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Road Coding: कैसे होगी गांव की सड़कों की कोडिंग, इससे आम लोगों को क्या होगा फायदा?

Road Coding: भारत सरकार देश के गांवों की सड़कों की कोडिंग करने का प्लान बना रही है. आइए जानते हैं कैसे की जाएगी यह पूरी प्रक्रिया.

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  • भारत सरकार ग्रामीण सड़कों को डिजिटल पहचान देगी, सेवाएं सुधरेगी।
  • हर सड़क को अल्फान्यूमैरिक कोड मिलेगा, चौड़ाई अनुसार श्रेणियां होंगी।
  • क्यूआर कोड से सड़कों की तत्काल जानकारी, नेविगेशन होगा सहज।
  • आपातकालीन सेवाओं, डिलीवरी में सुधार होगा, जीवन बचाए जा सकेंगे।

Road Coding: भारत सरकार देश के ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर डिजिटल बदलाव लाने की तैयारी कर रही है. नेविगेशन, गवर्नेंस और पब्लिक सर्विस को बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने हर गांव की सड़क को एक यूनिक डिजिटल पहचान देने का फैसला किया है. इसके लिए लगभग 6 लाख गांवों की सड़कों और गलियों को खास नंबर, नाम और कोड दिए जाएंगे. आइए जानते हैं कि कैसे होगी यह प्रक्रिया और इससे आम लोगों को क्या फायदा होने वाला है.

हर गांव की सड़क को मिलेगी एक यूनिक पहचान 

नए इंट्रा विलेज रोड कोडिंग और ग्रेडिंग सिस्टम के तहत गांव के अंदर की हर सड़क, गली और रास्ते को डिजिटल रूप से मैप किया जाएगा और एक यूनिक अल्फान्यूमैरिक कोड दिया जाएगा. 

अब भले ही वह मुख्य सड़क हो छोटी गली हो या फिर जोड़ने वाला रास्ता हो हर रास्ते का अपना एक खास कोड होगा जो उसकी सही लोकेशन से जुड़ा होगा. इसका मकसद शहरी इलाकों की तरह एक व्यवस्थित ऐड्रेसिंग सिस्टम को बनाना है, जिससे ग्रामीण इलाकों की पहचान करना और वहां तक पहुंचना आसान हो सके.

सड़कों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा जाएगा 

सही क्लासिफिकेशन को पक्का करने के लिए गांव की सड़कों को उनकी चौड़ाई और इस्तेमाल के आधार पर तीन कैटेगरी में बांटा जाएगा. मुख्य सड़कें, क्रॉस रोड्स और कनेक्टिंग रोड्स. हर कैटेगरी को एक खास कोड दिया जाएगा. कोडिंग स्ट्रक्चर में राज्य, जिला, गांव और सड़क के प्रकार जैसी जानकारी लिखी होगी.

क्यूआर कोड से तुरंत जानकारी 

इस सिस्टम की सबसे आधुनिक विशेषता में से एक यह है कि जरूरी चौराहा और सड़क जंक्शनों पर क्यूआर कोड वाले साइन बोर्ड लगाए जाएंगे. वहां रहने वाले लोग और आने जाने वाले लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करके इन कोड को स्कैन कर सकेंगे और सड़क के बारे में जानकारी पा सकेंगे. इसमें सड़क का नाम, लोकेशन, रखरखाव का रिकॉर्ड और नेविगेशन की जानकारी शामिल होगी. इससे पारंपरिक लैंडमार्क पर निर्भर रहने के बजाय गांव में पते ढूंढना काफी आसान हो जाएगा. 

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तेज इमरजेंसी रिस्पांस सर्विस 

रोड कोडिंग का सबसे बड़ा फायदा बेहतर इमरजेंसी सर्विस होगा. अभी एंबुलेंस, पुलिस की गाड़ी और फायर ब्रिगेड को गांव में सही पते ढूंढने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है. ऐसा इसलिए क्योंकि रास्ते अक्सर आसपास की जानी पहचानी जगहों पर निर्भर होते हैं. डिजिटल रूप से कोड की गई सड़कों और मैप की गई जगहों की मदद से इमरजेंसी सर्विस देने वाले लोग प्रभावित इलाकों तक काफी तेजी से पहुंच सकेंगे. इससे मुश्किल हालात में लोगों की जान बचाई जा सकेगी. 

बेहतर डिलीवरी और पब्लिक सर्विस 

इस पहल से ग्रामीण भारत में ई-कॉमर्स, कूरियर सर्विस और पोस्टल डिलीवरी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. कंपनियां और डिलीवरी करने वाले लोग घरों और गांव को ज्यादा सही तरीके से ढूंढ सकेंगे.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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