के मामले में, आखिरी आदेश दिए जाने के लगभग 5 मिनट के अंदर मिसाइल लॉन्च की जा सकती है.

यह भी पढ़ें: इस देश ने बनाई थी हवाई जहाज के इंजन से चलने वाली ट्रेन, जानें क्यों कामयाब नहीं हुआ यह प्रयोग?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

Venezuela Earthquake: वेनेजुएला में किस धर्म के लोग रहते हैं सबसे ज्यादा, जानें यहां कितने मुस्लिम और कितने क्रिश्चियंस?
वेनेजुएला में किस धर्म के लोग रहते हैं सबसे ज्यादा, जानें यहां कितने मुस्लिम और कितने क्रिश्चियंस?
Venezuela Earthquake: क्या 'रिंग ऑफ फायर' की हलचल का हिस्सा है वेनेजुएला का भूकंप, जानें क्या है यह बला?
क्या 'रिंग ऑफ फायर' की हलचल का हिस्सा है वेनेजुएला का भूकंप, जानें क्या है यह बला?
Citizenship Proof: नागरिकता साबित करनी पड़ जाए तो कौन-कौन से डॉक्यूमेंट हो जाएंगे बेकार, जानें सबसे ज्यादा क्या आएगा काम?
नागरिकता साबित करनी पड़ जाए तो कौन-कौन से डॉक्यूमेंट हो जाएंगे बेकार, जानें सबसे ज्यादा क्या आएगा काम?
Venezuela Earthquak: भूकंप से कब-कब बुरी तरह कांप चुका वेनेजुएला, जानें कब हुई थी सबसे ज्यादा तबाही?
भूकंप से कब-कब बुरी तरह कांप चुका वेनेजुएला, जानें कब हुई थी सबसे ज्यादा तबाही?
Advertisement

वीडियोज

Carry On Jatta 4 की स्टारकास्ट ने दिल्ली में की मस्ती और शेयर की फिल्म की दिलचस्प बातें
Ram Mandir Donation Scam | Investigation | Ayodhya: SIT की Report में क्या है?
Ram Mandir Donation Theft | Janhit: राम मंदिर चंदा 'चंपत' करने वाले चंपत राय हैं?
Bilauti Mahapanchayat | Bharat Tiwari Encounter: एनकाउंटर फर्जी या असली? | Bihar | Samrat Chaudhary
Ram Mandir Donation Theft | Akhilesh Yadav | Sandeep Chaudhary: राम नाम की लूट, किसने दी छूट?
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
Indian Passport Ranking: भारत का पासपोर्ट कितना मजबूत, रैकिंग में किस नंबर पर, कहां है पाकिस्तान? जानें
भारत का पासपोर्ट कितना मजबूत, रैकिंग में किस नंबर पर, कहां है पाकिस्तान? जानें
'आधार, पासपोर्ट या वोटर ID नहीं, BJP का कार्ड...' नागरिकता के सबूत मुद्दे पर रोहिणी आचार्य का तंज
'आधार, पासपोर्ट या वोटर ID नहीं, BJP का कार्ड...' नागरिकता के सबूत मुद्दे पर रोहिणी आचार्य का तंज
Explained: पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं? विदेश मंत्रालय के बयान के मायने क्या, कैसे साबित होती सिटीजनशिप?
पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं? MEA के बयान के मायने क्या, कैसे साबित होती सिटीजनशिप?
ताश के पत्तों की तरह ढहा गोदाम, 8 की मौत... मलबे में दबी चीखों ने दहला दिया कोलकाता, PM ने किया मदद का ऐलान
ताश के पत्तों की तरह ढहा गोदाम, 8 की मौत... मलबे में दबी चीखों ने दहला दिया कोलकाता, PM ने किया मदद का ऐलान
104 डिग्री फीवर में अक्षय कुमार ने शूट किया था 'वेलकम टू द जंगल' का 'घिस घिस' सॉन्ग, अक्षरा सिंह का खुलासा, बोलीं- 'मैं ब्लैंक हो गई थी'
104 डिग्री फीवर में अक्षय ने शूट किया था 'वेलकम टू द जंगल' का गाना, अक्षरा सिंह का खुलासा
Viral Post: तेजस एक्सप्रेस में यात्री को परोसा दिया 'मक्खी वाला खाना', सोशल मीडिया पर वायरल हो गई तस्वीर
तेजस एक्सप्रेस में यात्री को परोसा दिया 'मक्खी वाला खाना', सोशल मीडिया पर वायरल हो गई तस्वीर
IND Vs IRE 2026: तो क्या वैभव सूर्यवंशी नहीं खेल पाएंगे अपना पहला डेब्यू मैच? ऐसी होगी टीम इंडिया की प्लेइंग 11, जानिए
तो क्या वैभव सूर्यवंशी नहीं खेल पाएंगे अपना पहला डेब्यू मैच? ऐसी होगी टीम इंडिया की प्लेइंग 11, जानिए
Fairness Cream: क्या सच में कोई काला शख्स गोरा हो सकता है? कई साल से दवा कंपनियां परोस रहीं आपको ये झूठ
क्या सच में कोई काला शख्स गोरा हो सकता है? कई साल से दवा कंपनियां परोस रहीं आपको ये झूठ
Embed widget