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कभी इंसानों के सर्वाइवल के लिए बनाया गया था मेकअप, फिर कैसे बन गया खूबसूरती बढ़ाने का टूल?

आज के समय पर मेकअप ब्यूटी मेजर करने का एक तरीका बन गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हजारों साल पहले इसकी शुरुआत सर्वाइवल के मकसद से हुई थी. आइए जानते हैं इसके बारे में.

आजकल मार्केट में मेकअप के एक से एक ब्यूटी ब्रैंड्स आ गए हैं. सभी कंपनियां अपने नए-नए मेकअप प्रोडक्ट्स लॉन्च कर रही हैं. ऐसे में मार्केट में आज मेकअप फैशन का एक टूल बन चुका है. साथ ही, इसी मेकअप के जरिए ब्यूटी स्टैंडर्ड्स भी डिसाइड होने लगे हैं. 

क्या आप जानते हैं कि सबसे पहले मेकअप की शुरुआत कब और कहां हुई थी. दरअसल, मेकअप फैशन के बजाय सर्वाइवल के लिए बनाया गया था, लेकिन समय के साथ इसका इस्तेमाल बदल गया और यह आज मॉडर्न फैशन का टूल बनकर रह गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि कैसे हुई थी मेकअप की शुरुआत. 

कैसे हुई थी मेकअप की शुरुआत ?

पुराने समय में मेकअप अट्रैक्टिव दिखने या ब्यूटी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता था. इसके बजाय यह सर्वाइवल का तरीका था. अर्ली ह्यूमंस अपने चेहरे और शरीर पर नेचुरल पिग्मेंट्स जैसे- रेड क्ले, ऐश, डास्ट समेत कई चीजें लगाया करते थे. साथ ही, कुछ लोग अपनी आंखों के आसपास कलर का इस्तेमाल किया करते थे. ऐसा करने से उनकी आंखें सूरज की तेज रोशनी, इंसेक्ट्स और डस्ट से बची रहती थीं. साथ ही, ऐसा माना जाता था कि मेकअप से बुरी आत्माएं भी दूर रहती थीं. इसके अलावा कई बार चेहरे पर कलर का इस्तेमाल करना कई जगहों पर कल्चर और ट्रेडिशन का पार्ट भी था. उदाहरण के लिए इजिप्ट में यह प्रैक्टिस अपनी आइडेंटिटी को दिखाने के लिए की जाती थी, इससे ट्राइब्स के सोशल स्टेटस, रोल्स और एज के बारे में पता चलता था. 

कैसे बना फैशन टूल ?

धीरे-धीरे मेकअप का मीनिंग और इंपॉर्टेंस दोनों ही बदलते चले गए. डार्क एज में चर्च ने मेकअप को गलत कहकर बैन कर दिया था. फिर रेनेसां के समय पर क्वीन एलिजाबेथ ने इसका इस्तेमाल अपने चेहरे के दाग छिपाने के लिए किया था, लेकिन 20वीं शताब्दी की शुरुआत से हॉलीवुड ने मेकअप का मतलब ही बदल कर रख दिया और एक्ट्रेस इसका इस्तेमाल सुंदर दिखने के लिए करने लगीं. इसके बाद आम लोगों ने भी एक्ट्रेस जैसा दिखने के लिए मेकअप लगाना शुरू कर दिया और यह काफी कॉमन हो गया. धीरे-धीरे कंपनीज ने इसे कमर्शियलाइज कर दिया और एड्स के जरिए इसका प्रमोशन होने लगा. आज के समय पर मेकअप पूरी तरह से फैशन और ब्यूटी का पर्याय बन गया है.

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आंखों में सपने लिए, घर से हम चल तो दिए, जानें ये राहें अब ले जाएंगी कहां... कहने को तो ये सिंगर शान के गाने तन्हा दिल की शुरुआती लाइनें हैं, लेकिन दीपाली की जिंदगी पर बखूबी लागू होती हैं. पूरा नाम दीपाली बिष्ट, जो पहाड़ की खूबसूरत दुनिया से ताल्लुक रखती हैं. किसी जमाने में दीपाली के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ कंधे पर झोला टांगकर और हाथों में अखबार लेकर घूमने वाले लोग होते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी आंखों में इसी दुनिया का सितारा बनने के सपने पनपने लगे और वह भी पत्रकारिता की दुनिया में आ गईं. उन्होंने अपने इस सफर का पहला पड़ाव एबीपी न्यूज में डाला है, जहां वह ब्रेकिंग, जीके और यूटिलिटी के अलावा लाइफस्टाइल की खबरों से रोजाना रूबरू होती हैं. 

दिल्ली में स्कूलिंग करने वाली दीपाली ने 12वीं खत्म करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया और सत्यवती कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स में ग्रैजुएशन किया. ग्रैजुएशन के दौरान वह विश्वविद्यालय की डिबेटिंग सोसायटी का हिस्सा बनीं और अपनी काबिलियत दिखाते हुए कई डिबेट कॉम्पिटिशन में जीत हासिल की. 

साल 2024 में दीपाली की जिंदगी में नया मोड़ तब आया, जब उन्होंने गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (नोएडा) से टीवी जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा की डिग्री हासिल की. उस दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, एडिटिंग, कंटेंट राइटिंग, रिसर्च और एंकरिंग की बारीकियां सीखीं. कॉलेज खत्म करने के बाद वह एबीपी नेटवर्क में बतौर कॉपीराइटर इंटर्न पत्रकारिता की दुनिया को करीब से समझ रही हैं. 

घर-परिवार और जॉब की तेज रफ्तार जिंदगी में अपने लिए सुकून के पल ढूंढना दीपाली को बेहद पसंद है. इन पलों में वह पोएट्री लिखकर, उपन्यास पढ़कर और पुराने गाने सुनकर जिंदगी की रूमानियत को महसूस करती हैं. इसके अलावा अपनी मां के साथ मिलकर कोरियन सीरीज देखना उनका शगल है. मस्ती करने में माहिर दीपाली को घुमक्कड़ी का भी शौक है और वह आपको दिल्ली के रंग-बिरंगे बाजारों में शॉपिंग करती नजर आ सकती हैं.

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