सूरज की रोशनी चली जाए तो कितनी देर में धरती पर अंधेरा छाएगा? जानें यहां
Sunlight Disappears: अगर सूरज अचानक से गायब हो जाए तो क्या होगा? आइए जानते हैं क्या कहता है स्पेस साइंस.

- तापमान गिरेगा, पौधे मरेंगे, जीवन बेहद मुश्किल होगा।
Sunlight Disappears: अगर सूरज गायब हो जाए तो क्या होगा? क्या धरती पर तुरंत अंधेरा छा जाएगा फिर कुछ समय तक सूरज की रोशनी आती रहेगी? हैरानी की बात है कि अगर सूरज अचानक गायब हो जाए तो भी धरती पर लोगों को लगभग 8 मिनट में 20 सेकंड तक सूरज की रोशनी दिखाई देती रहेगी. ऐसा इसलिए क्योंकि सूरज की रोशनी को सूरज से धरती तक पहुंचने में समय लगता है. यह देरी दोनों के बीच की काफी ज्यादा दूरी और अंतरिक्ष में रोशनी के सीमित रफ्तार की वजह से होती है.
अंधेरा छाने में 8 मिनट 20 सेकंड क्यों लगेंगे?
सूरज और धरती के बीच की औसत दूरी लगभग 15 करोड़ किलोमीटर है. रोशनी अंतरिक्ष में लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से यात्रा करती है. इतनी तेज रफ्तार के बावजूद सूरज की रोशनी को सूरज से धरती तक पहुंचने में लगभग 8 मिनट 20 सेकंड लगते हैं.
इसका मतलब यह है कि किसी भी समय धरती पर पहुंचने वाली सूरज की रोशनी असल में सूरज से लगभग 8 मिनट 20 सेकंड पहले निकली थी. इस वजह से अगर सूरज अचानक गायब हो जाए तो आसमान में तुरंत कोई बदलाव नहीं दिखेगा. अंधेरा छाने से पहले धरती को सूरज की आखिरी किरण 8 मिनट 20 सेकंड तक मिलती रहेगी.

धरती की ग्रेविटी का क्या होगा?
सूरज के गायब होने का असर सिर्फ दिन की रोशनी खत्म होने तक ही सीमित नहीं रहेगा. सूरज की ग्रेविटी धरती को उसकी कक्षा में बनाए रखती है. आइंस्टीन की रिलेटिविटी की थ्योरी के मुताबिक ग्रेविटी के असर में बदलाव रोशनी की रफ्तार से फैलते हैं. इस वजह से धरती को तुरंत यह पता नहीं चलेगा कि सूरज गायब हो चुका है. लगभग 8 मिनट 20 सेकंड बाद ग्रेविटी में बदलाव धरती तक पहुंचेगा. उस समय सूरज धरती को उसकी मौजूदा कक्षा में बनाए रखने में सक्षम नहीं रहेगा. तब धरती सूरज के चारों तरफ अपनी सामान्य कक्षा का पालन करने के बजाय अपनी मौजूदा रफ्तार से तय रास्ते पर अंतरिक्ष में आगे बढ़ते रहेगी.
चांद क्यों गायब हो जाएगा?
चांद अपनी खुद की दिखाई देने वाली रोशनी पैदा नहीं करता है. रात में हमें जो चमकदार चांद दिखाई देता है वह उसकी सतह से टकराकर वापस आने वाली सूरज की रोशनी का नतीजा है. एक बार जब सूरज की रोशनी धरती चांद सिस्टम तक पहुंचना बंद हो जाएगी तो चांद के पास धरती की तरफ वापस भेजने के लिए सूरज की रोशनी नहीं होगी. इस वजह से वह रात के आसमान में दिखाई नहीं देगा. चांद खुद असल में गायब नहीं होगा बस इसका जाना-पहचाना चमकदार रूप गायब हो जाएगा.

धरती का तापमान कैसे बदलेगा?
सूरज की रोशनी ना होने से आखिरकार धरती का तापमान काफी तेजी से गिरने लगेगा. हालांकि अंधेरा होते ही ग्रह तुरंत नहीं जमेगा. धरती का महासागर, वायुमंडल और जमीन गर्मी को बनाए रखते हैं और उसे फैलाते हैं. इसका मतलब है कि तापमान धीरे-धीरे कम होगा. अगले कुछ दिनों और उससे ज्यादा समय में जैसे-जैसे ग्रह अपनी ऊर्जा का मुख्य बाहरी स्रोत खोता जाएगा सतह और ठंडी होती जाएगी. आखिरकार धरती की सतह का ज्यादातर पानी जम जाएगा. इससे जीवन के लिए काफी मुश्किल हालात पैदा हो जाएंगे. ठंडा होने की रफ्तार ग्रह के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग होगी.
पौधों का क्या होगा?
पौधे फोटोसिंथेसिस के लिए सूरज की रोशनी पर निर्भर होते हैं. इसके जरिए से प्रकाश ऊर्जा, कार्बन डाइऑक्साइड और पानी का इस्तेमाल करके भोजन बनाया जाता है. अगर सूरज की रोशनी गायब हो जाए तो फोटोसिंथेसिस रुक जाएगा. पौधे शुरू में अपनी जमी हुई ऊर्जा का इस्तेमाल करके जीवित रहेंगे लेकिन नया भोजन बनाने की क्षमता ना होने की वजह से आखिरकार मर जाएंगे. इसका असर जानवरों और इंसानों पर भी पड़ेगा क्योंकि पौधे फूड चैन का आधार होते हैं.
क्या धरती तुरंत रहने लायक नहीं रहेगी?
शुरुआती 8 मिनट और 20 सेकंड तक धरती काफी हद तक सामान्य दिखाई देगी क्योंकि सूरज की आखिरी रोशनी और सूरज के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव में बदलाव अभी तक ग्रह तक नहीं पहुंचे होंगे. उस देरी के बाद अंधेरा छा जाएगा और धरती की कक्षा से जुड़ी स्थिति बदल जाएगी. तापमान धीरे-धीरे गिरेगा, प्रकाश संश्लेषण रुक जाएगा और पारिस्थितिकी तंत्र खत्म होने लगेगा.
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