जब बंटवारे के तुरंत बाद ही पाकिस्तान ने दिखा दी थी औकात, फिर ऐसे दिया था भारत ने जवाब
Independence day 2025: 1947 में आजादी के साथ ही भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ. अभी बंटवारे का दर्द खत्म भी नहीं हुआ था कि पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर दिया. भारत ने पाक को जवाब दिया था.

Independence day 2025: 1947 में जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो दोनों देश अपने-अपने तरीके से खुद को स्थापित करने की दिशा में काम शुरू ही कर रहे थे कि तभी जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ रहने को लेकर औपचारिक विलय पर हस्ताक्षर किए थे. बस यही भारत और पाकिस्तान के बीच पहले युद्ध का तत्कालिक कारण बन गया. चलिए जानें कि जब बंटवारे के बाद पाकिस्तान ने औकात दिखाई तो भारत ने कैसे जवाब दिया था.
कब छिड़ा भारत-पाक का पहला युद्ध
1947-48 में पाकिस्तान की पश्चिमोत्तर सीमांत से आए कबायली लड़ाकों और अनियमित बलों ने कश्मीर में घुसपैठ की, जिससे भारत और पाकिस्तान के बीच पहला युद्ध छिड़ा. भारत ने वायुसेना से सैनिक भेजकर श्रीनगर की रक्षा की और विभिन्न मोर्चों पर लड़ाई लड़ी. अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान की पश्चिमोत्तर सीमांत से आए कबायली लड़ाकों और पाकिस्तानी अनियमित बलों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया.
उनका मकसद यह था कि वे कश्मीर को बलपूर्वक पाकिस्तान में मिला लें, यही घुसपैठ भारत-पाकिस्तान के पहले युद्ध का कारण बनी.
कैसे हुई युद्ध की शुरुआत
22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान के कबायली बारामूला और मुजफ्फराबाद के रास्ते कश्मीर में जबरन घुसे चले आए. वो इतनी तेजी से आगे बढ़ रहे थे कि उनके हमलों को रोकना मुश्किल हो गया था. तब जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी. 26 अक्टूबर 1947 को उन्होंने भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए और इसी के बाद से भारत ने पाकिस्तान को उसकी औकात याद दिला दी.
कितनी मजबूती से भारत ने दिया जवाब
27 अक्टूबर 1947 को भारतीय वायुसेना ने श्रीनगर एयरपोर्ट पर पहली बार बड़े पैमाने पर अपने जवान उतारे. इसके बाद भारतीय सेना ने श्रीनगर, बारामूला और महत्वपूर्ण पहाड़ी दर्रों को बचाते हुए बेहतरीन तरीके से लड़ाई लड़ी और घुसपैठियों को उनके देश में खदेड़ दिया. यह युद्ध इतना आसान नहीं था, ऊंची चोटियां, ठंडा मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों ने इसे और चुनौतीपूर्ण बना दिया था.
युद्ध का अंत और क्या रहा नतीजा
लगातार जारी संघर्ष के बाद संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की और 1 जनवरी 1949 को युद्धविराम लागू हो गया. लेकिन इस युद्ध का परिणाम अच्छा नहीं रहा. इस वजह से कश्मीर दो हिस्सों में बंट गया, भारत के पास जम्मू, कश्मीर घाटी और लद्दाख का बड़ा हिस्सा, जबकि पाकिस्तान के पास आजाद जम्मू-कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान रहा.
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Source: IOCL























