कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन के निधन पर आज भारत में राष्ट्रीय शोक, इसमें क्या-क्या नहीं कर सकते?
Hamad bin Khalifa Al Thani Death: कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत ने देश में एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है. इस दौरान तिरंगा आधा झुका रहता है. चलिए जानें कि इस दिन और कौन-कौन से काम नहीं होते हैं.

भारत और कतर के प्रगाढ़ रिश्तों की एक और बानगी देखने को मिली है. कतर के पूर्व अमीर फादर अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन के दुख में भारत सरकार ने एक दिन के राष्ट्रीय शोक का एलान किया है. पीएम मोदी ने इस दुखद घड़ी में दिवंगत नेता को याद करके गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं. इस घोषणा के बाद लोगों में मन में यह जिज्ञासा है कि आखिर इस दिन देश में किन नियमों का पालन किया जाता है और क्या-क्या नहीं कर सकते हैं.
क्या होता है राष्ट्रीय शोक और तिरंगे का नियम
जब भी सरकार किसी बड़े विदेशी नेता या देश की महान हस्ती के सम्मान में राष्ट्रीय शोक घोषित करती है, तो प्रोटोकॉल के तहत सबसे बड़ा बदलाव राष्ट्रध्वज को लेकर होता है. देश के अंदर जितनी भी सरकारी इमारतें, सचिवालय, कोर्ट और सार्वजनिक भवन हैं, जहां पर हर रोज नियम से तिरंगा फहराया जाता है, वहां आज के दिन राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुका दिया जाता है. यह नियम सिर्फ देश की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रहता है, बल्कि विदेशों में स्थित तमाम भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों में भी राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक आधा झुकाकर रखा जाता है, जो कि हमारे गहरे दुख को दर्शाता है.
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सरकारी कार्यक्रमों और मनोरंजन पर पाबंदी
राष्ट्रीय शोक का सीधा मतलब होता है कि देश इस समय आधिकारिक रूप से गहरे दुख में है, इसलिए इस दौरान किसी भी तरह की खुशी या जश्न का माहौल सरकारी स्तर पर नहीं बनाया जाता है. आज के दिन केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा आयोजित होने वाले तमाम आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रमों, सांस्कृति उत्सवों और संगीत से जुड़े जलसों पर पूरी तरह से पाबंदी लगी रहती है. मंत्रियों या बड़े अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले किसी भी नई योजना के औपचारिक उद्धाटन, शिलान्यास या फीता काटने जैसे समारोहों को या तो रद्द कर दिया जाता है, या फिर आगे के लिए टाल दिया जाता है.
राष्ट्रीय शोक के बाद भी किन मौकों पर नहीं झुकता तिरंगा?
भारत के फ्लैग कोड और प्रोटोकॉल में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण दिन तय किए गए हैं, जिनमें राष्ट्रीय शोक होने के बाद भी तिरंगे की आन-बान-शान में कोई बदलाव नहीं किया जाता है. हमारे तीन सबसे प्रमुख राष्ट्रीय पर्व- स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और गांधी जयंती के दिन देश का गौरव यानी तिरंगा कभी भी आधा झुकाया नहीं जाता है, भले ही उस दिन राष्ट्रीय शोक क्यों न चल रहा हो. इन खास दिनों पर राष्ट्रीय उल्लास और देश की संप्रभुता को हर चीज से ऊपर रखा जाता है.
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