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किन देशों में तैनात हैं भारतीय सैनिक, जानें किस लिए भारत ने भेजे अपने सोल्जर्स?

भारतीय सेना आज केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई अशांत देशों में शांति स्थापना के लिए मोर्चा संभाले हुए है. लेबनान समेत दुनिया के कई देश हैं, जहां पर भारतीय सैनिक तैनात हैं.

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  • भारतीय सैनिक संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
  • लेबनान, कांगो, दक्षिण सूडान में शांति व सुरक्षा स्थापित कर रहे हैं.
  • गोलन हाइट्स पर कड़ी निगरानी तथा सामरिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं.
  • दुनिया भर में भारत का सैन्य प्रभाव बढ़ रहा है.

पूरी दुनिया में जब भी शांति और सुरक्षा की बात आती है, तो भारतीय सैनिकों का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है. अपनी बहादुरी और अनुशासन के दम पर भारतीय सेना न केवल देश की सरहदों की रक्षा कर रही है, बल्कि सात समंदर पार भी अशांत इलाकों में शांति का झंडा बुलंद कर रही है. खतरनाक जंग के मैदान हों या गृहयुद्ध से जूझते देश, भारतीय जांबाज हर जगह अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं. आइए जानते हैं आखिर किन देशों में और क्यों तैनात हैं हमारे सैनिक.

शांति के दूत बने भारतीय सैनिक

भारत की विदेश नीति हमेशा से वैश्विक शांति की समर्थक रही है. यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति मिशनों में भारत सबसे ज्यादा सैनिक भेजने वाले देशों में शामिल है. भारतीय सैनिक उन इलाकों में तैनात किए जाते हैं जहां हिंसा चरम पर होती है या दो देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी रहती है. इन मिशनों का मुख्य उद्देश्य युद्धविराम को लागू करवाना, स्थानीय नागरिकों को उग्रवादियों से बचाना और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में दोबारा जीवन को सामान्य बनाना है. भारतीय सेना की यह मौजूदगी भारत के वैश्विक कद और उसकी सैन्य क्षमताओं का लोहा मनवाती है.

लेबनान की आग में शांति की कोशिश

लेबनान में इस वक्त इजरायल लोगों को निशाना बना रहा है. ऐसे समय में वहां पर भारतीय सैनिकों की भूमिका बेहद चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील है. यहां इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लगातार तनाव बना रहता है. यूएन मिशन (UNIFIL) के तहत भारत ने यहां लगभग 600 सैनिकों की एक बड़ी टुकड़ी तैनात की है. इन सैनिकों का काम सीमा पर होने वाली किसी भी घुसपैठ या हमले को रोकना और दोनों पक्षों के बीच बफर जोन के तौर पर काम करना है. लेबनान की पहाड़ियों में तैनात ये जांबाज अपनी जान जोखिम में डालकर मध्य पूर्व में एक बड़े युद्ध को टालने में मदद कर रहे हैं.

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कांगो के जंगलों में उग्रवाद से मुकाबला

अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) पिछले कई दशकों से आंतरिक संघर्ष और विद्रोही समूहों की हिंसा से जूझ रहा है. साल 2005 से ही भारतीय सैनिक यहां शांति मिशन (MONUSCO) का हिस्सा हैं. कांगो के घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में विद्रोही समूह अक्सर गांवों पर हमला करते हैं. भारतीय बटालियन यहां न केवल इन विद्रोहियों को पीछे धकेलती है, बल्कि वहां की सरकार को स्थिरता बनाए रखने में भी मदद करती है. यहां भारतीय सैनिकों के अनुशासन और उनके मानवीय कार्यों की स्थानीय स्तर पर काफी प्रशंसा होती है.

दक्षिण सूडान में नागरिकों की ढाल

दक्षिण सूडान दुनिया के सबसे नए देशों में से एक है, लेकिन यह लंबे समय से जातीय संघर्ष और गृहयुद्ध की चपेट में रहा है. संयुक्त राष्ट्र के मिशन (UNMISS) के तहत भारतीय सैनिक यहां तैनात हैं. इनका प्राथमिक लक्ष्य निर्दोष नागरिकों की जान बचाना और राहत सामग्री पहुंचाने वाले रास्तों को सुरक्षित रखना है. आपसी संघर्ष के कारण यहां लाखों लोग विस्थापित हुए हैं. ऐसे में भारतीय सेना की मौजूदगी इन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनी हुई है. दक्षिण सूडान में भारतीय डॉक्टरों और इंजीनियरों वाली सैन्य इकाइयां भी बुनियादी सुविधाएं बहाल करने में जुटी हैं.

गोलन हाइट्स पर कड़ी निगरानी

सीरिया और इजरायल के बीच विवादित क्षेत्र 'गोलन हाइट्स' सामरिक दृष्टि से दुनिया के सबसे गर्म इलाकों में से एक है. यहां शांति बनाए रखने के लिए तैनात यूएन फोर्स (UNDOF) में भारतीय सैनिक शामिल हैं. इनका मुख्य काम दोनों देशों के बीच हुए समझौते का पालन करवाना और लॉजिस्टिक्स सुरक्षा सुनिश्चित करना है. यह क्षेत्र इतना संवेदनशील है कि यहां छोटी सी चूक भी अंतरराष्ट्रीय संकट पैदा कर सकती है. भारतीय सैनिक अपनी सूझबूझ और सतर्कता से यहां पिछले कई वर्षों से स्थिति को नियंत्रण में रखे हुए हैं. 

रणनीतिक मोर्चों पर डिफेंस अताशे की तैनाती

शांति मिशनों के अलावा भारत ने आर्मेनिया जैसे देशों के साथ अपने रणनीतिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए वहां 'डिफेंस अताशे' यानी रक्षा अधिकारी तैनात किए हैं. आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच बढ़ते तनाव और भारत के साथ रक्षा सौदों के चलते यह तैनाती बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इसके अलावा तंजानिया, मोजांबिक, आइवरी कोस्ट, इथोपिया और फिलीपींस जैसे देशों में भी भारत की सैन्य मौजूदगी अलग-अलग रूपों में है. फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस मिसाइल जैसे रक्षा समझौतों ने वहां भारतीय विशेषज्ञों की भूमिका को और बढ़ा दिया है.

दुनिया भर में बढ़ता भारत का सैन्य प्रभाव

आज भारतीय सैनिक पोलैंड, जिबूती और आर्मेनिया जैसे देशों में भी विशिष्ट भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं. चाहे वह मानवीय सहायता पहुंचाना हो या मित्र देशों की सेना को ट्रेनिंग देना, भारतीय सेना का विस्तार लगातार हो रहा है. जिबूती और मोजांबिक जैसे समुद्री देशों में भारत की नजरें समुद्री सुरक्षा और पायरेसी (समुद्री डकैती) को रोकने पर हैं. यह वैश्विक स्तर पर भारत की 'सॉफ्ट पावर' और 'हार्ड पावर' के बेहतरीन संतुलन को दर्शाता है. भारतीय सैनिक आज सिर्फ सीमा की रक्षा नहीं कर रहे, बल्कि वैश्विक सुरक्षा ढांचे की रीढ़ बन चुके हैं.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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