Daughters rights in Pakistan: पाकिस्तान में शादीशुदा बेटियों को कैसे मिलती है पिता की प्रॉपर्टी, किस कानून के तहत होता है बंटवारा?
पाकिस्तान में महिलाओं के विरासत अधिकारों को कई कानूनी प्रावधानों के अनुसार मान्यता दी गई है. इसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लिकेशन एक्ट, मुस्लिम फैमिली लॉ ऑर्डिनेशन और दूसरे संबंधी कानून शामिल है.

Daughters rights in Pakistan: हमारे देश में 1956 के हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत बेटियों को पिता की संपत्ति में कोई अधिकार नहीं मिलता था. इस वजह से काफी समय तक बेटे और बेटी में अंतर बना रहा. हालांकि 2025 में इस कानून में बड़ा बदलाव किया गया, नए नियमों के तहत बेटियों को पिता की संपत्ति में बेटो के बराबर अधिकार दे दिया गया है. वहीं संपत्ति के अधिकार को लेकर भारत ही नहीं, बल्कि हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी अक्सर चर्चा चलती रहती है. कई लोग अक्सर यह सवाल उठाते हैं क्या भारत की तरह ही पाकिस्तान में भी बेटियों को अपने पिता की संपत्ति में बराबर का अधिकार मिलता है या नहीं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पाकिस्तान में शादीशुदा बेटियों को पिता की प्रॉपर्टी कैसे मिलती है और किस कानून के तहत वहां बंटवारा होता है.
पाकिस्तान में भी महिलाओं को संपत्ति का अधिकार
पाकिस्तान में महिलाओं के विरासत अधिकारों को कई कानूनी प्रावधानों के अनुसार मान्यता दी गई है. इसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लिकेशन एक्ट, मुस्लिम फैमिली लॉ ऑर्डिनेशन और दूसरे संबंधी कानून शामिल है. इन कानूनों के अनुसार महिलाओं को चल और अचल दोनों प्रकार की संपत्ति में हिस्सा मिलने का अधिकार है. इसके अलावा 2011 में लागू किए गए, एंटी वीमेन प्रैक्टिसेज कानून के तहत किसी महिला को धोके या अवैध तरीके से विरासत से वंचित करना अपराध माना गया है.
पाकिस्तान में शादीशुदा बेटी को कितना मिलता है हिस्सा
पाकिस्तान में संपत्ति का बंटवारा इस्लामी उत्तराधिकारी नियमों के आधार पर किया जाता है. अगर किसी परिवार में बेटे और बेटियां दोनों है, तो बेटी को बेटे के हिस्से का आधा हिस्सा मिलता है. उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति के दो बेटे और एक बेटी है तो संपत्ति को पांच हिस्सों में बांटा जाएगा. दोनों बेटों को दो-दो हिस्से और बेटी को एक हिस्सा मिलेगा. अगर बेटी इकलौता संतान है और कोई बेटा नहीं है तो उसे संपत्ति का बड़ा हिस्सा मिल सकता है.
अगर केवल बेटी ही वारिस हो तो क्या होगा?
अगर किसी परिवार में केवल बेटी ही वारिस हो और कोई बेटा न हो तो ऐसी स्थिति में जहां अगर पिता की मृत्यु हो गई है, तो वहां पत्नी का हिस्सा निकालने के बाद बची हुई संपत्ति का एक बड़ा भाग बेटी को दिया जाता है. बाकी हिस्सा दूसरे पुरुष रिश्तेदारों जैसे भाई, चाचा या चचेरे भाइयों को मिल सकता है. यह बंटवारा भी शरीयत के नियमों के अनुसार किया जाता है.
मां और पत्नी के अधिकार भी सुरक्षित
पाकिस्तान में उत्तराधिकार कानून केवल बेटियों तक सीमित नहीं है. मृतक की पत्नी और मां को भी निश्चित हिस्सा दिया जाता है. अगर मृतक की संतान है तो पत्नी को आमतौर पर कुल संपत्ति का आठवां हिस्सा मिलता है. वहीं मां को परिस्थितियों के अनुसार एक छठा या एक तिहाई हिस्सा मिल सकता है. इसके बाद बची हुई दूसरी संपत्ति कानूनी वारिसों में बांटी जाती है.
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