किन मुद्दों ने तमिलनाडु से उखाड़ फेंकी 60 साल पुरानी सत्ता, कैसे रियल लाइफ हीरो बने विजय?
तमिलनाडु में 1967 के बाद से द्रविड़ राजनीति का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार जनता के बीच बदलाव की इच्छा दिखी. लगातार एक जैसी राजनीति और शासन से असंतोष ने मतदाताओं को नए ऑप्शन की ओर मोड़ा.

Tamil Nadu Election 2026: तमिलनाडु की राजनीति में इस बार के विधानसभा चुनाव में ऐसा बदलाव देखने को मिला है, जिसने दशकों पुरानी सियासी परंपराओं को तोड़ दिया. लंबे समय से राज्य की सत्ता डीएमके और एआईएडीएमके के बीच ही घूमती रही थी, लेकिन इस बार साउथ सिनेमा के सुपरस्टार जोसेफ विजय चंद्रशेखर ने अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम के साथ इस समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है. चुनाव से पहले जब विजय ने राजनीति में उतरने और नई पार्टी बनाने का ऐलान किया था तब, इसे गंभीरता से नहीं लिया गया है. लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव के नतीजे ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ एक फिल्म स्टार की एंट्री नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि तमिलनाडु से किन मुद्दों ने 60 साल पुरानी सत्ता को उखाड़ फेंका है और विजय रियल लाइफ हीरो कैसे बने.
क्यों बदली 60 साल पुरानी सियासत?
तमिलनाडु में 1967 के बाद से द्रविड़ राजनीति का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार जनता के बीच बदलाव की इच्छा साफ दिखाई दी. लगातार एक जैसी राजनीति, भ्रष्टाचार के आरोप और शासन से असंतोष ने मतदाताओं को नए ऑप्शन की ओर मोड़ा. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनकी पार्टी ने चुनाव में हिंदी विरोध और द्रविड़ पहचान को मुख्य मुद्दा बनाया. लेकिन यह रणनीति इस बार काम नहीं आई, खासकर शहरी और युवा मतदाताओं ने रोजगार, शिक्षा और बेहतर गवर्नेंस जैसे मुद्दों को ज्यादा अहमियत दी.
युवा, महिला और पहली बार वॉटर ने बदला खेल
इस चुनाव में सबसे बड़ी भूमिका युवाओं, महिलाओं और पहली बार वोट देने वालों की मानी जा रही है. तमिलनाडु की बढ़ती आबादी युवा है और उन्होंने पारंपरिक राजनीति से हटकर नए चेहरों को मौका दिया. वहीं महिलाओं का समर्थन भी विजय के पक्ष में गया. राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों को लेकर बनी धारणा ने भी सत्ता विरोधी लहर को मजबूत किया.
अकेले खड़े रहकर लड़ी लड़ाई
विजय ने चुनाव में किसी बड़े गठबंधन से दूरी बनाई और अकेले मैदान में उतरे. यह फैसला उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ, उन्होंने खुद को एक साफ-सुथरे और वैकल्पिक नेता के रूप में पेश किया, जिससे मतदाताओं में भरोसा बढ़ा. 234 सीटों वाली विधानसभा में उनकी पार्टी 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाती नजर आई जो किसी नए दल के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.
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पुराने सितारों से क्या अलग किया विजय ने?
तमिलनाडु की राजनीति में फिल्मी सितारों का इतिहास रहा है. एम. जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता जैसे नेता सफल रहे, लेकिन रजनीकांत और कमल हसन को वैसी सफलता नहीं मिली. विजय ने इसे अलग रास्ता अपनाया, उन्होंने राजनीति में अचानक एंट्री नहीं ली बल्कि सालों से अपने फैन क्लब को सामाजिक कामों में लगाया. इससे उन्हें पहले से तैयार कैडर मिला और जमीनी पकड़ मजबूत हुई.
थलापति को किन मुद्दों ने दिलाई जीत?
विजय की पार्टी ने चुनाव में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बदलाव को मुख्य मुद्दा बनाया. इसके साथ ही उन्होंने तमिल गौरव की बात भी की, लेकिन इसे विकास के साथ जोड़ा. उन्होंने जाति आधारित राजनीति से दूरी बनाई और खुद को एक समावेशी नेता के रूप में पेश किया. यह रणनीति उन मतदाताओं को पसंद आई जो लंबे समय से विभाजनकारी जैसी राजनीति से थक चुके थे. इसके अलावा इस चुनाव में पारंपरिक प्रचार के बजाय सोशल मीडिया और युवा समर्थकों की बड़ी भूमिका रही. विजय ने खुद एजेंडा सेट किया और बाकी पार्टियों उसी के अनुसार रिएक्शन देती नजर आई. उनके समर्थको खासकर जेन जी ने ऑनलाइन और ग्राउंड दोनों स्तर पर माहौल बनाया, जिसने चुनावी नतीजे को प्रभावित किया.
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