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Plastic Banknotes: दुनिया के किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक के नोट, सबसे पहले किसने शुरू किया था?

Plastic Banknotes: भारतीय रिजर्व बैंक अब देश में पॉलीमर नोट लाने पर विचार कर रहा है. आइए जानते हैं कौन से देश पहले से ही पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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  • आरबीआई देश में कागजी नोटों की जगह प्लास्टिक के नोट लाएगा।
  • ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में द्विशताब्दी समारोहों में प्लास्टिक नोट शुरू किए।
  • न्यूजीलैंड, रोमानिया, कनाडा, ब्रुनेई, वियतनाम पूरी तरह पॉलीमर नोटों पर।
  • ब्रिटेन, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस आंशिक रूप से पॉलीमर नोटों का उपयोग करते हैं।

Plastic Banknotes: भारतीय रिजर्व बैंक देश में प्लास्टिक या फिर पॉलीमर के नोट लाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कागजी मुद्रा की छपाई की बढ़ती लागत और पारंपरिक नोटों की कम उम्र को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच पटना और मुंबई में हुई आरबीआई बोर्ड की हालिया बैठकों में इस प्रस्ताव पर चर्चा की गई. जैसे-जैसे भारत में पॉलीमर मुद्रा को लेकर चर्चा जोर पकड़ रही है कई लोग अब यह पूछ रहे हैं कि कौन से देश पहले से ही प्लास्टिक के नोट इस्तेमाल करते आ रहे हैं? आइए जानते हैं कि सबसे पहले इन्हें किसने शुरू किया था.

पॉलीमर मुद्रा के मामले में कौन सबसे आगे 

ऑस्ट्रेलिया में 1988 में देश के द्विशताब्दी समारोहों के दौरान प्लास्टिक के नोटों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था. यह तकनीक रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया और कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन ने मिलकर विकसित की थी. 

पॉलीमर नोट लाने का मुख्य मकसद नकली मुद्रा से निपटना और खराब मौसम की स्थिति में चलने वाले नोटों की उम्र बढ़ाना था. यह प्रयोग काफी ज्यादा सफल रहा और आखिरकार इसने दर्जनों देशों को ऐसी ही प्रणालियां अपनाने के लिए प्रेरित किया. आज ऑस्ट्रेलिया पूरी तरह से पॉलीमर नोटों पर चलता है. 

वे देश जिन्होंने पूरी तरह से प्लास्टिक के नोट अपना लिए 

कई देशों ने पारंपरिक कागजी नोटों को पूरी तरह से हटा दिया और अपनी मुद्रा प्रणालियों को पॉलीमर नोटों में बदल लिया है. न्यूजीलैंड ने 1999 तक अपनी कागजी मुद्रा को पूरी तरह से बदल दिया था और अब सभी मूल्य वर्गों में पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल करता है. रोमानिया 1999 में प्लास्टिक के नोट अपनाने वाला पहला यूरोपीय देश बना. इसी के साथ कनाडा ने 2013 तक पॉलीमर मुद्रा में अपना पूरा बदलाव कर लिया था. 

यह भी पढ़ेंः कागज की जगह प्लास्टिक के नोट, एक नोट छापने पर कितना खर्च होता है?

ब्रुनेई 2006 से खास तौर से पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल कर रहा है. वियतनाम भी अपने ज्यादातर मुद्रा मूल्य वर्ग प्लास्टिक के रूप में जारी करता है. 

वे देश जो आंशिक रूप से पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल करते हैं 

कई देश वर्तमान में मिश्रित प्रणालियां चलाते हैं. इनमें कागज और पॉलीमर दोनों तरह के नोट चलन में रहते हैं. ब्रिटेन ने 2016 में पॉलीमर पाउंड स्टर्लिंग नोट जारी करना शुरू किया. इसकी शुरुआत £5 के नोट से हुई और बाद में इसे £10, £20 और £50 जैसी बड़ी कीमतों वाले नोटों तक बढ़ाया है. 

सिंगापुर और मलेशिया जैसे देश भी कुछ खास कीमतों वाले नोट के लिए पॉलीमर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं. वहीं थाईलैंड और फिलिपींस ने हाल ही में प्लास्टिक करेंसी की तरफ अपना बदलाव तेज कर दिया है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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