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सेना की वर्दी में डियोड्रेंट और परफ्यूम नहीं लगा सकेंगे जवान, जानें Indian Army ने इस पर क्यों लगाई रोक?

देश की सुरक्षा प्रणाली को और अधिक चाक-चौबंद बनाने के लिए सैन्य प्रशासन ने सेना की वर्दी में कई बड़े बदलाव किए हैं, जिसमें से एक है वर्दी पर परफ्यूम नहीं लगाना. आइए जानें कि इस पर रोक क्यों लगाई गई.

देश की सीमाओं की रक्षा करने वाली भारतीय सेना ने अपनी दशकों पुरानी परंपरा और अनुशासन को और अधिक मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. सेना ने अपनी ग्रूमिंग और ड्रेस कोड से जुड़े नियमों में बहुत बड़ा बदलाव किया है, जिसके तहत अब सैनिक अपनी वर्दी पर किसी भी तरह का परफ्यूम या डियोड्रेंट नहीं लगा सकेंगे. इस फैसले का मकसद सिर्फ दिखावे को कम करना नहीं है, बल्कि इसके पीछे जवानों की सुरक्षा और रणनीतिक गोपनीयता से जुड़े कई बेहद गंभीर कारण छिपे हुए हैं. आइए जानते हैं कि आखिर सेना को यह कड़ा फैसला क्यों लेना पड़ा.

नई नियमावली में बड़ा बदलाव

भारतीय सेना ने हाल ही में 'आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026' नाम से एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की है. कुल 174 पन्नों की इस नई नियमावली में सैनिकों के रहन-सहन और साज-सज्जा को लेकर बहुत ही स्पष्ट और कड़े नियम बनाए गए हैं. इस नए नियम के तहत जवानों की वर्दी पर डियोड्रेंट और परफ्यूम छिड़कने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है. हालांकि दैनिक स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए जवानों को शेविंग के बाद इस्तेमाल होने वाले सामान्य आफ्टर-शेव लोशन का उपयोग करने की अनुमति दी गई है.

सेना की वर्दी पर परफ्यूम लगाने की मनाही क्यों?

युद्ध के मैदान या दुर्गम इलाकों में गश्त के दौरान सैनिकों के लिए सबसे जरूरी चीज अपनी मौजूदगी को पूरी तरह गुप्त रखना होता है. अगर कोई जवान तेज खुशबू वाला परफ्यूम या डियोड्रेंट लगाता है, तो उसकी गंध हवा के जरिए दूर तक फैल सकती है. फील्ड ट्रेनिंग या जंग के दौरान दुश्मन इस तेज खुशबू की मदद से सैनिकों की लोकेशन का आसानी से अंदाजा लगा सकता है. यह रणनीतिक चूक किसी भी ऑपरेशन के दौरान जवानों के लिए बेहद जानलेवा और खतरनाक साबित हो सकती है.

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प्राकृतिक छलावरण की जरूरत

जंगलों, पहाड़ों या सीमा के संवेदनशील इलाकों में दुश्मनों की नजरों से बचने के लिए सैनिक 'कैमोफ्लाज' यानी प्राकृतिक छलावरण का सहारा लेते हैं. इसके तहत वे आसपास के माहौल और पेड़-पौधों के रंग में खुद को इस तरह ढाल लेते हैं कि उन्हें देख पाना नामुमकिन हो जाता है. लेकिन इस छलावरण को पूरी तरह कामयाब बनाने के लिए सैनिक का पूरी तरह गंधहीन रहना भी बेहद जरूरी है. परफ्यूम जैसी कृत्रिम सुगंध इस पूरी प्राकृतिक गोपनीयता को पल भर में भंग कर सकती है.

सादगी और सख्त अनुशासन

भारतीय सेना अपनी बेजोड़ एकरूपता, सादगी और कड़े अनुशासन के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है. सेना की वर्दी केवल एक कपड़ा नहीं बल्कि देश के प्रति समर्पण का प्रतीक है. सेना के भीतर किसी भी तरह के आधुनिक सौंदर्य प्रसाधनों और तेज खुशबू वाले शौकिया उत्पादों के इस्तेमाल को अनुशासन के खिलाफ माना जाता है. सभी जवानों के बीच एक समान सादगी और भाईचारे की भावना को बनाए रखने के लिए ही इस तरह के कॉस्मेटिक उत्पादों पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है.

स्वास्थ्य और आपसी संवेदनशीलता

सैनिकों को अक्सर बंकरों, तंग कमरों या बेहद सीमित जगहों पर एक साथ मिलकर लंबे समय तक काम करना पड़ता है. बंद जगहों पर किसी एक जवान द्वारा इस्तेमाल की गई बहुत तेज खुशबू बाकी साथियों के लिए सिरदर्द या परेशानी का सबब बन सकती है. इस तरह की तेज कृत्रिम गंध के कारण कुछ सैनिकों को सांस लेने में अचानक तकलीफ, घुटन या एलर्जी जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. इसीलिए आपसी तालमेल और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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