क्या बिना जंग के पीओके को वापस नहीं ले सकता भारत, आखिर कहां अटका है पेच?
Pakistan Occupied Kashmir: भारत और पाकिस्तान के बीच पीओके का मुद्दा हमेशा से गूंजता है. लेकिन क्या आपको पता है कि पीओके को भारत वापस कैसे ले सकता है. क्या यह बिना जंग के मुमकिन है.

Pakistan Occupied Kashmir: भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने पूरे चरम पर है. 8 मई की देर रात पाकिस्तान ने भारत के राजस्थान, पंजाब और जम्मू कश्मीर के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया, जिसका भारत न सिर्फ उसे मुंहतोड़ जवाब दिया, बल्कि पाकिस्तान के कई शहरों पर हमला भी किया है. जिससे पड़ोसी मुल्क की हालत पस्त हो चुकी है और इस वक्त उसके गिड़गिड़ाने वाले हालात हैं. भारत की जल, थल और वायुसेना तीनों दुश्मन को सबक सिखाने में जुटी हुई हैं. इसी बीच सभी देशवासियों का एक सुर में कहना है कि अब तो पीओके को हथियाकर उसे अपने में मिलाने का वक्त आ चुका है. पीओके भारत का हिस्सा है, जिसको पाकिस्तान जबरन अपना बताता आया है. आइए जानें कि आखिर पीओके को बिना जंग के वापस क्यों नहीं लिया जा सकता है.
कितने हिस्से में बंटा है पीओके
सबसे पहले तो पीओके के बारे में जान लेते हैं. पीओके दो हिस्सों में बंटा हुआ है. इसका एक हिस्सा गिलगिट और बाल्टिस्तान के तौर पर जाना जाता है. जो कि 64,817 किमी. स्क्वायर क्षेत्र में फैला हुआ है. दूसरा हिस्सा पीओके का है जो कि 13,297 किमी. स्क्वायर में फैला है. जब देश आजाद नहीं हुआ था, उस वक्त जम्मू कश्मी के राजा हरि सिंह हुआ करते थे. ज्यादा टैक्स के चलते मुस्लिम उनका विरोध करने लगे थे. उस वक्त वहां राजा-प्रजा दोनों पक्षों में अंतर्विरोध का बड़ा आधार बने थे. 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो पाकिस्तानियों को लगता था कि कश्मीर उनका है.
कैसे पाकिस्तानियों ने पीओके पर किया कब्जा
यही वजह थी कि पश्तूनी कश्मीर में घुस आए तो राजा हरि सिंह घबराकर सरदार पटेल के पास पहुंचे. सरदार पटेल ने कहा कि हमसे मिल जाइए, हम सेना को भेजकर पाकिस्तानियों को खदेड़ देंगे. इस प्रस्ताव के बाद राजा हरि सिंह ने इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन एग्रीमेंट साइन किया था. तब भारत की सेना पाकिस्तान के लोगों को जम्मू-कश्मीर के बॉर्डर तक निकाल पाई थी. तब तक पंडित जवारहर लाल नेहरू यूएन के पास पहुंच गए थे. वहां एक प्रस्ताव पारित हुआ था, जिसमें कहा गया कि जो जहां है वहीं पर रुक जाए. पाकिस्तान तो इस पर राजी हो गया था, लेकिन भारत ने शर्त रखी कि जब तक पाकिस्तानी भारत की सरजमीं छोड़ नहीं देते तब तक लोगों से कोई राय नहीं ली जाएगी.
बिना जंग के पीओके को वापस नहीं ले सकता भारत
भारत पीओके को सीधा वापस नहीं ले सकता है, क्योंकि यह एक जटिल अंतरराष्ट्रीय विवाद है, जिसे सिर्फ बल के जरिए हल नहीं किया जाता सकता है. पीओके भारत का अभिन्न अंग है, लेकिन पाकिस्तान इसे अपने कंट्रोल में रखता है. पीओके वापस लेने के लिए युद्ध ही एक अंतिम रास्ता है, लेकिन इससे दोनों देशों का आर्थिक और सामाजिक नुकसान होगा. पीओके के मुद्दे में संयुक्त राष्ट्र एक मध्यस्थ की भूमिका निभाता है.
युद्ध अंतिम रास्ता
संयुक्त राष्ट्र ने कई बार भारत और पाकिस्तान के बीच इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की है, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है. पीओके पर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है, इसलिए इसे वापस लेने का अंतिम रास्ता युद्ध है. बिना जंग के पीओके को तभी वापस लिया जा सकता है, जब खुद पाकिस्तान इसे वापस कर दे और पाकिस्तान ऐसा कभी नहीं करेगा. इसलिए युद्ध ही अंतिम रास्ता है.
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Source: IOCL























