Arshdeep Singh Controversy: नस्लीय टिप्पणी करने पर कितनी होती है सजा, इसको लेकर क्या है कानून?
Arshdeep Singh Controversy: हाल ही में अर्शदीप सिंह की एक वीडियो वायरल हो रही है. इसमें वह तिलक वर्मा को अंधेरा कहते हुए नजर आ रहे हैं. आइए जानते हैं कि नस्लीय टिप्पणी करने पर कितनी सजा होती है.

- अर्शदीप सिंह का वीडियो वायरल, तिलक वर्मा पर कथित नस्लीय टिप्पणी
- नस्लीय टिप्पणी पर भारत में 6 माह से 5 साल सजा
- एससी/एसटी एक्ट के तहत भी हो सकती है कार्रवाई
- संविधान भी देता है नस्लीय भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा
Arshdeep Singh Controversy: अर्शदीप सिंह हाल ही में एक विवाद के केंद्र में आ गए हैं. दरअसल सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें कथित तौर पर उन्हें तिलक वर्मा के बारे में कुछ टिप्पणी करते हुए दिखाया गया है. उस वीडियो में अर्शदीप कथित तौर पर तिलक वर्मा को 'अंधेरे' शब्द का इस्तेमाल करते हुए संबोधित कर रहे हैं और मजाक में उन्हें सनस्क्रीन लगाने की भी सलाह दे रहे हैं. जहां कई यूजर्स ने इस बातचीत को मजाक मस्ती कहकर टाल दिया वहीं कई लोगों ने इसकी आलोचना करते हुए इसे एक नस्लीय टिप्पणी बताया. इसी बीच आइए जानते हैं कि नस्लीय टिप्पणी करने पर कितनी होती है सजा.
नस्लीय टिप्पणी का कानून
भारत में किसी व्यक्ति के खिलाफ नस्लीय, जाति आधारित या फिर भेदभावपूर्ण टिप्पणी करने पर गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. इसमें कारावास और आर्थिक जुर्माना शामिल है. भारतीय कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं जो जाति, नस्ल, जातीयता, धर्म या फिर क्षेत्रीय पहचान के आधार पर होने वाले अपमान या फिर तिरस्कार को रोकने के लिए बनाए गए हैं. टिप्पणी की प्रकृति और पीड़ित की पहचान के आधार पर खास कानून और सामान्य अपराधिक प्रावधान दोनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है. सजा के तौर पर 6 महीने से लेकर 5 साल तक का कारावास और साथ ही आर्थिक जुर्माना भी हो सकता है.
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एससी/एसटी एक्ट
जाति आधारित अपमान से निपटने वाले सबसे मजबूत कानूनों में से एक है अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम, 1989. इस अधिनियम की धारा 3(1) (r) के तहत किसी सार्वजनिक स्थल पर अनुसूचित जाति या फिर अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य का जानबूझकर अपमान करना या फिर उसे नीचा दिखाना एक आपराधिक अपराध माना जाता है. दोषी पाए जाने पर आरोपी को 6 महीने से लेकर 5 साल तक के कारावास और साथ ही जुर्माने की सजा हो सकती है.
हेट स्पीच से जुड़े कानून
एससी/एसटी एक्ट के अलावा भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत भी आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है. भारतीय न्याय संहिता की धारा 153A उन काम या फिर बयान से संबंधित है जो अलग-अलग समुदाय, नस्लों, धर्म या फिर भाषाई समूहों के बीच नफरत, दुश्मनी या फिर भेदभाव को बढ़ावा देते हैं. दोषी पाए जाने पर आरोपी को 3 साल तक की जेल, जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं.
नस्लवाद के खिलाफ कानूनों की मजबूती
बीते कुछ सालों में भारत में नस्लवाद विरोधी कानूनों को और भी मजबूत करने की मांग बढ़ी है. खासकर पूर्वोत्तर राज्यों के नागरिकों की सुरक्षा के लिए. उन्होंने अक्सर बड़े शहरों में नस्लीय भेदभाव का सामना करने की शिकायत की है.
संविधान की भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा की गारंटी देता है
भारतीय संविधान खुद नस्लीय और जातिगत भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा देता है. भारत के संविधान के अनुच्छेद 15 के तहत धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या फिर जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव करना माना है. यह संवैधानिक सुरक्षा देश भर में भेद-भाव विरोधी कानून की नींव बनाती है.
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Source: IOCL
























