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Indian surnames: कहां से आया शर्मा-मिश्रा और पांडेय सरनेम, जानिए क्या है इन टाइटल का इतिहास

Indian Surnames: भारत में कई तरह के सरनेम पाए जाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन सरनेम का इतिहास क्या है. चलिए आपको बताते हैं इसके बारे में...

Indian Surnames: भारत में सरनेम सिर्फ एक पहचान नहीं हैं बल्कि इतिहास, संस्कृति और परंपरा का भी हिस्सा हैं. हर भारतीय सरनेम के पीछे कोई ना कोई कहानी जरूर जुड़ी हुई है. आज हम बात करने जा रहे हैं की कैसे भारत में सरनेम सिस्टम की उत्पत्ति हुई और क्या रहा इनका इतिहास. 

भारत में सरनेम सिस्टम की उत्पत्ति 

भारत में सरनेम सिस्टम की जड़े वैदिक काल तक फैली हुई हैं. इस युग में वेदों का अध्ययन और संरक्षण समाज का मुख्य आधार था. लोगों को उनके ज्ञान, काम, विशेषता और सामाजिक भूमिका के आधार पर उपाधियां दी जाती थी. यही उपाधियां धीरे-धीरे आज के सरनेम में बदल चुकी हैं. ये नाम सिर्फ लेबल नहीं थे बल्कि हर व्यक्ति की बौद्धिक और सामाजिक स्थिति को दर्शाते थे.

पांडे सरनेम का इतिहास 

यह सरनेम संस्कृत शब्द पंडित या पंडिता से आया है. इसका मतलब होता है ज्ञानी व्यक्ति. पांडे वेदों, शास्त्रों और दर्शन में काफी ज्यादा विद्वान थे. वे शिक्षक, विशेष सलाहकार और बौद्धिक मार्गदर्शक के रूप में काम करते थे और अपने ज्ञान और बुद्धि के लिए उन्हें काफी ज्यादा सम्मान दिया जाता था.

शर्मा सरनेम का इतिहास 

शर्मा सरनेम संस्कृत शब्द सरमन से आया है. इसका मतलब होता है खुशी या फिर शांति देना. शर्मा अक्सर धार्मिक अनुष्ठानों, सामुदायिक कल्याण और सामाजिक मार्गदर्शन में शामिल रहते थे. वे हमेशा शांति, समृद्धि और समाज सेवा के मूल्यों को दर्शाते हैं.

मिश्रा सरनेम का इतिहास 

यह सरनेम मिश्रण शब्द से आया है. इसका मतलब है ज्ञान का मिश्रण. मिश्रा सिर्फ वेदों के अध्ययन तक सीमित नहीं थे वे ज्योतिष, आयुर्वेद और बाकी विज्ञान में भी कुशल थे.

बाकी सरनेम जो वेदों की जानकारी दर्शाते हैं 

कुछ और सरनेम भी है जो वेदों की जानकारी को दर्शाते हैं. जैसे द्विवेदी/दूबे उन्हें कहा जाता था जिन्हें दो वेदों (ऋग्वेद और यजुर्वेद) की जानकारी थी. त्रिपाठी उन्हें कहा जाता था जिन्हें तीन वेदों की जानकारी थी. इसी के साथ चतुर्वेदी/चौबे उन्हें कहा जाता था जिन्हें चारों वेदों की जानकारी थी. भारतीय सरनेम अतीत की वो खिड़कियां है जहां शिक्षा, परंपरा और सामाजिक दायित्वों का मिश्रण दिखाई देता है. पांडे, शर्मा, मिश्रा और द्विवेदी जैसे नाम सिर्फ पहचान ही नहीं हैं, बल्कि वे ऐसी सभ्यता के प्रमाण हैं जिन्होंने ज्ञान, शिक्षा और नैतिक कार्यों को महत्व दिया. इन सरनेम को समझने के बाद हमें पता चलता है कि हमारे पूर्वजों की बौद्धिक और सांस्कृतिक समृद्धि कैसी थी. इसी के साथ हमें यह भी पता चलता है की हर नाम में कितनी गहरी ऐतिहासिक जड़ें बनी हुई हैं.

ये भी पढ़ें:- पाकिस्तान के हिस्से में चली गई थीं गांधी जी की कौन-कौन सी चीजें, अब उनका कैसा है हाल?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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